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- "कुण्डलिया छंद"-
=========================
तेरा मुखड़ा चाँद सा, उतर न जाए यान।
गंजा पति कहने लगा, बचना मेरी जान।।
बचना मेरी जान,दक्षिणी ध्रुव पर खतरा।
चिंता की है बात, उमरिया  तेरी  सतरा।।
एक जगह दो चाँद, एक  तेरा  इक मेरा।
मेरे  सिर का  एक, दूसरा  मुखड़ा  तेरा।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
-हरिओम श्रीवास्तव-

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Comment by Hariom Shrivastava on September 19, 2019 at 7:39am

हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब।

Comment by Samar kabeer on July 25, 2019 at 2:37pm

जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छा कुण्डलिया छन्द लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।

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