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ये दुनिया मेरी सल्तनत राजगी है-------ग़ज़ल

122 122 122 122
तेरे हुश्न में इक गज़ब ताज़गी है
भरूँ साँस में आस मन में जगी है।

नये काफियों की नई इक बह्र तुम
ग़ज़ल खूबरू जिसमें पाकीज़गी है।

तुम्हें चाँदनी से सजाया गया तो
अमावस को ईश्वर से नाराज़गी है

सिवा तेरे कोई भजन ही न भाये
यहाँ मन पे बस तेरी ही ख्वाजगी है

मेरे हाथ गर थाम कर तुम चलो तो
ये दुनिया मेरी सल्तनत राजगी है

मौलिक-अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on September 14, 2016 at 10:44am
ख्वाजगी'का अर्थ सही लिया है आपने ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 14, 2016 at 12:24am
आदरणीय बाउजी प्रणाम।

बह्र को बहर ही लिखना ठीक होगा, स्वीकार।
हुश्न को हुस्न कर दूंगा।
ख्वाजगी का अर्थ-मालिकाना हक़ के संदर्भ में है।
Comment by Samar kabeer on September 12, 2016 at 2:29pm
अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल उम्दा हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
सही शब्द तो बह्र ही है, और आपने लिखा भी सही है,लेकिन लय में उसी तरह आएगा जिस तरह जनाब गिरिराज भंडारी जी ने कहा है,आपका मिसरा मात्रा गणना के हिसाब से सही भी है, मगर रवानी में नहीं है,देखिये ।
मतले के ऊला मिसरे में 'हुश्न' को "हुस्न" कर लें ।
चौथे शैर में "ख्वाजगी"का क्या अर्थ लिया है आपने ?
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 12, 2016 at 12:21am
जी अवश्य, सादर आभार गिरिराज सर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 11, 2016 at 3:49pm

आदरणीय आपने ग़लत नही कहा , लेकिन जब आप बह्र  स्वयम लिख देंगे तो मात्रा 21 ही गिनी जायेगी -- आप बहर ही लिखें  , ताकि मात्रा 12 गिनी जाये

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 11, 2016 at 3:46pm
आदरणीय गिरिराज सर सादर प्रणाम।
सुझाव उत्तम है, लेकिन-----
1. ग़ज़ल की मात्राएँ- उच्चारण आधारित होती हैं?
2. मैं शहर को श-हर पढ़ता हूँ।
2. मैं बहर को ब-हर पढ़ता हूँ।

जिस शब्द का जैसा उच्चारण करता हूँ, वैसी ही मात्रा भी होगी

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 11, 2016 at 3:20pm

आदरणीय पंकज भाई , अच्छी गैर मुरद्दफ गज़ल कही है , दिल से बधाइयाँ स्वीकार करें ।
इस् मिसरे फिर से देख लें - लय से भटका हुआ है -

1- नये काफियों की नई इक बह्र तुम    -- बह्र को 21 लेना चाहिये  , इसे यूँ कर लें -
नये काफियों की नई बह्र हो तुम

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