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वक्त बड़ा ही शरारती बच्चा

वक्त बड़ा ही शरारती बच्चा

चुपके से बदल देता स्याही
बालों पे फेर देता चांदी
जज्बात में घेर देता आंधी
आँखों को घेरे, धुंधले सबेरे
भाल पर भूली शिकनें उकेरे
गालों पर गुज़रे पलों की कहानी
करता ही जाता यूं मनमानी
वक्त बड़ा ही शरारती बच्चा
अपनी धुन का बिलकुल पक्का
आवाजाई का चक्र घुमाता
जनक ले जाता जननी ले जाता
फिर गोदी भरता बचपन बिठाता
फिर से खिलौनों की बातें चलाता
किलकारी से ललक
ललक से चहक
वासन्ती फुहारें
गुले गुलजारें
सोने से दिन चांदी सी रातें
उमंगों तरंगों की उजली बातें
धरती बदलने की अम्बर टहलने की
सागर को मथने की दुनिया दहलने की
जोश की बातें होश की बातें
मस्ती सी बातें मदहोश बातें
भुलावे में रखता स्वंयभू बनाता
स्वंयभू बेचारा सम्भल भी न पाता
वो फिर खिलखिलाता हंसी उडाता
वक्त बड़ा ही शरारती बच्चा
चुपके से बदल देता स्याही
बालों पे फेर देता चांदी
जज्बात में घेर देता आंधी
आँखों को घेरे, धुंधले सबेरे
भाल पर भूली शिकनें उकेरे
गालों पर गुज़रे पलों की कहानी
करता ही जाता यूं मनमानी
वक्त बड़ा ही शरारती बच्चा
अपनी धुन का बिलकुल पक्का।
.
अमिता तिवारी
मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 451

Comment

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Comment by रामबली गुप्ता on May 13, 2016 at 4:29pm
आपने आप में अनूठी रचना है आपकी आद.अमिता जी बिम्ब भी बहुत बेहतरीन लिया गया है। सहृदय बधाई स्वीकार करें।
Comment by amita tiwari on May 13, 2016 at 12:59am

मिथिलेश जी आपने पढ़ा और सराहा .धन्यवाद .

जज्बात में आंधी  आती है पर वक्त ही  तो है जो घेर के लाता  है  भीतर की आंधी  बाहर की आंधी ..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 11, 2016 at 2:56pm

आदरणीया अमिता जी, इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई.

//जज्बात में घेर देता आंधी// का मतलब समझ नहीं आया.

सादर 

 

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