For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विमर्श: अयोध्या विवाद और रचनाकार

विमर्श:

अयोध्या विवाद और रचनाकार

संजीव 'सलिल'
*
अवध को राजनीति ने सत्य का वध-स्थल बना दिया है. नेता, अफसर, न्यायालय, राम-भक्त और राम-विरोधी सभी सत्य का वध करने पर तुले हैं.

हम, शब्द-ब्रम्ह के आराधक निष्पक्ष-निरपेक्ष चिन्तन करें तो विष्णु के एक अवतार राम से सबंधित तथ्यों को जानना सहज ही सम्भव है. राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त के अनुसार '' राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है / कोई कवि बन जाए स्वयं संभाव्य है.''

राम का सर्वाधिक अहित राम-कथा के गायकों ने किया है. सत्य और तथ्य को दरकिनार कर राम को इन्सान से भगवान बनाने के लिये अगणित कपोल कल्पित कथाएं और प्रसंग जोड़ेकर ऐसी-ऐसी व्याख्याएँ कीं कि राम की प्रामाणिकता ही संदेहास्पद हो गयी.

अब भगवान का फैसला इन्सान के हाथ में है. क्या कभी ऐसा करना किसी इन्सान के लिये संभव है ?

स्व. धर्मदत्त शुक्ल 'व्यथित' की पंक्तियाँ हैं:

''मेरे हाथों का तराशा हुआ, पत्थर का है बुत.
कौन भगवान है सोचा जाये?''

और स्व. रामकृष्ण श्रीवास्तव कहते हैं:

''जो कलम सरीखे टूट गए पर झुके नहीं .
उनके आगे यह दुनिया शीश झुकाती है ..
जो कलम किसी कीमत पर बेची नहीं गयी-
वह तो मशाल की तरह उठाई जाती है..''

और महाकवि दिनकर जी लिख गए हैं कि जो सच नहीं कहेगा समय उसका भी अपराध लिखेगा.

इस संवेदनशील समय में हम मौन रहें या सत्य कहें? आप सब आमंत्रित हैं अपने मन की बात कहने के लिये कि आप क्या सोचते हैं?

इस समस्या का सत्य क्या है?

क्या ऐसे प्रसंगों में न्यायालय को निर्णय देना चाहिए?

कानून और आस्था में से किसे कितना महत्त्व मिले?

निर्णय कुछ भी हो, क्या उससे सभी पक्ष संतुष्ट होंगे?

आप अपने मत के विपरीत निर्णय आने पर भी उसे ठीक मान लेंगे या अपने मत के पक्ष में आगे भी डटे रहेंगे?

उक्त बिन्दुओं पर संक्षिप्त विचार दीजिये.

सत्य रूढ़ होता नहीं, सच होता गतिशील.
'सलिल' तरंगों की तरह, कहते हैं मतिशील..

साथ समय के बदलता, करते विज्ञ प्रतीति.
आप कहें है आपकी, कैसी-क्या अनुभूति??

