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Hariom Shrivastava
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Sheikh Shahzad Usmani commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"आदाब। दोनों बेहतरीन भावपूर्ण व संदेशवाहक कुण्डलिया छंदों के लिए बहुत-बहुत बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव साहिब।"
Oct 31
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"सुंदर कुण्डलिया छंद के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवस्तव जी |  //जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।//  बहुत खूब| भावपूर्ण रचना हुई है जिसके लिए पुनः बधाई \"
Oct 30
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-

1- जितना जब भी जो बचा, खाया सबके बाद। फिर भी उसने की नहीं, जीवनभर फरियाद।। जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।कहते कवि हरिओम,ध्यान रखना बस इतना।माँ का प्रेम अनंत, गहन सागर के जितना।।2-जिनके जीवन में करे, माँ खुशियाँ अपलोड।वृद्धावस्था में वही, बदल रहे हैं मोड।।बदल रहे हैं मोड, मगर माँ तो माँ होती।करके उनको याद, बैठ आश्रम में रोती।।कोई कर दे क्लीन, वायरस अब तो इनके।माँ ने कर अपडेट, मोड बदले हैं जिनके।।(मौलिक व अप्रकाशित)#हरिओम श्रीवास्तव#See More
Oct 30
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी।"
Sep 19
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय VijayNikore ji."
Sep 19
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब।"
Sep 19
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"हार्दिक आभार आदरणीय सी.एम.उपाध्याय जी।"
Sep 19
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब।"
Sep 19
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय सुशील सारना जी।"
Sep 19
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी।"
Sep 19
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय Vijay Niklte जी।"
Sep 19
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"सुन्दर रचना के लिए बधाई, आदरणीय हरि ओम जी"
Sep 12
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छा कुण्डलिया छन्द लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 7
Sushil Sarna commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"वाह आदरणीय हरिओम जी वाह , आपकी कुण्डलिया में निहित भावों का कोई सानी नहीं। नैनों के विभिन्न आयामों को परिभाषित करते इस सृजन के लिए दिल से बधाई।"
Sep 4
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-

नयनों का जिस क्षण हुआ, नयनों से सम्पर्क। नयन नयन के हो गए, हुआ न कोई तर्क।। हुआ न कोई तर्क, नयन नयनों पर छाए। निकट नयन को देख, नयन नत-नत शरमाए।।नयना ही आधार, नयन के है चयनों का।नयन नयन का मेल, निरामय है नयनों का।।(मौलिक एवं अप्रकाशित)#हरिओम श्रीवास्तव#See More
Sep 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

Comment Wall (5 comments)

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At 11:28pm on May 12, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी बहुत शुक्रिया हौसला बढाने का आपने ठीक फ़रमाया ' लुटे ' मेरी ग़लती है
At 12:29pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !

At 12:25pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji 

At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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Hariom Shrivastava's Blog

कुण्डलिया छंद-

1-

जितना जब भी जो बचा, खाया सबके बाद।

फिर भी उसने की नहीं, जीवनभर फरियाद।।

जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।

किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।

कहते कवि हरिओम,ध्यान रखना बस इतना।

माँ का प्रेम अनंत, गहन सागर के जितना।।

2-

जिनके जीवन में करे, माँ खुशियाँ अपलोड।

वृद्धावस्था में वही, बदल रहे हैं मोड।।

बदल रहे हैं मोड, मगर माँ तो माँ होती।

करके उनको याद, बैठ आश्रम में रोती।।

कोई कर दे क्लीन, वायरस अब तो इनके।

माँ ने कर अपडेट,…

Continue

Posted on October 29, 2019 at 10:51pm — 3 Comments

कुण्डलिया छंद-

नयनों का जिस क्षण हुआ, नयनों से सम्पर्क।
नयन नयन के हो गए, हुआ न कोई तर्क।।
हुआ न कोई तर्क, नयन नयनों पर छाए।
निकट नयन को देख, नयन नत-नत शरमाए।।
नयना ही आधार, नयन के है चयनों का।
नयन नयन का मेल, निरामय है नयनों का।।
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
#हरिओम श्रीवास्तव#

Posted on September 3, 2019 at 7:04pm — 4 Comments

कुण्डलिया छंद -

1-

ख़ातूनों का हो गया, खत्म एक संत्रास।

चर्चित तीन तलाक का, हुआ विधेयक पास।।

हुआ विधेयक पास, सभी मिल खुशी मनाएँ।

अब होंगी भयमुक्त, सभी मुस्लिम महिलाएँ।।

बीती काली रात्रि, चाँद निकला पूनों का।

बढ़ा आत्मविश्वास, आज से ख़ातूनों का।।

2-

तीस जुलाई ने रचा, एक नया इतिहास।

मुद्दा तीन तलाक पर, हुआ विधेयक पास।।

हुआ विधेयक पास, साँस लेगी अब नारी।

कहकर तीन तलाक, जुल्म होते थे भारी।।

ख़ातूनों ने आज, विजय खुद लड़कर पाई।

दो हजार उन्नीस, दिवस है…

Continue

Posted on July 31, 2019 at 7:51pm — 4 Comments

कुण्डलिया छंद-

- "कुण्डलिया छंद"-
=========================
तेरा मुखड़ा चाँद सा, उतर न जाए यान।
गंजा पति कहने लगा, बचना मेरी जान।।
बचना मेरी जान,दक्षिणी ध्रुव पर खतरा।
चिंता की है बात, उमरिया  तेरी  सतरा।।
एक जगह दो चाँद, एक  तेरा  इक मेरा।
मेरे  सिर का  एक, दूसरा  मुखड़ा  तेरा।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
-हरिओम श्रीवास्तव-

Posted on July 23, 2019 at 3:30pm — 2 Comments

 
 
 

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