For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साथियो,

सादर नमन।
.
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
विषय : वो काली रात
अवधि : 30-03-2025 से 31-03-2025
.
अति आवश्यक सूचना:-
1. सदस्यगण आयोजन अवधि के दौरान अपनी केवल एक लघुकथा पोस्ट कर सकते हैं।
2. रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना/ टिप्पणियाँ केवल देवनागरी फॉण्ट में टाइप कर, लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड/नॉन इटेलिक टेक्स्ट में ही पोस्ट करें।
3. टिप्पणियाँ केवल "रनिंग टेक्स्ट" में ही लिखें, 10-15 शब्द की टिप्पणी को 3-4 पंक्तियों में विभक्त न करें। ऐसा करने से आयोजन के पन्नों की संख्या अनावश्यक रूप में बढ़ जाती है तथा "पेज जम्पिंग" की समस्या आ जाती है। 
4. एक-दो शब्द की चलताऊ टिप्पणी देने से गुरेज़ करें। ऐसी हल्की टिप्पणी मंच और रचनाकार का अपमान मानी जाती है।आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है, किन्तु बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पाए इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है। देखा गया कि कई साथी अपनी रचना पोस्ट करने के बाद गायब हो जाते हैं, या केवल अपनी रचना के आस पास ही मंडराते रहते हैंI कुछेक साथी दूसरों की रचना पर टिप्पणी करना तो दूर वे अपनी रचना पर आई टिप्पणियों तक की पावती देने तक से गुरेज़ करते हैंI ऐसा रवैया कतई ठीक नहींI यह रचनाकार के साथ-साथ टिप्पणीकर्ता का भी अपमान हैI
5. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति तथा गलत थ्रेड में पोस्ट हुई रचना/टिप्पणी को बिना कोई कारण बताये हटाया जा सकता है। यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
6. रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका, अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल/स्माइली आदि लिखने/लगाने की आवश्यकता नहीं है।
7. प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार "मौलिक व अप्रकाशित" अवश्य लिखें।
8. आयोजन से दौरान रचना में संशोधन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार्य न होगा। रचनाओं का संकलन आने के बाद ही संशोधन हेतु अनुरोध करें। 
.    
यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सकें है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.
.
.
मंच संचालक
योगराज प्रभाकर
(प्रधान संपादक)

Views: 200

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

स्वागतम

ध्वनि
लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब दीन -दुखियों में बांट देने की उसकी मंशा उसके आसपास खड़े शागिर्द लोग इंगित करते।कारवां यूं ही बढ़ता जाता। 'जय बाबा वैरागी,जय हो,जय हो' के उदघोष से वातावरण आंदोलित होता रहता।
उस रात भी बाबा की कुटिया के सम्मुख भक्त जनों का जमघट था।आशीष देते -देते हठात  ' बाबा नमन ' की ध्वनि सुन बाबा भाव विह्वल हो गया।उसकी आँखें भर आईं।बस बरसने की देर थी।समक्ष खड़ी रमणी झिझकती हुई पूछ बैठी,"क्यूं बाबा,क्या हुआ?आपके नेत्र सजल क्यूं हो गए?" पूरा जन -पारावार उत्कण्ठित हो जिज्ञासु नजरों से वह मार्मिक दृश्य देखने लगा था।बाबा मौन था।
"कुछ बोलिए प्रभु!आप चुप क्यूं हैं?"
"तुम कौन हो देवी?"बाबा ने पूछा।
"पहचानिए।"
"नहीं पहचान सकता।"
"क्यूं? देखिए तो।" ललना की भींगी हुई मधुर स्वर लहरी उभरी।
"यह कैसा सवाल है? बाबा किसी को नहीं देखते।" भक्त जन आक्रोशित हो चिल्लाए।
"नहीं देख सकता,देवी।बस सुन सकता हूं।"
"ओह!यह कैसे हुआ,देव?" बाबा के उभय नेत्र - कोटर की तरफ देखकर वह स्त्री चकराई।
"उसी रात जब  वे गुंडे तुम्हें ले जाने लगे।मैने भरसक विरोध किया।वे भारी पड़े।मेरी रात काली कर चले गए।"
"मौलिक एवं अप्रकाशित"

आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।

आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।

गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह साहिब।  बढ़ती गयी...बढ़ती गयी पाठक की जिज्ञासा शीर्षक से लेकर रचना के पड़ाव -दर-पड़ाव और सरप्राइज तत्व  पंच के साथ उजागर हुआ अंत में। ई़दुलफ़ित्र और नववर्ष/नवरात्र पर तहेदिल बहुत-बहुत मुबारकबाद और शुभकामनाएं आदरणीय मंच को।

तू ही वो वज़ह है (लघुकथा):
"हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने छोटे भाई से फोन पर कहा।
"वाअलैकुमअस्सलाम भाईसाहब । कैसी रहती? जैसी होनी थी हो गई मेरी भी ई़द?" आपकी कैसी रही?"
"कैसी ई़द? किसकी ई़द? न रोज़ा-नमाज़, न फ़ितरा-जक़ात-सदक़ा? पेट पीठ से चिपका हम सबका!" बड़े की आवाज़ दम सी तोड़ रही थी। बेरोज़गारी और घर में बीमार सदस्य, बस।
"हम चारों भाई अगर मिलजुल कर रह लेते, तो बॅंटवारे के हालात ने बनते, भाई!" छोटा सिसकते हुए बोला, "वालिद साहब को मैं अपने पास कब तक रखूॅं, मुझसे नहीं हो पा रही उनकी देखभाल। बिस्तर पर पड़े हुए कट रही उनकी। ले जाओ उनको आप?"
"चारों के माली हालात ख़राब हैं।‌‌ पता नहीं, किसकी बद्दुआ लगी है या हाय लगी है। अब्बा को ले जायें अपने पास उनके अज़ीज़ रिश्तेदार?"
"कौन रिश्तेदार भाईजान?"
"वही जिन्होंने अब्बा को उकसाया और उस रात अब्बा हम चारों के बीच बॅंटवारा कर बैठे अपनी दौलत और नसीब का।!"
"उनके नसीब का! क्या मतलब?" छोटे ने चौंक कर पूछा।
"दौलत बॅंटी, तो नसीब बॅंटा! हम चारों हासिल दौलत बर्बाद कर बैठे और अपने और वालिद साहब के नसीब को भी। वे भी न घर के रहे, न घाट के!"
"लेकिन नसीब तो ऊपरवाला तय करता है न!" छोटे ने रुंधे गले से कहा।
"नहीं, दौलत तय करती है और वे रातें तय करती हैं, जिनमें बड़े-बड़े फैसले हो जाया करते हैं घर की औरतों की वज़ह से!" बड़े ने कुछ कड़क और कड़वे स्वर में कहा।
(मौलिक व अप्रकाशित)

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
46 minutes ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
51 minutes ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
59 minutes ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
1 hour ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
1 hour ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"प्यादा एक बिम्ब है जो समाज के दरकिनार लोगों का रूप है। जिसके बिना कोई भी सत्ता न कायम हो सकती है न…"
1 hour ago
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
1 hour ago
आशीष यादव commented on vijay nikore's blog post प्यार का पतझड़
"कुछ चीज़ों को जब कहना मुश्किल हो जाता है तब वह कविता बनकर सामने आ जाती है। एक बेहतरीन कविता पर बधाई…"
1 hour ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक भावपूर्ण मर्मस्पर्शी कविता पर आपको बधाई।  आदरणीय Saurabh Pandey जी की टिप्पणी ही इस कविता…"
2 hours ago
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post कविता
"इस पटल पर प्रकाशित होने के 6 साल बाद इस कविता को पढ़ रहा हूं। भावों को गीत बना देना, कविता बना देना…"
2 hours ago
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"जो भी बोलना चाहा आपने अच्छा बोला। बाकी कमी बेसी आदरणीय उस्ताद जन बोलना चाहेंगे।"
2 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service