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।।नियाग्रा फाल।।
" मम्मी बधाई हो ,आप दादी बनने वाली है ।तीन माह हो गये।"
खुशी से सराबोर, जल्दी से स्पीकर आन कर ।"बधाई हो,बधाई
हो, बेटा ख्याल रखना बहू का ,पहले क्यों नहीं बताया, बहू
ठीक तो है ना , कोई परेशानी तो नहीं ?"
"सब ठीक है मम्मी । मम्मी, पापा से कहो पासपोर्ट बनवा लें दोनों का।अभी टाइम है तब तक में बन ही जायेगा ।"
"पासपोर्ट का क्या करना है बेटा ?"
"क्यों ,यहाँ अमेरिका घूमने नहीं आओगे ?"
"तेरे पापा को छुट्टियां कहां मिलती है ?"
"मम्मी मैं कुछ नहीं सुनूंगा,पापा से बोलो दस,पंद्रह दिन की ही तो बात है , मैं टिकट भेज दूँगा ।शिल्पा कह रही थी ,मम्मी
को कुछ दिनों को यहाँ रहने के लिए कहना ,पापा घूम फिर के चले जायेंगे ,तुम रूक जाना ,डिलेवरी के बाद तीन चार माह तो रह लेना ।"फिर शिल्पा की मम्मी आ जायेंगी ।
"हाँ वो जैन साब के घर पर फोटो लगी है न ,वैसी ही टाइम
स्क्वेयर पर अपनी फोटो निकलायेंगे ,नियाग्रा फाल वगैरह
सब देखेंगे ।"
"बेटा तूं बहू को यहां क्यों नहीं भेज देता ?,हम लोग उसकी देख
भाल कर लेंगे ,डिलेवरी भी आसानी से हो जायेगी ,यहां मौसम
भी अच्छा रहता है ।"
"नहीं मम्मी यहां डिलेवरी होगी तो ,बच्चे को ग्रीन कार्ड मिल
जायेगा ।"
ग्रीन कार्ड के चक्कर में माँ ,बाप को बेवकूफ़ बना रहा है ,"कह दो हम आ जायेंगे।"बन जायेंगे बुद्धू ,खुद तो चला गया ,बच्चों को भी ......।
ऐ बाप का आश्वासन है ।

पवन जैन ,जबलपुर ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment

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Comment by Pawan Jain on January 14, 2016 at 10:22pm

आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी।


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Comment by rajesh kumari on December 23, 2015 at 6:59pm

जी ,सही कहा बच्चे समझते हैं की माँ बाप को जैसे बहला फुसला   लो वो आ जायेंगे क्या प्रेग्नेंट होने से पहले भी कभी बुलाया घूमने ?

अच्छी लघु कथा है हार्दिक बधाई आदरणीय .पवन जैन जी 

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