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Hariom Shrivastava
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Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"- सार छंद - ------------------------------------------------------------- 1- फसल खड़ी तैयार खेत में, होने लगी कटाई। गर्मी में पानी पी-पीकर, फसल काटती माई।। रंग बालियों का मनभावन, सोने जैसा पीला। गागर से जल पीकर अम्माँ, कंठ कर रही गीला।। 2- पारा…"
Apr 23
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Hariom Shrivastava's blog post योग छंद
"आ. भाई हरिओम जी, सादर अभिवादन । सुंदर छंद रचे है ।हार्दिक बधाई ।"
May 28, 2020
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post योग छंद
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे छंद लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें । भाई 'अनुपम' जी की बातों का संज्ञान लें ।"
May 27, 2020
रणवीर सिंह 'अनुपम' commented on Hariom Shrivastava's blog post योग छंद
"आदरणीय सुंदर सृजन। चरण 8 - में लय भंग है। कारण 5वीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है, जो नहीं होना चाहिए। चरण 15 और 16 - में लय भंग है। कारण 9वीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है, जो नहीं होना चाहिए।"
May 26, 2020
Hariom Shrivastava posted a blog post

योग छंद

छंद विधान [20 मात्रा,12,8 पर यति,अंत 122 से]मन में हो शंका तो, खून जलाए।ऐसे  में  रातों को, नींद  न  आए।।बात अगर मन में जो, रखी दबाए।अंदर ही अंदर वह, घुन सा खाए।। (1).बुद्धि नष्ट क्रोधी की, क्रोध   कराए।क्रोधी ही  अपनों से, बैर    बढ़ाए।।बात सही क्रोधी को,समझ न आए।गर्त में पतन के भी, क्रोध   गिराए।। (2).ईर्ष्या से मानव की, बुद्धि नसाए।ईर्ष्या ही मन में भी, क्रोध बढ़ाए।।ईर्ष्या  इंसानों  से, पाप   कराए। ईर्ष्या ही जीवन को, नर्क बनाए।। (3).अमन चैन जीवन में, है यदि लाना।क्रोध बैर ईर्ष्या को, करें …See More
May 26, 2020
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"ढूढ़िए हर हाल में उम्मीद की किरण,प्रदत्त विषय पर बेहतरीन रचना"
Apr 11, 2020
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"वाह,वाहहह,तय समझ सबेरे का आना..एक नव ऊर्जा का संचसंचार करती लाजवाब रचना।"
Apr 11, 2020
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"बहुत सुंदर गीतिका, वाहह"
Apr 11, 2020
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"वाह,वाहह,बहुत सुंदर रचना"
Apr 11, 2020
Sheikh Shahzad Usmani commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"आदाब। दोनों बेहतरीन भावपूर्ण व संदेशवाहक कुण्डलिया छंदों के लिए बहुत-बहुत बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव साहिब।"
Oct 31, 2019
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 31, 2019
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"सुंदर कुण्डलिया छंद के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवस्तव जी |  //जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।//  बहुत खूब| भावपूर्ण रचना हुई है जिसके लिए पुनः बधाई \"
Oct 30, 2019
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-

1- जितना जब भी जो बचा, खाया सबके बाद। फिर भी उसने की नहीं, जीवनभर फरियाद।। जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।कहते कवि हरिओम,ध्यान रखना बस इतना।माँ का प्रेम अनंत, गहन सागर के जितना।।2-जिनके जीवन में करे, माँ खुशियाँ अपलोड।वृद्धावस्था में वही, बदल रहे हैं मोड।।बदल रहे हैं मोड, मगर माँ तो माँ होती।करके उनको याद, बैठ आश्रम में रोती।।कोई कर दे क्लीन, वायरस अब तो इनके।माँ ने कर अपडेट, मोड बदले हैं जिनके।।(मौलिक व अप्रकाशित)#हरिओम श्रीवास्तव#See More
Oct 30, 2019
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी।"
Sep 19, 2019
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय VijayNikore ji."
Sep 19, 2019
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब।"
Sep 19, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

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At 11:28pm on May 12, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी बहुत शुक्रिया हौसला बढाने का आपने ठीक फ़रमाया ' लुटे ' मेरी ग़लती है
At 12:29pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !

At 12:25pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji 

At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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योग छंद

छंद विधान [20 मात्रा,12,8 पर यति,अंत 122 से]

मन में हो शंका तो, खून जलाए।

ऐसे  में  रातों को, नींद  न  आए।।

बात अगर मन में जो, रखी दबाए।

अंदर ही अंदर वह, घुन सा खाए।। (1).

बुद्धि नष्ट क्रोधी की, क्रोध   कराए।

क्रोधी ही  अपनों से, बैर    बढ़ाए।।

बात सही क्रोधी को,समझ न आए।

गर्त में पतन के भी, क्रोध   गिराए।। (2).

ईर्ष्या से मानव की, बुद्धि नसाए।

ईर्ष्या ही मन में भी, क्रोध बढ़ाए।।

ईर्ष्या …

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Posted on May 25, 2020 at 8:00pm — 3 Comments

कुण्डलिया छंद-

1-

जितना जब भी जो बचा, खाया सबके बाद।

फिर भी उसने की नहीं, जीवनभर फरियाद।।

जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।

किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।

कहते कवि हरिओम,ध्यान रखना बस इतना।

माँ का प्रेम अनंत, गहन सागर के जितना।।

2-

जिनके जीवन में करे, माँ खुशियाँ अपलोड।

वृद्धावस्था में वही, बदल रहे हैं मोड।।

बदल रहे हैं मोड, मगर माँ तो माँ होती।

करके उनको याद, बैठ आश्रम में रोती।।

कोई कर दे क्लीन, वायरस अब तो इनके।

माँ ने कर अपडेट,…

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Posted on October 29, 2019 at 10:51pm — 3 Comments

कुण्डलिया छंद-

नयनों का जिस क्षण हुआ, नयनों से सम्पर्क।
नयन नयन के हो गए, हुआ न कोई तर्क।।
हुआ न कोई तर्क, नयन नयनों पर छाए।
निकट नयन को देख, नयन नत-नत शरमाए।।
नयना ही आधार, नयन के है चयनों का।
नयन नयन का मेल, निरामय है नयनों का।।
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
#हरिओम श्रीवास्तव#

Posted on September 3, 2019 at 7:04pm — 4 Comments

कुण्डलिया छंद -

1-

ख़ातूनों का हो गया, खत्म एक संत्रास।

चर्चित तीन तलाक का, हुआ विधेयक पास।।

हुआ विधेयक पास, सभी मिल खुशी मनाएँ।

अब होंगी भयमुक्त, सभी मुस्लिम महिलाएँ।।

बीती काली रात्रि, चाँद निकला पूनों का।

बढ़ा आत्मविश्वास, आज से ख़ातूनों का।।

2-

तीस जुलाई ने रचा, एक नया इतिहास।

मुद्दा तीन तलाक पर, हुआ विधेयक पास।।

हुआ विधेयक पास, साँस लेगी अब नारी।

कहकर तीन तलाक, जुल्म होते थे भारी।।

ख़ातूनों ने आज, विजय खुद लड़कर पाई।

दो हजार उन्नीस, दिवस है…

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Posted on July 31, 2019 at 7:51pm — 4 Comments

 
 
 

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