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"इक जोश था जवानी में, क़िस्तों में कट गया,फिर बाप का बुढापा वसीयत में बट गया.------- क…"

kanta roy replied Jun 24, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-72

782 Jun 26, 2016
Reply by Nilesh Shevgaonkar

सदस्य टीम प्रबंधन

"नवगीत यथार्थबोध का मुखर पक्षधर है । आजके मशीनी युग में जीते हुए मानव की ज़िन्दग़ी की ल…"

kanta roy replied Jun 18, 2016 to कविता की विकास यात्रा : नयी कविता, गीत और नवगीत (भाग -२) // --सौरभ

7 Sep 6, 2016
Reply by Saurabh Pandey

सदस्य कार्यकारिणी

"महा उत्सव - 68 के सफल आयोजन और संकलन हेतु ढेरों  बधाईयाँ प्रेषित  है . उस दिन अति-व्…"

kanta roy replied Jun 15, 2016 to ओ बी ओ लाइव महा उत्सव अंक-68 की स्वीकृत रचनाओं का संकलन

13 Jun 19, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"धरा पर एक आवरण , परि आवरण, पर्यावरण , एक घेरा , रक्षा-कवच। जिसमे सुरक्षित हम------ स…"

kanta roy replied Jun 10, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-68

628 Jun 11, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"हैं वृक्ष आभूषण धरती के मत छीनो मानव मत छीनो। खुद ही जिस में तुम फँस जाओ वो जाल तो ब…"

kanta roy replied Jun 10, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-68

628 Jun 11, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"मलिन मन की सफाई में फोड़़ कर फटाके, गूॅंज और गैसों से वायुमंडल में अम्लता घोलते हैं फ…"

kanta roy replied Jun 10, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-68

628 Jun 11, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"और आहत कौन नहीं है यहाँ बीते कल को ढूँढता, हाँफता कब समझेगा ये बात कि विकास के हत्थे…"

kanta roy replied Jun 10, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-68

628 Jun 11, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"कर सुरक्षा प्रदान करते हैं सम्वेदनायें पूरी इकाई में सफर कर सकती है /करती है बिना र…"

kanta roy replied Jun 10, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-68

628 Jun 11, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आने वाली पीढ़ी वरना, सहज श्वास ना ले पाएगी। जब दानव की बात करेंगे, याद पूर्वजों की आए…"

kanta roy replied Jun 10, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-68

628 Jun 11, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"कविता आज चली थी गाँव की ओर डगर डगर पनघट की ओर रूनझुन रूनझुन कटही गाड़ी लौटी थी बचपन…"

kanta roy replied Jun 10, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-68

628 Jun 11, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

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चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
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