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Hariom Shrivastava
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Hariom Shrivastava commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी'
"वाहह,वाहहह,लाजवाब ग़ज़ल। ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी...वाहह,दुरुस्त फ़रमाया।"
May 7
Hariom Shrivastava commented on Sushil Sarna's blog post कल, आज और कल ....
"वाह,वाहहह,लाजवाब रचना"
May 4
Hariom Shrivastava commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- पड़ गयी जब से आपकी आदत
"वाह,वाहहह,लाजवाब गजल। सुंदर सुंदर ख्याल।"
May 4
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"हार्दिक आभार आदरणीय Sushil Sarna जी, आदरणीय Vijay Niklte जी,आदरणीय Samar Kabeer जी,आदरणीय डॉ.छोटेलाल सिंह जी,आदरणीया Neelam Upadhyay जी, आदरणीय ब्रजेश कुमार 'ब्रज' जी, एवं आदरणीया Dr. Rama Dwivedi जी।"
May 4
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओबीओ के संस्थापक व सह-प्रबंधक आदरणीय गणेश बागी जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।"
May 4
Dr.Rama Dwivedi commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"वाह ! बहुत ही उत्कृष्ट कुंडलियां ,बधाई आदरणीय | "
Apr 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"वाह उत्तम छंद रचना आदरणीय.."
Apr 18
Neelam Upadhyaya commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी, नमस्कार । बहुत ही कुंडलियों की प्रस्तुति पर बधाई।"
Apr 18
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"आदरणीय हरिओम जी बेहतरीन कुण्डलिया लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई"
Apr 17
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा कुण्डलिया छन्द रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 17
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"बहुत ही मनमोहक। हार्दिक बधाई।"
Apr 17
Sushil Sarna commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"वाह आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी बहुत ही सुंदर,अर्थपूर्ण और संदेशप्रद कुंडलियों का सृजन हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Apr 16
Hariom Shrivastava posted blog posts
Apr 16
Dr.Rama Dwivedi left a comment for Hariom Shrivastava
"ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !"
Apr 16
Dr.Rama Dwivedi left a comment for Hariom Shrivastava
"ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji "
Apr 16
Hariom Shrivastava left a comment for Dr.Rama Dwivedi
"ओबीओ में आपका हार्दिक स्वागत है आदरणीया रमा द्ववेदी जी।"
Apr 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

Comment Wall (4 comments)

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At 12:29pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !

At 12:25pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji 

At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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Hariom Shrivastava's Blog

- कुण्डलिया छंद -

हो जाए कोई स्वजन, अगर  अचानक दूर।

तब निश्चित यह मानिए, है कुछ बात जरूर।।

है कुछ बात जरूर, वरन  ऐसा क्यों होता।

जो बनता अनजान, वही अपनों को खोता।।

सिर्फ जरा सी बात, चोट दिल को  पहुँचाए।

मीठे   हों यदि  बोल, गैर अपना हो…

Continue

Posted on April 16, 2018 at 5:00pm — 8 Comments

कुण्डलिया छंद -

कैसी खिचड़ी पक रही, कैसा है ये खेल।
घी खिचड़ी किसको मिले, किसको खिचड़ी तेल।।
किसको खिचड़ी तेल, कौन खायेगा रूखी।
जनता जो है आम, रहेगी फिर भी भूखी।।
खिचड़ी की औकात, कभी भी थी क्या ऐसी।
अब यह चर्चा आम, पकेगी खिचड़ी कैसी।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

Posted on November 4, 2017 at 12:21pm — 6 Comments

सार छंद -

गांधी के सपनों का भारत, कौन बनाए पूरा।

देखा था जो राष्ट्रपिता ने, सपना रहा अधूरा।।

जात-पाँत का भेद मिटेगा,अमन चैन आएगा।

श्रमजीवी घर में दो रोटी, सुबह शाम खाएगा।।1।।



सब हाथों को काम मिलेगा, हर घर में उजियारा।

कृषक और मजदूर कभी भी, फिरे न मारा-मारा।।

हस्तशिल्प लघु उद्योगों को, मूल्य मिलेगा पूरा।

चढ़े न कर्जा कभी कृषक पर, खाये भाँग धतूरा।।2।।



धर्म पंथ में बाँटा किसने, क्यों तकरार मचाई।

वितरण भी असमान हो रहा, बढ़ती जाती खाई।।

जैसे यहाँ… Continue

Posted on November 3, 2017 at 3:23pm — 10 Comments

सरसी छंद -

1-

जब से जीवन में आया है, साथी तेरा प्यार।

तब से शीतल और सुगंधित,चलने लगी बयार।।

उठने लगा ज्वार नस-नस में, आभासित मधुमास।

प्रिय मैं तो धनवान हो गया, तुम हो मेरे पास।।

2-

आँखों ही आँखों में अलिखित, जब हो गया करार।

ख्वाब हकीकत होते देखा, मैंने पहली बार।।

पंख लगे मेरी खुशियों को, रहा न पारावार।

आसमान में उड़ा ले गया, साथी तेरा प्यार।।

3-

जीवन की अनजान डगर पर, कदम बढ़ाए साथ।

हम दोंनों ने थाम लिथा था, इक दूजे का हाथ।।

कभी-कभी संघर्षों… Continue

Posted on September 22, 2017 at 7:05pm — 4 Comments

 
 
 

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