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जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर

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जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है

आवाज़ के पीछे चुपके से, रस्ते से यूँ भी भटकाता है

 

तुम बाँच रहे हो जो इतना, अज्दाद के किस्से मंचों से

उन किस्सों को सुनने वाला अब, पत्थर पे जबीं टकराता है

 

इंसान फ़कत है इक ज़र्रा, मिट जाएगा खुद इक झटके में

आकाश को छूती मीनारें, बेकार ही तू बनवाता है

 

है रंग बदलने में माहिर, हर शख़्स सियासत के अंदर

कुछ भी कहे वो लेकिन मतलब, कुछ और निकलकर आता है

 

इस लोक का तुझको क्या कोई, है ज्ञान ज़रा बतला बाबा!

अनदेखी कहानी गढ़-गढ़कर, परलोक मुझे दिखलाता है

अज्दाद - पुरखे

(मौलिक, अप्रकाशित)

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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:25pm

बहुत बहुत शुक्रिया आ. नवीन मणि त्रिपाठी जी


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:25pm

ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभार आ. सुरेन्द्र नाथ जी


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:24pm

हौसला अफ़्ज़ाई के लिए शुक्रिया आ. तेजवीर सिंह जी


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:23pm

बहुत बहुत शुक्रिया आ. लक्ष्मण धामी जी


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:23pm

हौसला अफ्ज़ाई के लिए शुक्रिया आ. बृजेश कुमार जी


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:22pm

बहुत बहुत शुक्रिया आ. सोमेश कुमार जी


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:22pm

बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम समर कबीर साहिब 


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:22pm

बहुत बहुत शुक्रिया आ. अजय तिवारी जी


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 4, 2018 at 1:21pm

विलम्ब के लिए मुआफी चाहता हूँ निलेश भाई, हौसला अफज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। ये ग़ज़ल मैंने तरही मुशायरे के बाद पूरी की थी इसलिए मुशायरे में शामिल न हो सका था।

Comment by Naveen Mani Tripathi on March 28, 2018 at 9:27pm

साहब शेर दर शेर उम्दा ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आपको ।

कृपया ध्यान दे...

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