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लघुकथा- आग

बरसते पानी में काम को तलाशती हरिया की पत्नी गोरी को बंगले में कुत्ते को बिस्कुट खाते हुए देख कर कुछ आश जगी, ‘ यहाँ काम मिल सकता है या खाने को कुछ. इस से दो दिन से भूखे पति-पत्नी की पेट की आग बुझ  सकती थी.’

“ क्या चाहिए ?”

“ मालिक , कोई काम हो बताइए ?”

“ अच्छा ! कुछ भी करेगी ?” संगमरमरी गठीले बदन पर फिसलती हुई चंचल निगाहें उस के शरीर के रोमरोम को चीर रही थी.

“ जी !! ” वह धम्म से बैठ गई. उसे आज महसूस हुआ कि बिना तन की आग बुझाए पेट की आग नहीं बुझ सकती है उसे पेट की आग बुझाने के लिए तन की आग में जलने होगा .  

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मौलिक व अप्रकाशित 

२८/०९/२०१५ 

Views: 669

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Comment by Omprakash Kshatriya on July 8, 2015 at 7:09am

आदरणीय Saurabh Pandey जी आप की सराहना के लिए दिल से आभार .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 8, 2015 at 2:09am

सही है. इस प्रयास पर हार्दिक शुभकामनाएँ

Comment by Omprakash Kshatriya on July 3, 2015 at 8:49am

आदरणीय maharshi tripathi जी आप

लघुकथा पर आप की यथार्थ दृष्टिकोण के  लिए हृदय से आभार .

Comment by Omprakash Kshatriya on July 3, 2015 at 8:47am

आदरणीय  krishna mishra 'jaan'gorakhpuri  जी आप

ने लघुकथा को सुंदर कह दिया. मेरी मेहनत सफल हो गई .

इस प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार .

Comment by Omprakash Kshatriya on July 3, 2015 at 8:46am

आदरणीय  Dr Ashutosh Mishra जी आप की प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभारी हूँ .

Comment by Omprakash Kshatriya on July 3, 2015 at 8:45am

आदरणीय  Shyam Narain Verma जी आप की प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभारी हूँ .

Comment by Omprakash Kshatriya on July 3, 2015 at 8:44am

आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी

प्रणाम .

आप की प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार .

Comment by Omprakash Kshatriya on July 3, 2015 at 8:42am

आदरणीय JAWAHAR LAL SINGH जी आप ने बहुत बढ़िया बात की है

आप ने त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाया .

आभार आप का 

 

Comment by Omprakash Kshatriya on July 3, 2015 at 8:39am

आदरणीय  मिथिलेश वामनकर जी आप ने बहुत बढ़िया बात की है

आप ने त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाया .

आभार आप का 

भविष्य में भी इसी तरह मेरा सहयोग करते रहे.

Comment by Omprakash Kshatriya on July 3, 2015 at 8:37am

आदरणीय  vinaya kumar singh जी आप ने बहुत बढ़िया बात की है .त्रुटिया वास्तव में बहुत खटकती है . पर , कभीकभी गूगल अनुवाद गड़बड़ कर जाता है .

आभार आप का 

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