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Hariom Shrivastava
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम साहिब, सुंदर कुंडली छंद हुए हैं मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद - (मातृदिवस पर रचित)
"हृदय की भावमय गहराइयों से संसृत हुई यह आत्मीय प्रस्तुति भावुक कर गयी, आदरणीय हरिओम जी। प्रत्येक बंद माँ की स्नेहमय स्मृतियों का पिटारा है जिसमें व्यतीत घटनाओं का ख़ज़ाना है।  हार्दिक बधाइयाँ, आदरणीय।  सार छंद भी मुक्तक श्रेणी का है। अतः…"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Hariom Shrivastava's blog post चतुष्पदी -
"आद0 हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना प्रस्तुत की है आपने। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिए"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"आद0 हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। सन्देश परक बेहतरीन कुण्डलिया के लिए आपको बधाई प्रेषित करता हूँ। सादर"
Friday
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-

1- भाई भाई के लिए, हो जाता कुर्बान। रिश्ता है यह खून का, ईश्वर का वरदान।। ईश्वर का वरदान, नहीं है जिसका सानी।पाण्डव हों या राम, सभी की यही कहानी।।सुलझाकर मतभेद, न मन में रखें खटाई।बुरे वक्त में काम, सिर्फ आता है भाई।।2-भाई का रिश्ता अमर, जैसे लक्ष्मण राम।मगर विभीषण ने किया, इसे बहुत बदनाम।।इसे बहुत बदनाम, और भेदी कहलाया।देकर सारे भेद, नाश कुल का करवाया।।तुलसी ने रच ग्रंथ, इन्हीं की महिमा गाई।दशरथ नंदन राम, भरत लक्ष्मण से भाई।।(मौलिक व अप्रत्याशित)**हरिओम श्रीवास्तव**See More
Friday
Hariom Shrivastava commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न के सीवान में----------गीत
"वाह,वाहहह,अतिसुंदर गीत है आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा 'वात्सयायन' जी। एक जगह जरूर पुनर्विचार करने की आश्यकता मुझे जान पड़ती है। "मंद सी मुस्कान उसके दो अधर पर जब खिली"....यहाँ 'दो अधर' की जगह 'अधरों' होना चाहिए।"
May 16
Hariom Shrivastava commented on Dr.Prachi Singh's blog post आखिर क्यों ?
"वाहह,वाहहह,अतिसुंदर रचना"
May 15
Hariom Shrivastava commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महाभुजंगप्रयात सवैया में मेरी पंचम रचना
"वाहह,वाहहह,लाजवाब महाभुजंगप्रयात छंद। देशप्रेम से ओतप्रोत, सुंदर कामना।"
May 15
Hariom Shrivastava commented on Gajendra shrotriya's blog post इक ही दिन काफ़ी नही है - ग़ज़ल
"वाह,वाहहह,माँ को समर्पित लाजवाब ग़ज़ल कही आदरणीय गजेन्द्र जी।"
May 15
Hariom Shrivastava commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कौन अनाड़ी, कौन खिलाड़ी?' (कविता)
"वाह,वाहह,बहुत सुंदर व समसामयिक। ...क्या जमाना है! इतने बड़े लोग हुआ हुआ करते घूम रहे हैं।"
May 15
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post चतुष्पदी -
"उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी।"
May 15
Hariom Shrivastava commented on TEJ VEER SINGH's blog post विकास - लघुकथा -
"बहुत सुंदर लघुकथा"
May 15
Hariom Shrivastava commented on TEJ VEER SINGH's blog post विकास - लघुकथा -
"जं"
May 15
Sheikh Shahzad Usmani commented on Hariom Shrivastava's blog post चतुष्पदी -
"बहुत ख़ूब। हार्दिक बधाई जनाब हरिओम श्रीवास्तव साहिब।"
May 15
Hariom Shrivastava posted blog posts
May 14
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post सार छंद -
"उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय बासुदेव अग्रवाल जी।"
May 14

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

Comment Wall (5 comments)

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At 11:28pm on May 12, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी बहुत शुक्रिया हौसला बढाने का आपने ठीक फ़रमाया ' लुटे ' मेरी ग़लती है
At 12:29pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !

At 12:25pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji 

At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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Hariom Shrivastava's Blog

कुण्डलिया छंद-

1-

भाई भाई के लिए, हो जाता कुर्बान।

रिश्ता है यह खून का, ईश्वर का वरदान।।

ईश्वर का वरदान, नहीं है जिसका सानी।

पाण्डव हों या राम, सभी की यही कहानी।।

सुलझाकर मतभेद, न मन में रखें खटाई।

बुरे वक्त में काम, सिर्फ आता है भाई।।

2-

भाई का रिश्ता अमर, जैसे लक्ष्मण राम।

मगर विभीषण ने किया, इसे बहुत बदनाम।।

इसे बहुत बदनाम, और भेदी कहलाया।

देकर सारे भेद, नाश कुल का करवाया।।

तुलसी ने रच ग्रंथ, इन्हीं की महिमा गाई।

दशरथ नंदन राम, भरत लक्ष्मण…

Continue

Posted on May 17, 2019 at 9:40am — 2 Comments

चतुष्पदी -

धरती  से  तो   आसमान   का,  हो   जाता   अनुमान।
किंतु न खुद की छत से दिखता,खुद का कभी मकान।।
जो   जमीन   पर   पैर  जमाकर, करे   लक्ष्य   संधान।
वही   बनाता   है   इस   जग  में, नये-नये    प्रतिमान।।

(मौलिक व अप्रकाशित)
-हरिओम श्रीवास्तव-

Posted on May 14, 2019 at 2:00pm — 3 Comments

सार छंद - (मातृदिवस पर रचित)

1~

बचपन की यादों में जब मैं, मातृ दिवस पर लौटा।

पाया खुद के ही मुखड़े पर, नकली एक मुखौटा।।

लौट गया मैं गाँव अचानक, माँ से करने बातें।

माँ तो वहाँ न थी लेकिन थीं, यादों की बारातें।।

2~

माता माता मन्दिर जाती, रखे हाथ पर लोटा।

सीढ़ी चढ़ने में साड़ी का, लेती सदा कछोटा।।

माँ के पीछे-पीछे चलकर, हम बच्चे भी जाते।

माता को चुपचाप देखते, माता से बतियाते।।

3~

माँ ने अपनी खातिर माँ से, कभी नहीं कुछ माँगा।

उन मधुरिम यादों को हमने, क्योंकर खूँटी…

Continue

Posted on May 13, 2019 at 11:30am — 1 Comment

सार छंद -

1~

भवन और सड़कें पुल-पुलियाँ,मजदूरों की माया।

ईंटे पत्थर ढोते-ढोते, सिकुड़ी इनकी काया।।

श्रम के कौशल से भारत में, ताजमहल बन पाया।

लेकिन मजदूरों के हिस्से, हाथ कटाना आया।।

2~

भूख मिटाने की खातिर ही, श्रम करतीं महिलाएँ।

यदाकदा मजदूरी करते, बाल श्रमिक भी पाएँ।।

शिक्षा से वंचित रह जातीं, इनकीं ही संतानें।

मगर नीति निर्धारक शिक्षा, सौ प्रतिशत ही मानें।।

3~

सबकी खातिर महल अटारीं, जो मजदूर बनाते।

भूमिहीन होकर बेचारे, बेघर ही रह…

Continue

Posted on May 9, 2019 at 9:28pm — 2 Comments

 
 
 

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विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ग़लतफ़हमी-लघुकथा
"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तेज वीर सिंह जी"
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