For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गर्मी के महीना में हमरा मन में इ बात उठेला कि हमनी का काहे ना हिल स्टेषन में पैदा भइली जां। ओहिजा हमनी का ना जायेके पड़ीत। एहिजे ठंडा के मजा लूटल जाईत। बाकिर विधाता के आगे केकर बस चलेला। हारि मान के ओहि तरे रहे के बा जवना तरे उ राखसू। गर्मी के महीना में पहिले आम फरे बेषुमार। हमनी का आम खा-खा के अघा जाईजां। खरबूज-तरबूज के पूछ ना रहे । घरे-घरे लोगन के खइला से मन हटि जा अउरू गाइ-गोरू भी मनहट्टू हो जा सन। आम के अचार हर घरे घइली भरल रहसं। आजू के दिन एकरा बारे में सोचल भी अइसन बा कि जवन अपना दिमाग में ना आ सके।
बाजार में जाईं त रउरा के आम के लेके दुकान दार बइठल मिल जइहसन। लेकिन पहिले के जइसे हितई से आइल सपना हो गईल। लोग आम के दाम पूछता अउर जे पुरनका पीढी के बा उ लजाके आपन मुंह फेरिलेता आ ओकरा जरूरत बा त खरीदता नाही त ओइजा से अइसन बिदकता कि जइसे कवनो खतरनाक जानवर देखिलिहलस।
बाजार भाव भी आसमान में चढ गइल बा। जवन परसाल बीस के रहे उ एह साल पैतीस व चालीस के नीचे नइखे। कहीं-कहीं कम करवला पर तीस तक आ जाता । उ हो एहसान जतावत।
धन्य समय के खेल बा । अउर हमनी के भाग बा । जबकि संसार विष्व पर्यावरण दिवस मना रहल बा । जगहे-जगह फेड़-गांछी लगावल जात बा। हमनी का जरूरत के उ फेड़ आ गांछी लगावे चाहीं जवना से हमनी के फायदा होखे । इ सच बा कि कुछ लकड़ी अउरो काम में आवे ली स लेकिन आम जामुन, महुआ, श्रीफल, नीबू, आवला, आमड़ा इत्यादि पर जदि ध्यान दीहल जाउ त इ सामयिक होखी आ जनमन के बहुत लाभ पहुंची।

Views: 749

Replies to This Discussion

सुंदर सकारात्मक रचना हेतु बधाई स्वीकारें

 सादर 

सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकारें आदरणीय | 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-112

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-112 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।"ओबीओ…See More
2 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक .. इच्छा , कामना, चाह आदि
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, सुंदर दोहावली के लिए बधाई स्वीकार करें ।"
6 hours ago
Samar kabeer commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"जनाब आज़ी तमाम जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'न वक़्त-ए-मर्ग मुकर्र न…"
7 hours ago
जयनित कुमार मेहता commented on Mamta gupta's blog post गजल
"आदरणीया ममता गुप्ता जी, सादर नमस्कार! उम्दा ग़ज़ल हुई है। आपको हार्दिक बधाई!"
16 hours ago
जयनित कुमार मेहता commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"आदरणीय आज़ी तमाम जी, सादर नमस्कार! बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने। इसके लिए आपको हार्दिक बधाई प्रेषित…"
16 hours ago
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक .. इच्छा , कामना, चाह आदि
"अच्छा दोहा- सप्तक लिखा, आ. सुशील सरना जी किन्तु पहले दोहे के तीसरे चरण में, "ओर- ओर " के…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Mamta gupta's blog post गजल
"उनको छेड़ा इक ज़रा तो हो गया चेहरा गुलाल। खुल गया मुझ पर उभरती रौशनी क्या चीज़ है। वाह्ह्ह खूबसूरत शेर…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"बहुत बहुत शुक्रिया इस ज़र्रा नवाज़ी का आ चेतन जी"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक .. इच्छा , कामना, चाह आदि
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय ।"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"जनाब, आज़ी आदाब, अच्छी ग़ज़़ल हुई, मुबारक हो !"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक .. इच्छा , कामना, चाह आदि
" आदरणीय सुशील सरना साहब, मानव मन की चाह पर सुन्दर दोहावली रची है आपने. हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Euphonic Amit commented on Mamta gupta's blog post गजल
"अच्छी ग़ज़ल कही आपने बधाई "
Monday

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service