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फैंसी ड्रैस का आयोजन था।वृद्धाश्रम के सभी वृद्ध तरह - तरह की वेशभूषा में सजे थे। कोई किसान,कोई सब्जी बेचने वाला,कोई पुजारी ,कोई माली तो कोई संत।
उन्हीं में से एक वृद्धा ने कटोरा हाथ में लिया व अपनी वेशभूषा के अनुरूप वह भीख माँगने लगी।
फैंसी ड्रेस का माहौल ही बदल गया। सबके हाथ पीछे हट गए,आँखे पनीली हो गईं,ह्रदय करूण भाव से भर गया ।सभी के मन के एक कोने में एक पछतावा, एक पश्चाताप सा जाग गया।सब यही सोच रहे थे ओह! ये हमने क्या कर दिया।सबकी संवेदना ने विचारों पर ताला लगा दिया ये दृश्य सबकी बर्दाश्त के बाहर था।
सब ये भूल गए कि वे फैंसी ड्रेस के आयोजन में बैठे हैं।
अचानक से जज बनी यौवना उठी व वृद्धा के हाथ से कटोरा छीन कर केवल यही बोल पाई, "मुझे माफ कर दीजिए ! मुझे माफ कर दीजिए!

अप्रकाशित व मौलिक

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Comment by Archana Tripathi on August 18, 2015 at 3:12pm
आ.ममता जी ,दरअसल इसे मैं अपनी किसी गलती का परिणाम समझ रही थी क्योकि मैंने ओबीओ तो काफी समय से ज्वाइन किया हैं लेकिन एक्टिव अब कुछ दिन से हो रही हूँ ऐसी गलतियां मुझसे लगातार ही रही हैं ।सादर
Comment by Mamta on August 18, 2015 at 9:11am
आदरणीया अर्चना त्रिपाठी जी हुआ कुछ यूँ कि मैंने आपके नाम में त्रिपाठी के स्थान पर तिवारी जी लिख दिया जैसे ही गलती पता चली तो उसे क्षमा प्रार्थना के साथ सही करने की कोशिश की लेकिन हाय री किस्मत मोबाइल फोन पर आते विकल्पों ने पुनः त्रुटि पर त्रुटि करवा दी और मैं चुप बैठ गई यह सोच कर कि आप सब इसे सही कर लेंगे ।
मैं अभी ठीक से समूह पर क्या काम कैसे किया जाए इन सब बातों से अनभिज्ञ हूँ करती कुछ हूँ हो कुछ और जाता है।इसी कारण गलतियां ज्यादा हो रही हैं । आपको दिक् करने हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ।
सादर ममता
Comment by Archana Tripathi on August 18, 2015 at 7:39am
क्षमा कीजिये आदरणीय ममता जी//माफ़ कीजिये अर्चना त्रिपाठी जी पता जाए// यह टिप्पणी मुझे समझ नहीं आयी कृपया मार्गदर्शन कीजिये आभारी रहूंगी।
Comment by Mamta on August 16, 2015 at 8:18pm
माफ कीजिए अर्चना त्रिपाठी जी पता जाए।
सादर ममता
Comment by Mamta on August 16, 2015 at 8:15pm
आदरणीय मिथिलेश जी,ओमप्रकाश क्षत्रिय जी आदरणीया अर्चना तिवारी जी आप सभी का बहुत -बहुत आभार!
सादर ममता
Comment by Archana Tripathi on August 16, 2015 at 12:19am
शुक्र हैं अपनी गलती तो समझ आयी।बेहतरीन रचना हार्दिक बधाई आपको।
Comment by Omprakash Kshatriya on August 14, 2015 at 7:33am

सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 13, 2015 at 10:50pm

इस प्रस्तुति पर आपको हार्दिक बधाई 

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