For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़िद्दी बालक से अश्रु

अश्रु जब बागी हो जाते हैं 
तो  सुनते ही नहीं 
किसी भी बहाने से 
 बहलाने से 
फुसलाने से
सौ सौ जतन जुटाने से 
 कितना मनाओ
नहीं बहते तो बस बहते ही  नहीं। .. 
 
ज़िद्दी बालक से  अश्रु  
 
और जब अपनी पर आ जाएँ 
तो फिर बस आ जाएँ 
 ज्वार भाटा ले आएं 
बड़े बड़े न  रोक पाएं  
लक्ष हज़ारों तर्क   
इज़्ज़त, मान, अपमान के  
कितने  वास्ते  जुटाएं
मजाल है कि किसी की  सुन जाएँ 
 
ज़िद्दी बालक से  अश्रु 
 
असल में इनको छेड़ना सायास 
नितांत  ही  गलत प्रयास 
अश्रु कोई पानी का कतरा तो नहीं 
ये तो निःशब्द की जुबां है 
खामोशी का शोर हैं 
अनकही सुबकती  दास्तां हैं  
 
नहीं मांगते  गीता उपदेश 
चाहते हैं बस एक कांधा 
सर पर एक उच्छ्वास 
थोड़ी सी सांत्वना 
एक पैबंद लगा विश्वास 
बस इतनी सी बात 
 
बस इतना ही तो भर 
और फिर 
अश्रु  स्वंय होने लगते हैं ओस 
प्यार के  दुलार के 
बस एक पुचकार के  
बस इतने से सवाल के  
 अश्रू अस्मिता पर  पहरे  रहते   है 
अश्रु  कोइ स्वप्न तो नहीं 
जो आँखों में ठहरे  रहते  है  
अश्रु  रोकने से न कभी  रुकते हैं  
 अश्रु बहाने से न कभी बहते हैं 
.
"मौलिक व अप्रकाशित"
 अमिता 

 

Views: 551

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 5, 2016 at 8:33pm
अश्रु की बहुत सुन्दर परिभाषा पेश की है आदरणीया अमिता तिवारी जी।बधाई।
Comment by amita tiwari on June 5, 2016 at 8:27pm

मान देने के लिए हार्दिक आभार. 

सादर आभार।

(देरी के लिये सादर क्षमा)"


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 12, 2016 at 9:17am

अश्रू  पर बहुत खूब भावपूर्ण  रचना  अमिता जी हार्दिक बधाई 

Comment by amita tiwari on May 4, 2016 at 7:22pm

प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 4, 2016 at 2:07pm

बहुत सुंदर रचना | बधाई | 

Comment by amita tiwari on May 3, 2016 at 6:42pm

मान देने के लिए हार्दिक आभार. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 3, 2016 at 4:44pm

आदरणीया अमिता जी, अश्रु पर बहुत बढ़िया प्रस्तुति...हार्दिक बधाई... सादर 

Comment by Shyam Narain Verma on April 30, 2016 at 10:07am
बहुत सुन्दर और मार्मिक प्रस्तुति, हार्दिक बधाई ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 30, 2016 at 9:58am

जबरजस्त....भावों की बहुत ही ह्रदयस्पर्शी माला पिरोई है...बहुत सुन्दर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
3 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service