For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2212 122 2212 122

थम ही नहीं रही है,रफ़्तार ज़िन्दगी में ।

हर दर्द की दवा है,बस प्यार ज़िन्दगी में ।।

बैठो न चुप दबाके, तुम राज़ सारे दिल के ।

जज़्बात का ज़रूरी,इज़हार ज़िन्दगी में ।।

माशूक़ से कलह का,यूं ग़म न कीजियेगा ।

पनपाती* है मुहब्बत,तक़रार ज़िन्दगी में ।।

इक़रार हर रज़ा का,है लाज़मी नहीं अब ।

है वक़्त पे जरूरी,इनकार ज़िन्दगी में ।।

'सागर' ख़री मुहब्बत,करके दिखो किसी से ।

हरदम रहे खुशी की,भरमार ज़िन्दगी में ।।

- प्रशांत दीक्षित 'सागर'

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 344

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by प्रशांत दीक्षित 'प्रशांत' on October 13, 2019 at 9:09pm

बहुत बहुत धन्यवाद Samar kabeer जी सुझावों के लिए ।

मुझे ऐसे ही मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता है  

Comment by Samar kabeer on October 13, 2019 at 8:49pm

जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

ज़िन्दगी में ।

'हर मर्ज़ की दवा है,बस प्यार ज़िन्दगी में'

इस मिसरे में 'मर्ज़' शब्द ग़लत है,सहीह शब्द है "मरज़",इसकी जगह "दर्द" ले सकते हैं ।

'पनपाति है मुहब्बत,तक़रार ज़िन्दगी में'

इस मिसरे में 'पनपाति' शब्द आपने शायद वज़्न 

पूरा करने के लिए लिया है,ये शब्द शुद्ध नहीं है,देखियेगा ।

'इक़रार हर रज़ा का,है लाज़मी नहीं'

ये मिसरा बह्र से ख़ारिज है,देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
42 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
9 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
14 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
23 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Feb 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 6
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service