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ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"

2122 1212 22
ख़ुद उलझती है ख़ुद सुलझती है।
जिन्दगी इक अज़ब पहेली है।।

साथ तेरा मुझे मिला जबसे।
जिन्दगी मेरी मुस्कुराती है।।

सब्र करना व भूख से लड़ना।
मुफ़लिसी क्या नहीं सिखाती है।।

मैं बहुत चाहने लगा तुझको।
हर ग़ज़ल मेरी ये बताती है।।

बात कोई चुभे अगर दिल को।
तब ग़ज़ल ख़ुद मुझे बुलाती है।।

दुख घुटन दर्द आह मजबूरी।
ज़िन्दगी की यही कहानी है।।

मुस्कुराती हुई तेरी तस्वीर।
पास मेरे तेरी निशानी
है।।

जीतना हारना लगा रहता।
जिन्दगी ये सबक़ सिखाती है।।

दूर तू है बहुत मगर फिर भी।
ज़ेहन में याद तेरी रहती है।।

वो मुलाकात आपसे मेरी।
आज भी मुझको याद आती है।।

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by surender insan on October 15, 2017 at 1:11am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी। बहुत बहुत आभार जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 1:10am
जी बेहद शुक्रिया आपका दिनेश भाई जी। बहुत बहुत आभार जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 1:08am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय नीरज जी। बहुत बहुत आभार जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 1:08am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीया राजेश दीदी जी। बहुत बहुत आभार जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 1:07am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय सालिम राजा रेवा जी। बहुत बहुत आभार जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 12:50am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी। बहुत बहुत आभार जी। जी बिल्कुल जी। में अन्य विधाओं कीरचनाए भी पढ़ता हूँ जी आपके कहे अनुसार कोशिश करूंगा जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 12:43am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय अफरोज शाही जी। बहुत बहुत आभार जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 12:43am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय राज़ नवादी साहब जी। बहुत बहुत आभार जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 12:42am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय समर कबीर साहब। बहुत बहुत आभार जी। सादर नमन जी।
Comment by surender insan on October 15, 2017 at 12:41am
जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय नीलेश जी। बहुत बहुत आभार जी।

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