Views: 648

Reply to This

Replies to This Discussion

यह तो सत्य है कि निर्णय चाहे जो भी आये एक पक्ष को असंतुष्ट तो होना ही है| मुझे इस सन्दर्भ में अवध के ही बाशिंदे और मकबूल शायर मुनव्वर राणा साहब का इस व्यर्थ कि राजनीति से होने वाले नुकसान से क्षुब्ध होकर काफी पहले का दिया हुआ बयान याद आता है| उनका कहना था कि आप विवादित क्षेत्र में मंदिर बना लें और बदले में मुस्लिम समुदाय को १० मुस्लिम विश्विद्यालय भी बनाकर दें|
कुछ ऐसी ही मध्यमार्गी नीतियों से ही इस मसले का हल निकल सकता है|
राम का मंदिर हासिल करते समय ये तो ख्याल रखना ही पड़ेगा कि कहीं हम दिलों में समाये राम की प्रतिमा स्वयं तो नहीं तोड़ रहे हैं...राम का असली मंदिर तो मानव का मन मस्तिष्क है ...इंसानी वजूद है ..आपसी भाई-चारा है ...और राम तो पूरी ज़िन्दगी मानवता के लिए संघर्ष करते रहे हैं ....बुत शिकन कभी मन में विराजमान भगवान का मंदिर नहीं नहीं तोड़ सकते जब तक हम स्वयं इतने कमजोर न हो जाएँ कि मानवता ही भूल जाएँ....
मेरे ख्याल से हमें इस स्थान का उपयोग पर्यटन की दृष्टि से करे..न कि धार्मिक दृष्टि से....आज कोणार्क ,खजुराहो हमारे पर्यटन की अमूल्य थाती हैं...वे आज भी मंदिर हैं यद्यपि उनमे पूजा नहीं होती ...और किसी समुदाय को उनसे कोई शिकायत भी नहीं है...क्या अच्छा हो कि वहां एक संग्रहालय बने जिसमे राम से सम्बंधित सभी जानकारियां सप्रमाण उपलब्द्ध हों...ऐसे मंदिर का दर्शन कर हमारी आस्था और भी मज़बूत होगी ...और हमारी अस्मिता की भी रक्षा होगी...
मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे देशभक्त मुस्लिम भाई को भी इस पर कोई ऐतराज़ नहीं होगा....और एक विवादित मुद्दा खत्म होने से कानून व्यवस्था की रक्षा होगी...
डॉ. ब्रजेश जी का सुझाव अच्छा है. क्या इससे आप सहमत हैं? क्या अवध में राम जन्म स्थान पर सीताराम शोध केंद्र स्थापित हो? सुझाव राणा प्रताप जी का भी उपयुक्त है. क्या हमारे मुस्लिम बंधु इसे स्वीकारेंगे? आप के विचारों की प्रतीक्षा है. आपको न्यायाधीश बना दिया जाये तो आपका फैसला क्या होगा और क्यों?
कभी-कभी यह सोचकर दुःख होता है कि "ईश्वर अल्लाह तेरो नाम... सबको सन्मति दे भगवान्..." को लोग केवल एक गीत ही क्यों समझते हैं? इसमें छिपे सदभावना सन्देश को क्यों नहीं समझते?
परन्तु मुझे इस निर्णय से अत्यंत संतुष्टि हुई कि विवादित स्थान पर किसी विशेष धर्म-सम्प्रदाय को तवज्जो न देते हुए, कोर्ट ने दोनों ही धर्मों को समान दृष्टि से देखा. देखा जाए तो इस प्रकार का निर्णय वर्षों पहले ही हो जाना चाहिए था. मैं कोर्ट के फैसले से पूर्ण सहमत हूँ और इसका पूर्ण स्वागत करता हूँ.

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

AMAN SINHA posted a blog post

हर बार नई बात निकल आती है

बात यहीं खत्म होती तो और बात थी यहाँ तो हर बात में नई बात निकल आती है यूँ लगता है जैसे कि ये कोई…See More
18 hours ago
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-106 (विषय: इंसानियत)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। इस बार…See More
yesterday
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: बाद एक हादिसे के जो चुप से रहे हैं हम

221 2121 1221 212बाद एक हादिसे के जो चुप से रहे हैं हमअपनी ही सुर्ख़ आँख में चुभते रहे हैं हमये और…See More
yesterday
Usha Awasthi posted a blog post

धूम कोहरा

धूम कोहराउषा अवस्थीधूम युक्त कोहरा सघनमचा हुआ कोहराम किस आयुध औ कवच सेजीतें यह संग्राम?एक नहीं,…See More
yesterday
PHOOL SINGH posted a blog post

वर्तमान के सबसे लोकप्रिय नेता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नए भारत के निर्माण की खातिर, सुशासन का संकल्प लाए मोदीभ्रष्टाचार मुक्त भारत होगा, ये सोचकर आए…See More
yesterday
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

121 22 121 22 121 22 121 22हज़ार लोगों से दोस्ती की हज़ार शिकवे गिले निभाये।किसी ने लेकिन हमें न समझा…See More
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Dr.Vijay Prakash Sharma posted a photo
yesterday
Avery khan is now a member of Open Books Online
yesterday
Ashok Kumar Raktale added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
Thumbnail

पुस्तक समीक्षा : मोहरे (उपन्यास)

समीक्षा पुस्तक   : मोहरे (उपन्यास)लेखक              : दिलीप जैनमूल्य               :  रुपये…See More
yesterday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"मिलने वो मुझसे आएँगे अब के बहार मेंये उम्र कट न जाए इसी इन्तिज़ार में (रिप्लाई बॉक्स खुला है तो…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय, अमित जी आप सही कह रहे हैं। ऐसी अवस्था, सभी, में / पर / पे महर्षि पाणिनी की व्याकरण के…"
Sunday

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service