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ना रोये देबेलन ,
ना हसही देबेलन ,
मन के माफिक इ ,
ना चले देबेलन ,
कलह तक रहे मन में ,
देश के खातिर जिआब ,
चल देनी सीना ठोकी ,
देश के सेवा करब ,
एड देखनी पढ़ के भरनी ,
आ गइल हमारो बुलावा ,
दौड़ में हम पास होगइनी ,
गर्व से सीना फुलवानी ,
हमरा के एक घुरलन ,
लगे आके हमसे पूछलन ,
के भेजले बा तोहके भाई ,
हम डट के बोलनी उनसे ,
कोई नइखे हमरा ऊपर ,
बोललन चला बगल में आव ,
आगे आपन हाथ बढ़ाव ,
इ धागा हम बांघत बानी ,
जाके तुहू सर के दिखाइहा ,
हो जाइ नौकरी तोहर ,
एक लाख हमरा के दिह ,
मन में उठाल ज्वाला भरी ,
मन कइलस करी बहिन महतारी ,
आज हिंद के इ गति बा ,
गरीबन के जिए ना दी लोग ,
इ दलाल हमनी के ,
ना रोये देबेलन ,
ना हसही देबेलन ,

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Replies to This Discussion

bahut khub kamal ke likhale bani
रौआ जब भी कुछ लिखिला हम सबसे पहीले राउर ब्लॉग ही पढ़िला .कहे से की रौआ कविता मे कुछ अलग ही स्वाद रहेला .हमरा समझ से त रौआ आपन
मॅन के भाव पूरा -पूरा कलम के मध्यम से उतार डीहिना
dhanyabad pathak ji
Ravi ji, ek se ek badh ke vishay raura uthayele aa oh par etana niman se pakad bana ke apan baat kah jayile. Hum ta raura ehi baat ke kayal bani. Bahut badhiya rachna........

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