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ग़ज़ल -- अच्छे कर्मों का दिनेश अच्छा नतीज़ा होगा ( दिनेश कुमार )

2122____1122____1122____22

सर पे साया जो बुज़ुर्गों की दुआ का होगा
कामयाबी का सफ़र अपना सुहाना होगा

उसकी रोटी से जो आती है पसीने की महक
उसके घर ख़ुशबू-ए-बरकत का ख़ज़ाना होगा

रोज़े-महशर तेरी दौलत नहीं काम आयेगी
साथ बस तेरे सवाबों का पिटारा होगा

झूट को झूट सरे-बज़्म कहा है जिसने
देखना शर्तिया वो ज़हन से बच्चा होगा

मैंने ता-उम्र यही सोच के काटी अपनी
शब गुज़र जायेगी, क़िस्मत में सवेरा होगा

आबला-पाई मेरी और सराबों का सफ़र
बारहा प्यास कहे सामने दरया होगा

मुझको दुनिया की हक़ीक़त ने फ़क़ीरी बख़्शी
अब न होंठों पे मेरे लफ़्ज़-ए-तमन्ना होगा

शाम-ए-तन्हाई में दरवाज़ा-ए-दिल पर दस्तक !
मयकशी के लिए माज़ी का बुलावा होगा

तेरे आमाल पे निर्भर है तिरा मुस्तक़बिल
अच्छे कर्मों का दिनेश अच्छा नतीज़ा होगा

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 23, 2017 at 10:35pm

वाह वाह  आपने महफिल लूट ली  आदरणीय


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 18, 2017 at 9:21pm

बहुत सुंदर,,,, शेर दर शेर दाद प्रेषित है बहुत बहुत बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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