For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फिल्म दलदल हेतु गीत चाहिए...

 

आदरणीय ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सदस्यों, जैसा की आप सभी को पता है कि मैं बालीवूड के कलाकारों को लेकर एक हिंदी फ़िल्म जागरण फिल्म्स के बैनर तले "दलदल" बनाने जा रहा हूँ , इस फ़िल्म के कई गीतों की रेकॉर्डिंग हो गई है |
एक गीत मुजरा हेतु चाहिए, आप अपनी रचना मेरे इ मेल आई डी jagranfilm@gmail.com या ravikumarguru@india.com पर भेज सकते है, जिस रचना का चयन किया जायेगा उस रचनाकार को उचित पारिश्रमिक दिया जायेगा तथा गीतकार के रूप में फ़िल्म में जगह दिया जायेगा |
दृश्य कुछ इस प्रकार है ..................
एक युवा लड़की जो पूर्व में एक फ़िल्म में बाल कलाकार के रूप में काम कर चुकी है उसको उसके अपनों के द्वारा ही कोठे पर पैसो के लालच में पंहुचा दिया जाता है, वहा पर उसका दैहिक और मानसिक शोषण होता है | वो लड़की कोठा पर मुजरा करती है | लड़की मुजरे के द्वारा अपने दर्द को व्यक्त करना चाहती है |


 

रवि कुमार गुरु


सीईओ


जागरण फिल्म्स


(प्रबंधक ओ बी ओ की अनुमति से)

Views: 3497

Reply to This

Replies to This Discussion

arun ji bagi ji jo likhe hain o bilkul sach hain

सही  कहा फिल्म भोजपुरी नहीं हैं शायद यह 'मिस' हो गया !  वाकई यह अवसर ओ बी ओ के सदस्यों के लिए एक अवसर के समान hai बड़े मंच पर कुछ कर दिखाने और अपनी क्षमता दिखाने का | उम्मीद hai गुरु जी को अच्छा गीत मिल जाएगा और हम सब ओ बी सदस्य गौरवान्वित होंगे | गुरूजी को "हिंदी फिल्म' की सफलता के लिए शुभकामनाएं !!

dhanyabad
maine bhi  bheja hai ik geet, krpya dekhen.

रवि जी ,
नमस्कार .
                 मैंने दो गाने आपको मेल कर दिया है. देखकर बताइयेगा . धन्यवाद .

                -------  विभूति कुमार
                   निरीक्षक,सीमा शुल्क, पटना.

दोस्तों अब  तक  जितने भी गीत मिले हैं ओ सभ हमारे संगीत टीम के पास दे दिया गया हैं किसके गीत पे बिचार हुआ १२.०७.११ को पता चल जायेगा इस बिषय  में मैं कोई जबाब नहीं दे पाउँगा कारन तो आप लोग समझ ही गए होगे इसलिए आपलोग से निवेदन हैं इस बिषय में हमसे १२.०७.११ को बात कंरेंगे सहयोग के लिए धन्यवाद
बड़े दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा हैं कि ट्रेन एक्सीडेंट में मेरे चाचा जी स्वर्ग सिधार गए हैं जिसकी वजह से मुझे कोल्कता से २ दिनों  के लिए बाहर जाना पड़ रहा हैं और इस वजह से दलदल के गीत चुनाव प्रक्रिया  में देर हो रही हैं ,
गुरु जी ..
 "आप के "परिवार" में आये इस अकस्मात् दुखो से हम बहुत दुखी है ! मै ईश्वर से प्रार्थना करुंगा की भगवान आप के परिवार में आये इस आपार दुखो से लड़ने की हिम्मत दे  !
हम सब ओ. बी. ओ परिवार , ईश्वर से प्रार्थना करेंगे की भगवान आप के चाचा जी की आत्मा को शान्ति दे. ! 

रवि भाई, आपके परिवार में हुई अपूरणीय क्षति का हमें हार्दिक दुःख है. आपकी संलग्नता अवश्य ही अभी शोक-संतप्त पारिवारिक सदस्यों के साथ होनी चाहिये.

ईश्वर आपके परिवार को इस महा्न् क्षति से उबरने के लिये मानसिक संबल प्रदान करे.

गुरु जी , बहुत ही दुखद समाचार है , होनी को क्या कहा जाय , इश्वर चाचा जी की आत्मा को शांति प्रदान करे और पुरे परिवार को अपार दुःख सहन करने की शक्ति भी |
रवि जी,इस दुःख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं आपके परिवार के साथ है. ईश्वर चाचा जी की आत्मा को शांति प्रदान करे और आपके परिवार को इस शोक से निकलने का संबल .
"ॐ शांति शांति शांति " 

दोस्तों गुरु जी के चाचा जी की  अकस्मात स्वर्ग सिधार जाने से जो अपुर्निये क्षति हुई हैं वो पूरा नहीं किया जा सकता वैसे भी  बिधि के विधान को कौन रोक सकता हैं , अतः  हम OBO के सभी साथी मिलकर गुरु जी के चाचा जी (स्वर्गीये संत श्री राम लाल गिरी जी) के आत्मा की शांति के लिएके लिए परम पिता परमेश्वर से प्राथना करे , 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
yesterday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service