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समर्थन मूल्य पर अनाज बेचकर , किसान हुए बेहाल
उत्पादों का स्वं मूल्य लगाकर , पूंजीपति हुए निहाल ॥

अरहर दाल ९० रूपये किलो , बोल- बोलकर लोग खूब चिल्लाते
५ रूपये के टैबलेट को , पूंजीपति १०० रूपये का मूल्य दिखाते ॥

मंहगाई का दीया दिखाकर , पूंजीपति खूब कमाते
कड़े -कड़े नोटों की माला , नेताओं को पहनाते ॥

चुनाव के वक़्त दिया था , नेताओं को चंदा
जी भर कर दाम बढाओ , कर लो गोरखधंधा ॥

दवा, सीमेंट और लोहा पर , सरकार की कुछ नहीं चलती
मंहगाई -मंहगाई बोलकर ,किसानों की छाती पर दाल दलती ॥

इन्ही कारणों से देश में , अमीरी -गरीवी की खाई बढ़ रही है
धीरे -धीरे अब , मजदूर -किसानों की त्योरी भी चढ़ रही है ॥

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Comment by baban pandey on July 12, 2010 at 7:37am
rana bhai .. ...samarthan mulya ka chammmch kisano ko n jine deta hai n marne ....dhanyabad

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on July 11, 2010 at 7:20pm
बिल्कुल सही कहा बबन भैया. सरकार ने समर्थन मूल्य नाम की तुतुही किसानों के मुंह में थमा दी है....बजाते रहो . उधर महंगाई की सुरसा अपना मुंह फैलती जा रही है. सत्ता में बैठे सोते लोगों को जगाने के लिए इसी कविता का प्रयोग होना चाहिए.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 10, 2010 at 10:04pm
समर्थन मूल्य पर अनाज बेचकर , किसान हुए बेहाल
उत्पादों का स्वं मूल्य लगाकर , पूंजीपति हुए निहाल ॥

किसानो की दशा को बयान करती, और कृत्रिम महंगाई को दिखाती यह कविता बहुत ही अच्छी बनी है,
Comment by Rash Bihari Ravi on July 9, 2010 at 1:08pm
jai ho jai man mohan bhai ,
chini mill ke malik ko ,
diye krisi mantri banai,
chini ke dam asman pe,
khub huaa kamai,
jai ho jai man mohan bhai ,

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