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Hariom Shrivastava
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Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"आदरणीया Dr.Prachi Singh जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ। आपका हार्दिक आभार।"
Nov 13
Hariom Shrivastava's blog post was featured

सार छंद -

गांधी के सपनों का भारत, कौन बनाए पूरा।देखा था जो राष्ट्रपिता ने, सपना रहा अधूरा।।जात-पाँत का भेद मिटेगा,अमन चैन आएगा।श्रमजीवी घर में दो रोटी, सुबह शाम खाएगा।।1।।सब हाथों को काम मिलेगा, हर घर में उजियारा।कृषक और मजदूर कभी भी, फिरे न मारा-मारा।।हस्तशिल्प लघु उद्योगों को, मूल्य मिलेगा पूरा।चढ़े न कर्जा कभी कृषक पर, खाये भाँग धतूरा।।2।।धर्म पंथ में बाँटा किसने, क्यों तकरार मचाई।वितरण भी असमान हो रहा, बढ़ती जाती खाई।।जैसे यहाँ रेवड़ी कोई, बाँट रहा हो सूरा।इसीलिए बापू का अब तक, सपना रहा…See More
Nov 7

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"बहुत खूबसूरत सामयिक विषय पर छंद लिखा है..सचमुच मज़ा आ गया बांच कर शिल्प पर शुद्ध है लेकिन "कभी भी"???? सिर्फ कभी ही पूर्ण भाव को व्यक्त करने में समर्थ है ..तो भी का अतिक्रमण क्यों ......ऐसे शब्दों से बच कर सम्प्रेषण में कथ्य सांद्रता…"
Nov 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"वाह आदरणीय सुन्दर छंद रचना हुई सादर"
Nov 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"बहुत ही सुन्दर यथार्थपरक रचना हुई आदरणीय.."
Nov 6
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 6
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,बढ़िया कुण्डलिया छन्द रचा,बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 5
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा सारछन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 5
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"सुंदर और सामयिक "
Nov 5
SALIM RAZA REWA commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई"
Nov 5
Mohammed Arif commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"आदरणीय हरिओम जी आदाब, दर्द-पीड़ा, आशा, साथ लेकर चलने की बात और साथ ही विकास सपनों के साकार करने की सामयिक रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 5
Hariom Shrivastava commented on Samar kabeer's blog post "अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"
"वाहह,वाहहहहह,लाजवाब गजल। सभी ख्याल एक से एक बढ़कर।"
Nov 4
Hariom Shrivastava posted blog posts
Nov 4
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"आदरणीया Rajesh Kumari जी,आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ। इस उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार।"
Nov 3
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"आदरणीय Sushil Sarana जी,आपकी विशद व समीक्षात्मक प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ। इस उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार।"
Nov 3

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"वाह बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुती दी है सार छंद में आद० हरिओम श्री वास्तव जी बहुत बहुत बधाई   "
Nov 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

Comment Wall (2 comments)

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At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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Hariom Shrivastava's Blog

कुण्डलिया छंद -

कैसी खिचड़ी पक रही, कैसा है ये खेल।
घी खिचड़ी किसको मिले, किसको खिचड़ी तेल।।
किसको खिचड़ी तेल, कौन खायेगा रूखी।
जनता जो है आम, रहेगी फिर भी भूखी।।
खिचड़ी की औकात, कभी भी थी क्या ऐसी।
अब यह चर्चा आम, पकेगी खिचड़ी कैसी।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

Posted on November 4, 2017 at 12:21pm — 6 Comments

सार छंद -

गांधी के सपनों का भारत, कौन बनाए पूरा।

देखा था जो राष्ट्रपिता ने, सपना रहा अधूरा।।

जात-पाँत का भेद मिटेगा,अमन चैन आएगा।

श्रमजीवी घर में दो रोटी, सुबह शाम खाएगा।।1।।



सब हाथों को काम मिलेगा, हर घर में उजियारा।

कृषक और मजदूर कभी भी, फिरे न मारा-मारा।।

हस्तशिल्प लघु उद्योगों को, मूल्य मिलेगा पूरा।

चढ़े न कर्जा कभी कृषक पर, खाये भाँग धतूरा।।2।।



धर्म पंथ में बाँटा किसने, क्यों तकरार मचाई।

वितरण भी असमान हो रहा, बढ़ती जाती खाई।।

जैसे यहाँ… Continue

Posted on November 3, 2017 at 3:23pm — 10 Comments

सरसी छंद -

1-

जब से जीवन में आया है, साथी तेरा प्यार।

तब से शीतल और सुगंधित,चलने लगी बयार।।

उठने लगा ज्वार नस-नस में, आभासित मधुमास।

प्रिय मैं तो धनवान हो गया, तुम हो मेरे पास।।

2-

आँखों ही आँखों में अलिखित, जब हो गया करार।

ख्वाब हकीकत होते देखा, मैंने पहली बार।।

पंख लगे मेरी खुशियों को, रहा न पारावार।

आसमान में उड़ा ले गया, साथी तेरा प्यार।।

3-

जीवन की अनजान डगर पर, कदम बढ़ाए साथ।

हम दोंनों ने थाम लिथा था, इक दूजे का हाथ।।

कभी-कभी संघर्षों… Continue

Posted on September 22, 2017 at 7:05pm — 4 Comments

दोहे - (गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष में)

आई है गुरु पूर्णिमा, इसका लें संज्ञान।

गुरु हैं सागर ज्ञान के, जान सके तो जान।।1।।



कोई कितना भी रहे, अद्भुत प्रतिभावान।

गुरु ही उसे निखारते, जान सके तो जान।।2।।



मठाधीश जो बन गए, बाँट रहे हैं ज्ञान।

उनके असली रूप को, जान सके तो जान।।3।।



गुरु की महिमा जानिए, गुरु बिन मिले न ज्ञान।

गुरु में प्रभु का रूप है, जान सके तो जान।।4।।



गुरु चाहें तो डाल दें, मुर्दे में भी जान।

क्षमताएं उनकीं अनत, जान सके तो जान।।5।।

(मौलिक व… Continue

Posted on July 9, 2017 at 6:34pm — 5 Comments

 
 
 

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