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कवन कारन से दुखी हम ,
समझ ना पईनी का बाटे गम ,
कवन कारन से दुखी हम ,
जे चाहनी उहे हम पवनी ,
अपना अगुंली पे जग नचावानी ,
आगे पीछे हमारा सब लोग ,
जेके चाहनी वोके भगवानी ,
जवान भी कईनी नाही कम ,
समझ ना पईनी का बाटे गम ,
राम नाम से दूर हम भगनी ,
मस्ती में रात रात भर जगनी ,
दारू के खूब छह उरावनी ,
बाई के हम खूब नचावानी ,
तब सब लोग कहे लाखो में हम ,
समझ ना पईनी का बाटे गम ,
उमर चालीश के जब पार भइल ,
बड़ा हमारा जोश में धार भइल ,
बहुते के हम धुल चटावानी ,
बहुते के हम गत में मिलावानी ,
रोवत रह गइल कोई दुखियारा ,
नाही ओके पार लगवानी ,
ओही सब बतिया के बाटे गम ,
समझ में आइल आँख भइल नम ,
आइल बुढ़ापा हमहू सुधारब ,
जन सेवा में अब हम लगाब ,
अब केहू आशु बहे देहब ना हम ,
समझ में आइल आँख भइल नम ,

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Replies to This Discussion

समझ में आइल आँख भइल नम ,
आइल बुढ़ापा हमहू सुधारब ,
जन सेवा में अब हम लगाब ,
अब केहू आशु बहे देहब ना हम ,
समझ में आइल आँख भइल नम

देर आइल, दुरुस्त आइल । बहुत बढ़िया रवि जी ।
bahut bahut dhanyabad neelam ji

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