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धनी बहुत थे मगर अब फ़क़ीर कितने हैं
हमारे युग मे बताओ कबीर कितने हैं

जो युध भूमि मैं छाती को ढाल करते हों
तुम्हारे पास बताओ वो वीर कितने हैं

सती प्रथा पे करो टिप्पणी वरन सोचो
बिना चिता के सुलगते शरीर कितने हैं

जो देखीं सिलवटें मुख पर युवा भिखारॅन के
समझ गया हूँ यहाँ दानवीर कितने हैं

मिले हैं बन के अपरिचित सदा इसी कारण
उन्हे पता ना चले हम अधीर कितने हैं

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Comment by Babita Gupta on May 19, 2010 at 12:25pm
जो युध भूमि मैं छाती को ढाल करते हों
तुम्हारे पास बताओ वो वीर कितने हैं

bahut sadhi hui ghazal, saral bhasha mey bahut badi baatkah sakney mey samarth yey khubsurat ghazal,
Comment by fauzan on May 17, 2010 at 11:58pm
Yograj bhai.....ab aap sharminda kar rahe hain mujhe.
Comment by fauzan on May 17, 2010 at 11:56pm
Pretam bhai....dhanyawad.
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 16, 2010 at 4:31pm
धनी बहुत थे मगर अब फ़क़ीर कितने हैं
हमारे युग मे बताओ कबीर कितने हैं
bahut sahi likha hai aapne fauzan bhai......bahut bahut dhanyabaad itni acchi gajal humlogo ke beech post karne ke liye........
Comment by Kanchan Pandey on May 16, 2010 at 3:20pm
Bahut hi khubsurat andajey-bayan hai aapki, bahut badhiya, Thanks,

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 16, 2010 at 12:03pm
फौज़ान भाई इतनी बुलंद खयाली? बात को कहने का इतना बेहतरीन अंदाज़? ये तेवर और ये सादगी? गजब है गजब ! आपके आश'आर पढ़ कर मेरे दिमाग से शायर होने की खुश-फ़हमी दूर हो गयी है, आपकी शागिर्दी करनी पड़ेगी मेरे पीर-ओ-मुर्शिद !
Comment by fauzan on May 15, 2010 at 12:44pm
Admin saheb

Thanx a lot

Regards
fauzan
Comment by fauzan on May 15, 2010 at 12:43pm
Ganesh Ji
Prashansa ke liye dhanyawad.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 15, 2010 at 8:37am
ग़ज़ल-१ इ तरह ही ये ग़ज़ल भी बहुत ही सुंदर और ससक्त बना है,खास कर के ये लाइने बहुत ही प्यारा लगा मुझे ....
सती प्रथा पे करो टिप्पणी वरन सोचो
बिना चिता के सुलगते शरीर कितने हैं
Comment by Admin on May 15, 2010 at 7:55am
मिले हैं बन के अपरिचित सदा इसी कारण
उन्हे पता ना चले हम अधीर कितने हैं,

फौजान साहब आपकी ये ग़ज़ल भी बहुत ही उम्द्दा है, जबरदस्त लिखे है, मुझे तो काफ़ी पसंद आया, ऊपर वाला आप की लेखनी को इसी तरह कायम रखे यही दुआ है, आगे भी हम सब को आपकी रचनाओ का इंतजार रहेगा, धन्यवाद,

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