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Hariom Shrivastava
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Dr.Rama Dwivedi commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"वाह ! बहुत ही उत्कृष्ट कुंडलियां ,बधाई आदरणीय | "
20 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"वाह उत्तम छंद रचना आदरणीय.."
yesterday
Neelam Upadhyaya commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी, नमस्कार । बहुत ही कुंडलियों की प्रस्तुति पर बधाई।"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"आदरणीय हरिओम जी बेहतरीन कुण्डलिया लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई"
Tuesday
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा कुण्डलिया छन्द रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"बहुत ही मनमोहक। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Hariom Shrivastava's blog post - कुण्डलिया छंद -
"वाह आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी बहुत ही सुंदर,अर्थपूर्ण और संदेशप्रद कुंडलियों का सृजन हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Monday
Hariom Shrivastava posted blog posts
Monday
Dr.Rama Dwivedi left a comment for Hariom Shrivastava
"ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !"
Monday
Dr.Rama Dwivedi left a comment for Hariom Shrivastava
"ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji "
Monday
Hariom Shrivastava left a comment for Dr.Rama Dwivedi
"ओबीओ में आपका हार्दिक स्वागत है आदरणीया रमा द्ववेदी जी।"
Monday
Hariom Shrivastava left a comment for Dr.Rama Dwivedi
Monday
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"आदरणीया Dr.Prachi Singh जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ। आपका हार्दिक आभार।"
Nov 13, 2017
Hariom Shrivastava's blog post was featured

सार छंद -

गांधी के सपनों का भारत, कौन बनाए पूरा।देखा था जो राष्ट्रपिता ने, सपना रहा अधूरा।।जात-पाँत का भेद मिटेगा,अमन चैन आएगा।श्रमजीवी घर में दो रोटी, सुबह शाम खाएगा।।1।।सब हाथों को काम मिलेगा, हर घर में उजियारा।कृषक और मजदूर कभी भी, फिरे न मारा-मारा।।हस्तशिल्प लघु उद्योगों को, मूल्य मिलेगा पूरा।चढ़े न कर्जा कभी कृषक पर, खाये भाँग धतूरा।।2।।धर्म पंथ में बाँटा किसने, क्यों तकरार मचाई।वितरण भी असमान हो रहा, बढ़ती जाती खाई।।जैसे यहाँ रेवड़ी कोई, बाँट रहा हो सूरा।इसीलिए बापू का अब तक, सपना रहा…See More
Nov 7, 2017

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"बहुत खूबसूरत सामयिक विषय पर छंद लिखा है..सचमुच मज़ा आ गया बांच कर शिल्प पर शुद्ध है लेकिन "कभी भी"???? सिर्फ कभी ही पूर्ण भाव को व्यक्त करने में समर्थ है ..तो भी का अतिक्रमण क्यों ......ऐसे शब्दों से बच कर सम्प्रेषण में कथ्य सांद्रता…"
Nov 6, 2017
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"वाह आदरणीय सुन्दर छंद रचना हुई सादर"
Nov 6, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

Comment Wall (4 comments)

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At 12:29pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !

At 12:25pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji 

At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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Hariom Shrivastava's Blog

- कुण्डलिया छंद -

हो जाए कोई स्वजन, अगर  अचानक दूर।

तब निश्चित यह मानिए, है कुछ बात जरूर।।

है कुछ बात जरूर, वरन  ऐसा क्यों होता।

जो बनता अनजान, वही अपनों को खोता।।

सिर्फ जरा सी बात, चोट दिल को  पहुँचाए।

मीठे   हों यदि  बोल, गैर अपना हो…

Continue

Posted on April 16, 2018 at 5:00pm — 7 Comments

कुण्डलिया छंद -

कैसी खिचड़ी पक रही, कैसा है ये खेल।
घी खिचड़ी किसको मिले, किसको खिचड़ी तेल।।
किसको खिचड़ी तेल, कौन खायेगा रूखी।
जनता जो है आम, रहेगी फिर भी भूखी।।
खिचड़ी की औकात, कभी भी थी क्या ऐसी।
अब यह चर्चा आम, पकेगी खिचड़ी कैसी।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

Posted on November 4, 2017 at 12:21pm — 6 Comments

सार छंद -

गांधी के सपनों का भारत, कौन बनाए पूरा।

देखा था जो राष्ट्रपिता ने, सपना रहा अधूरा।।

जात-पाँत का भेद मिटेगा,अमन चैन आएगा।

श्रमजीवी घर में दो रोटी, सुबह शाम खाएगा।।1।।



सब हाथों को काम मिलेगा, हर घर में उजियारा।

कृषक और मजदूर कभी भी, फिरे न मारा-मारा।।

हस्तशिल्प लघु उद्योगों को, मूल्य मिलेगा पूरा।

चढ़े न कर्जा कभी कृषक पर, खाये भाँग धतूरा।।2।।



धर्म पंथ में बाँटा किसने, क्यों तकरार मचाई।

वितरण भी असमान हो रहा, बढ़ती जाती खाई।।

जैसे यहाँ… Continue

Posted on November 3, 2017 at 3:23pm — 10 Comments

सरसी छंद -

1-

जब से जीवन में आया है, साथी तेरा प्यार।

तब से शीतल और सुगंधित,चलने लगी बयार।।

उठने लगा ज्वार नस-नस में, आभासित मधुमास।

प्रिय मैं तो धनवान हो गया, तुम हो मेरे पास।।

2-

आँखों ही आँखों में अलिखित, जब हो गया करार।

ख्वाब हकीकत होते देखा, मैंने पहली बार।।

पंख लगे मेरी खुशियों को, रहा न पारावार।

आसमान में उड़ा ले गया, साथी तेरा प्यार।।

3-

जीवन की अनजान डगर पर, कदम बढ़ाए साथ।

हम दोंनों ने थाम लिथा था, इक दूजे का हाथ।।

कभी-कभी संघर्षों… Continue

Posted on September 22, 2017 at 7:05pm — 4 Comments

 
 
 

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