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दिगंबर नासवा's Discussions (471)

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"राकेश जी ... भाव मौलिक होने चाहियें ... शिल्प धीरे धीरे आ जाता है ... आपके भाव सीधे…"

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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"राकेश जी ... बहुत खूबसूरत ख्याल हैं ... आज़ादी की दुल्हन से मुहब्बत करने वाले वीरों…"

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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"खुदा की है ये दस्तकारी मुहब्बत  जमीं पे है किसने उतारी मुहब्बत    उमड़ती घटाएं महकती…"

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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"शेष धर भाई ... ये ग़ज़ल का अंदाज़ भी बहुत कमाल का है आपका ... सामाजिक संधर्भ मेंज लिख…"

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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"बहुत खूब अनीता जी ... गज़ब के भाव समेटे हैं आपने ... और अंतिम छंद तो कमाल का है ...…"

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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"वाह अरुण जी ... अपने तो भाई चारे और अमन को समर्पित किया है इन शेरों को ... मुहब्बत…"

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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"मेरी बात तुझको जो लगती है कड़वी उसी में  तू  पायेगा  मेरी  मुहब्बत ...   खूबसूरत शेर…"

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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"कभी दिल में ’शमसी’ के आ के तो देखो है इस में भरी ढेर सारी मुहब्बत    शम्सी साहब ...…"

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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"मुहब्बत क़े पहलू अभी और भी हैंकहाँ हमने देखी संवारी मुहब्बत   शेष धर जी ... खूबसूरत…"

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556 Dec 17, 2010
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"सँवारूँ मैं कैसे नहीं रूह दिखती मुझे आइने से है इतनी शिकायत ..."

दिगंबर नासवा replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
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