For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -- मेरी ग़ज़ल का हर एक पहलू नया नया है ( दिनेश कुमार )

121 22 -- 121 22 -- 121 22

नया ज़माना है पा में घुंघरू नया नया है
मुहब्बतों का ये रक़्स हर-सू नया नया है

कहाँ से सीखा है यूँ नज़र से शिकार करना
तेरी कमाँ पर ये तीर-ए-अब्रू नया नया है

निग़ाह-ए-साक़ी से मत उलझना ए दोस्त मेरे
वो मय से छलके है रिन्द भी तू नया नया है

जवान बेटे को देख मुझको यही है लगता
कि मेरे शाने पे एक बाज़ू नया नया है

मैं तिफ़्ले-मकतब हूँ मीरो-ग़ालिब को पढ़ने वाला
मेरी ज़बाँ पे ये रंग-ए-उर्दू नया नया है

रदीफ़ भी देखिए नई है, नया है लहजा
मेरी ग़ज़ल का हर एक पहलू नया नया है

( पा = पैर ; रक़्स = नृत्य ; हर-सू = हर तरफ ;
मय = शराब ; रिन्द = शराबी ; शाना = कन्धा ;
तिफ़्ले-मकतब = a school boy, raw and inexperienced person )

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 603

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by दिनेश कुमार on November 10, 2016 at 3:49pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी सर। बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by दिनेश कुमार on November 10, 2016 at 3:48pm
आदरणीय भाई धर्मेन्द्र सिंह जी। बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by दिनेश कुमार on November 10, 2016 at 3:48pm
आदरणीय समर कबीर साहब। बहुत बहुत शुक्रिया। नवाज़िश है आपकी।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 10, 2016 at 10:28am

आदरणीय दिनेश भाई , खूबसूरत ग़ज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 9, 2016 at 7:58pm

दानिश'साहिब,बहुत ख़ूब, शैर दर शैर दाद

Comment by Samar kabeer on November 9, 2016 at 5:00pm
जनाब दिनेश कुमार'दानिश'साहिब आदाब,बहुत ख़ूब वाह, उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted blog posts
12 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
18 hours ago
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
23 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
23 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service