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कर्म ओर किस्मत

उम्र संग ये बढती है

कर्म से अपने चलती है

परीक्षा धैर्य की लेकर

मार्ग प्रशस्त ये करती है||

 

कर्म के पथ पर चढ़कर

ये, अगले कदम को रखती है

हार-जीत के थपेड़े दे देकर

निखार हुनर में करती है||

 

त्रुटी को सुधार के तेरी

आत्मविश्वास से बढ़ती है

उतार चढ़ाव के मार्ग बना

हर परस्थितियो लड़ने को  

तैयार हमें ये करती है||

 

तरक्की की सीढी चढ़े सदा

लक्ष्य निर्धारित करती है

उठा-गिरा गिरा-उठा कर

ज्ञान का महत्व कराती है ||

 

विजित कर हर

भय को मन के,

शौर्य गाथा गढ़ती है

आशा के संग जब

आगे बढती है||

 

सम्मान के जीने की चाबी

जीवन में भरती है

जब कर्म के संग ये जुडती है

नीव सुखद जीवन की रखती है ||

 

“फूल” कहे ये बात बड़ी

कर्म छोड़े किस्मत मिले

किस्मत छोड़े तो रंक

मेहनत भी तब काम ना आती

किस्मत ना हो जब संग ||

 

“मौलिक व् अप्रकाशित”

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Comment by PHOOL SINGH on April 15, 2019 at 9:29am

आपका बहुत बहुत धन्यवाद हौसलाअफजाई के लिए सुक्रिया कबीर जी|

Comment by Samar kabeer on April 14, 2019 at 4:53pm

जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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