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श्रधांजली ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह


ग़ज़लों का बादशाह, नज़्मो का सौदागर गया,
एक उसका जाना, करोड़ो को तनहा कर गया....

किनारे जिसने लगाया दर्दमंदो को सहारा देकर,
कागज़ की उस कश्ती में आज पानी भर गया.....

अपने होठों से छुए जिसने जज़बात हजारों के,
तरन्नुम का वो जादूगर करके आंख तर गया.....

अब न वो गायकी होगी, न वैसी महफिले होगी,
शायरी पसंदों का ख्वाब जैसे कोई बिखर गया...

न शेर कोई लब पर, न ग़ज़ल कोई दिल में है,
साथ तेरे जगजीत एक शायर विशेष मर गया..

 

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Comment by AVINASH S BAGDE on October 16, 2011 at 3:28pm

किनारे जिसने लगाया दर्दमंदो को सहारा देकर,
कागज़ की उस कश्ती में आज पानी भर गया.....badi achchi shradhdhanjali...sadhuwad.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 13, 2011 at 9:34pm

किनारे जिसने लगाया दर्दमंदो को सहारा देकर,
कागज़ की उस कश्ती में आज पानी भर गया.....

जगजीत सिंह को सुनने के बाद ही मुझ सहित कई मित्र अवश्य ही ग़ज़ल की तरफ आकर्षित हुए होंगे, श्रन्धांजलि स्वरूप यह ग़ज़ल  सच में आँखों को भिगाने के लिए पर्याप्त है, गायकी की दुनिया ने एक बहुत बड़ा सितारा खो दिया है | ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे |

आदरणीय हरजीत सिंह साहब, इस श्रन्धान्जली स्वरुप ग़ज़ल हेतु आभार आपका |

कृपया ध्यान दे...

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