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मोहन बेगोवाल's Discussions (1,044)

Discussions Replied To (1044) Replies Latest Activity

प्रधान संपादक

" ये तो जिंदगी की शतरंज न हो  समाज में एक  ऐसी जंग चल रही जो लोगों को अँधेरे की धकेल…"

मोहन बेगोवाल replied Oct 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-7 (विषय: शतरंज)

1332 Nov 1, 2015
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"शतरंज की बाज़ी(लघुकथा)   पार्क में कुछ दिनों से कुछ बदला बदला सा लग रहा था, पहले लोग…"

मोहन बेगोवाल replied Oct 30, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-7 (विषय: शतरंज)

1332 Nov 1, 2015
Reply by Saurabh Pandey

" संशोधित  महफिल में जो आए सब नर अपने नहीं होते मकतल पे जो लाए वो सर अपने नहीं होते ह…"

मोहन बेगोवाल replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"  जो छोड़ कि भागे वो  नर अपने नहीं होते |जो झुक जाए हर दर सर अपने नहीं होते | वो छोड़…"

मोहन बेगोवाल replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"  आदरणीय निसार जी, बहुत अच्छी ग़जल कही बधाई हो "

मोहन बेगोवाल replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

" आदरणीय शिज्जू भाई जी,अच्छी और भाव पूर्ण ग़ज़ल के लिए बधाई "

मोहन बेगोवाल replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

" आदरणीय समर कबीर जी, आप जी शायरी हमें ग़ज़ल की विधा  समझने में मदद करती , सभी अश'आर बह…"

मोहन बेगोवाल replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"मिथिलेश वामनकर जी. बाकमाल शायरी पेश करने के लिए बधाई कबूल करें "

मोहन बेगोवाल replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

" आदरणीय योगराज जी,इस तेज़ी से आप जी की तरफ़ से संकलन बहुत अच्छा लगा, हमारा मार्ग दर्शन…"

मोहन बेगोवाल replied Oct 2, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-6 में स्वीकृत सभी रचनाएँ

60 Oct 4, 2015
Reply by VIRENDER VEER MEHTA

प्रधान संपादक

" बहुत सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो "

मोहन बेगोवाल replied Sep 30, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-6 (विषय: प्रत्युत्तर)

1313 Oct 1, 2015
Reply by Archana Tripathi

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Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
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