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Rana Pratap Singh's Discussions (2,359)

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"तो को दे और दे को तो करें तो कैसा रहेगा? दे हयात दे तो  फ़कीर सी दे मिज़ाज दे  तो मल…"

Rana Pratap Singh replied Nov 30, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"वाह ...क्या ख़ूबसूरत शेर हुए हैं...मन खुश हो गया .........एक एक शेर सवा लाख का है ...…"

Rana Pratap Singh replied Nov 30, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय डा ० आशुतोष जी अच्छे ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई| यह शेर मुझे बहुत ही पसंद आया|…"

Rana Pratap Singh replied Nov 30, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय चन्द्र शेखर जी  ख़ूबसूरत अशआर के लिए दिली दाद कबूल कीजिये|"

Rana Pratap Singh replied Nov 30, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
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"आदरणीया गीतिका जी अच्छ अशआर के लिए हार्दिक बधाई|"

Rana Pratap Singh replied Nov 30, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीया राजेश कुमारी जी  अच्छे शेर हुए हैं  ये दो शेर बहुत पसंद आये कभी गुनगुनाती ये…"

Rana Pratap Singh replied Nov 30, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
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"आदरणीया कल्पना जी बहुत खूब मुसलसल ग़ज़ल हुई है| हर शेर में आपकी शायरी की झलक दिखाई दे…"

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697 Nov 30, 2013
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"आदरणीय उमेश जी अच्छे अशआर के लिए दाद कबूल कीजिये|"

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697 Nov 30, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"यह कोई बहुत बड़ा ऐब नहीं है ..जैसे ऐब-ए तानाफुर को तमाम शायर नज़र अंदाज कर रहे हैं ..उ…"

Rana Pratap Singh replied Nov 30, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
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"आदरणीया वन्दना जी  बहुत खूब ..हासिल ए मुशायरा ग़ज़ल हुई है ......इस ज़मीन को लेकर मेरे…"

Rana Pratap Singh replied Nov 30, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
Reply by Saurabh Pandey

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आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

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