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"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,

सादर नमन।
.
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
प्रस्तुत है.....
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130
विषय : विषय मुक्त
अवधि : 30-01-2026 से 31-01-2026
.
अति आवश्यक सूचना:-
1. सदस्यगण आयोजन अवधि के दौरान अपनी केवल एक लघुकथा पोस्ट कर सकते हैं।
2. रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना/ टिप्पणियाँ केवल देवनागरी फॉण्ट में टाइप कर, लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड/नॉन इटेलिक टेक्स्ट में ही पोस्ट करें।
3. टिप्पणियाँ केवल "रनिंग टेक्स्ट" में ही लिखें, 10-15 शब्द की टिप्पणी को 3-4 पंक्तियों में विभक्त न करें। ऐसा करने से आयोजन के पन्नों की संख्या अनावश्यक रूप में बढ़ जाती है तथा "पेज जम्पिंग" की समस्या आ जाती है। 
4. एक-दो शब्द की चलताऊ टिप्पणी देने से गुरेज़ करें। ऐसी हल्की टिप्पणी मंच और रचनाकार का अपमान मानी जाती है।आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है, किन्तु बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पाए इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है। देखा गया कि कई साथी अपनी रचना पोस्ट करने के बाद गायब हो जाते हैं, या केवल अपनी रचना के आस पास ही मंडराते रहते हैंI कुछेक साथी दूसरों की रचना पर टिप्पणी करना तो दूर वे अपनी रचना पर आई टिप्पणियों तक की पावती देने तक से गुरेज़ करते हैंI ऐसा रवैया कतई ठीक नहींI यह रचनाकार के साथ-साथ टिप्पणीकर्ता का भी अपमान हैI
5. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति तथा गलत थ्रेड में पोस्ट हुई रचना/टिप्पणी को बिना कोई कारण बताये हटाया जा सकता है। यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
6. रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका, अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल/स्माइली आदि लिखने/लगाने की आवश्यकता नहीं है।
7. प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार "मौलिक व अप्रकाशित" अवश्य लिखें।
8. आयोजन से दौरान रचना में संशोधन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार्य न होगा। रचनाओं का संकलन आने के बाद ही संशोधन हेतु अनुरोध करें। 
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यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सकें है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.
.
.
मंच संचालक
योगराज प्रभाकर
(प्रधान संपादक)

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स्वागतम

प्रतीक्षा है विषय मुक्त  सार्थक रचनाओं की।

दूसरा अंक -पत्र
'..... तो बी. ए. की परीक्षा आपने दोबारा क्यों पास की? ' इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष ने अंतिम सवाल किया।
'क्योंकि पहली बार मैं ग्रेस से पास हुआ था। ' चंदू ने जवाब दिया।
'मिस्टर चंदन, उसके पहले भी तो रियायत (ग्रेस) से आपने परीक्षाएँ पास की होंगी। आपलोगों का कट ऑफ तो हमेशा ही नीचे रखा जाता है। ' अध्यक्ष ने फिर सवाल कर दिया।
' जी। पर मैं हमेशा सामान्य कट ऑफ से ऊपर रहा हूँ। रिकॉर्ड आपके पास है ।'चंदन दास छूटते ही बोला।
'अच्छा! पर अभी तो उस वर्ग में शामिल होने की होड़ मची है।' बोर्ड -सदस्य एक साथ बोल पड़े।
'जी। औरों की वे जानें। रियायत पीढ़ियों से चली आ रही थी। मैंने ठुकरा दी। ' चंदन जोश में बोला।
"मौलिक एवं अप्रकाशित"

आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और प्रोत्साहक संदेशवाहक विचारोत्तेजक लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई। शीर्षक भी बढ़िया, उम्दा और आकर्षक।

हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। 

समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही देखने को मिलता है। हार्दिक बधाई इस लघुकथा पर आदरणीय मनन जी ।

दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। 

बेशक। सच कहा आपने।

चाहतें (लघुकथा) :
बार-बार मना करने पर भी 'इच्छा' ने अपनी सहेली 'तमन्ना' को फ़िर एक वीडियो क्लिप वाट्सएप कर ही दी। दोस्ती का तकाज़ा था। प्रतिक्रिया देनी ही थी। वीडियो चलाया। पिकनिक स्थल पर सहेलियॉं मौज-मस्ती करते हुए सेल्फी बना रहीं थीं। कोई भी स्वयं को किसी हीरोइन से कम नहीं समझ रही थी। वायरल होने की 'चाहत' सब की हरकतों में स्पष्ट नज़र आ रही थी।
"पंछी बनूॅं, उड़ती फिरूं मस्त गगन में, आज मैं आज़ाद हूं दुनिया के चमन में...!" एक गाने की तर्ज़ पर पैरोडी गाते हुए इच्छा अपनी ज़ुल्फें लहराती हुई सेल्फी वीडियो बना रही थी।
"मौसम मस्ताना, रस्ता अनजाना, जाने किस मोड़ पर....!" वीडियो क्लिप के अगले दृश्य में एक लड़की यह गीत गाते हुए अपनी सहेली का आलिंगन कर सेल्फी बना रही थी।
तमन्ना ने अपनी सातों सहेलियों का वीडियो फुर्ती से 'फॉरवर्ड और पॉज' करते हुए पूरा देखा ही था अपने मोबाइल पर कि इच्छा का फोन आ गया।
"हैलो, अब तो पछता रही होगी न सुहाने मौसम में हमारे साथ न होने पर, है न!" इच्छा ने इतराते हुए कहा।
"सात सहेलियॉं उड़ी-उड़ीं, वाहियात बनाऐं घड़ी-घड़ी!" तमन्ना ने जवाब में एक फ़िल्मी गाने की तर्ज़ पर गाते हुए कहा।
"जल क्यों रही हो! अगली बार चलो न हमारे साथ! मज़े करेंगे!" इच्छा ने पुनः तमन्ना को उकसाया।
"तुम्हें मालूम है न कि सोशल मीडिया में मेरा एक वीडियो वायरल होने पर मेरी सगाई ही नहीं टूटी, मुझ पर बंदिशें भी लगा दी गई हैं घरवालों की!" पश्चात्ताप की अग्नि में तपते स्वर में तमन्ना ने कहा।
"लेकिन तुम तो अपने फैसले ख़ुद ही करती रही हो न! बंदिशें तोड़ना आसान है तुम्हारे लिए अपनी ज़िन्दगी अपनी मनमर्जी से जीने के लिए!" इच्छा ऐसे बोली जैसे कि स्वयं अपनी बात कह रही हो।
"जिन फैसलों से रिश्तों में फासले और दरारें क़ायम हो जायें, वे ज़िन्दगी को बेमज़ा कर देते हैं और करिअर को बेदम, इच्छा!  सॅंभाल सको, तो तुम भी यूॅं मत उड़ो सोशल मीडिया पर।! सही लगने वाले बहुत से फैसले ग़लत होते हैं वहॉं, डियर!" तमन्ना ने गहरी सॉंस लेते हुए कहा, "बेहतर रिश्तों और बेहतर करिअर की चाहत नहीं है क्या तुममें!" यह कहते हुए उसने फोन काट दिया और वह वीडियो क्लिप डिलीट कर दी।
(मौलिक व अप्रकाशित)

आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई आदरणीय उस्मानी जी

आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और हौसला अफ़ज़ाई हेतु हार्दिक धन्यवाद आप दोनों को।

प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी जी। नमन।। 

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