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indravidyavachaspatitiwari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 84 in the group चित्र से काव्य तक
"काशी में खुशियां काशी में यह हुई है जुटाई अचरज भी है अभी भी खुदाई ये इंसान है जो प्रसन्नता भरे क्या सोचा है जो है खुशियां लुटाई आपके दांत दिखने से चलता पता कहींे है भी आप को चढता नशा मेहनत के बाद भी है ऐसा लगता ये दुनिया है मेरी जो थी तब पराई कहते…"
Apr 21
somesh kumar commented on indravidyavachaspatitiwari's blog post समझ
"अब आपकी रचना के बारे में | निसंदेह घरेलू सम्बन्धों उसमें भी सास-बहू सम्बन्धों  को विषय बना कर आपने रचना लिखी है |पर रचना में कथानक के अलावा बाकि तत्वों यानि घटनाओं और कथा-वस्तु का विकास नहीं हुआ | सारी कहानी में केवल मरछ्ही एवं संदीप का चित्रण…"
Mar 30
somesh kumar commented on indravidyavachaspatitiwari's blog post समझ
"kshma prarthi hun ki laptop pr aapki rchna nhi khul rhi hai isli ynha mobile se aapki rchna pr aana pda. sbse phle to yh mhsus kr aandit hua ki mnch pr lmbi rchnavo ko likhne pdhne vaale mitr aa rhe hain aur lmbi khaniya jinka ish mnch pr gorh…"
Mar 30
indravidyavachaspatitiwari posted a blog post

समझ

मंदिर के भीतर भीड़ उमड़ रही थी। तिल धरने की जगह नहीं बची थी। सभी को अपनी धुन लगी थी। सभी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे और चाहते थे कि उनका जल मूर्ति पर चढ़ जाय जिससे उन्हें बाहर निकलने का मौका मिले। औरतों का रास्ता दूसरी तरफ से था। औरते उसी तरफ से आ कर मूर्ति का दर्शन पूजन कर रही थीं। मरछही भी उन्हीं महिलाओं में शामिल थी। आगे बढ़ रही थी पीछे से धक्का लग रहा था। वह जब मूर्ति के सामने आई और उसने अपना जल गिराया। उसके बाद सिर नवाकर आशीष मांगा। मरछही ने जब सिर उठाकर मूर्ति के अलावा पहली बार देखा तो…See More
Mar 26
indravidyavachaspatitiwari commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"रोहिला जी की लघुकथा में जो रवानी है वह काबिले तारीफ है। मां का सस्पेंस अपने आप में एक उदाहरण रखता है। अंत भी एक पुस्तक तक जाकर सराहनीय स्थान बनाता है। संग्रहणीय रचना के लिए सादर धन्यवाद"
Feb 15
indravidyavachaspatitiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-88
"गये रहे गुरूकुल में पढन,े एक संग चार लोग। गुरू ने उनको पाठ पढाया, उनने भी ध्यान से जाना। पूरी हुई जब उनकी शिक्षा, वापस आये चार लोग। रास्ते में देखा अस्थि पंजर, लगे निहारने चार लोग। एक ने किया अस्थि संचय, दूजा लगा चढाने मांस । तीजा जब था सांस…"
Feb 10
indravidyavachaspatitiwari commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- असर होता है // दिनेश कुमार
"आपसी प्यार मकीनों में हो ,घर तब होगा दरो -दीवार का ढांचा तो खँडर होता है। श्री दिनेश कुमार जी आपने प्यार को दिखाकर जो कहना चाहा है वह दिल को छू रहा है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Jan 1
indravidyavachaspatitiwari replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लघुकथा हितैषी" सम्मान
"रवि यादव जी के सम्मान की खबर से प्रसन्नता हुई । उनके कार्यो से उत्साहित होने का अवसर लघुकथा लेखकों को मिलेगा और जो नव लघुकथाकार हैं उन्हें अपनी रचनाओं में निखार लाने के लिए प्रयत्नशील होना होगा। ऐसे का सम्मान करके ओबीओ परिवार अपने को सम्मानित महसूस…"
Dec 14, 2017
indravidyavachaspatitiwari replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"घर जमाई जब आप कहते हैं कि उसने गलती की है तो उसको सजा जरूर मिलेगी । हम सब उस पर राजी हैं लेकिन आपको यह तो समझना चाहिए कि उसे माफी की भी तो जरूरत है। यदि उसे माफ कर दिया जाय और आगे के कार्यो पर ध्यान देकर उसे रास्ते पर लाया जाये तो हो सकता है कि वह…"
Nov 30, 2017
indravidyavachaspatitiwari added 2 discussions to the group सामाजिक सरोकार
Nov 7, 2017
indravidyavachaspatitiwari commented on Admin's group ग़ज़ल की कक्षा
"मैने नया ज्वाइन किया है । आशा करता हूं कि गजल की विधा के बारे मंे काफी प्रगति होगी और कामयाबी के पास पहुंच जाऊंगा।"
Nov 6, 2017
indravidyavachaspatitiwari joined Admin's group
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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |धन्यवाद |See More
Nov 6, 2017
indravidyavachaspatitiwari replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"ॅूुफरिश्तेेआज तक आपके सामने हमने अपनी जुबान नही खोली है इस बार भी मुझे माफ ही कर दें। आपकी आज्ञा मेरे सिर माथे पर। यह कहकर मुनीब ने पना सिर उनके चरणों में झुका दिया। मुनीब ने जब सिर उठाया तो देखा कि उनकी आंखें आसंुओं से तरबतर थीं।मुनीब को वह दिन याद…"
Oct 31, 2017
indravidyavachaspatitiwari added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
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भोजपुरी

हमनी के भोजपुरी भाषा के संबंध में एतने जानी ले जा कि एकरा अंदर एतना क्षमता बा कि उ कवनो विषय या विधा पर आपन विचार व्यक्त करें में तनिकांे कसर ना रख सकेले। भोजपुरी भाषा के बारे में सोचला पर लागे ला कि एकर एरिया भी काफी बड़ा बाटे। ए इलाका से अनेक क्षेत्र में प्रतिष्ठित लोगन के प्रादुर्भाव भइल बा जवना से इ इलाका ओकरा प्रकाश से जगमगात रहेला। भोजपुरी भाषा के बोले वाला आज तक सबका जानकारी में बा कि भारत से बाहर व लगभग संसार के हर क्षेत्र में बा लोग। उहवां भोजपुरी परम्परा के जीवित रखले बा लोग। भोजपुरी…See More
Oct 30, 2017
indravidyavachaspatitiwari commented on Admin's group आध्यात्मिक चिंतन
"हमारे प्रभु का नाम हजार बार लेने से और अनेकों बार लेने से जो सुख मिलता है उसका वर्णन करना किसी के वश में नहीं है। क्योंकि उनकी दयालुता का ध्यान करने पर आपके हृदय को इतनी शांति मिलती है कि आप चाह करके भी उसकी चर्चा दूसरे से करने से अलग नहीं रह सकते।…"
Oct 28, 2017
indravidyavachaspatitiwari joined Admin's group
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आध्यात्मिक चिंतन

इस समूह मे सदस्य गण आध्यात्मिक विषयों पर चिंतन एवं स्वस्थ चर्चायें कर सकतें हैं ।See More
Oct 28, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
ballia utter predesh
Native Place
india
Profession
journlism
About me
i am simple man. i want peacefull nature

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समझ

मंदिर के भीतर भीड़ उमड़ रही थी। तिल धरने की जगह नहीं बची थी। सभी को अपनी धुन लगी थी। सभी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे और चाहते थे कि उनका जल मूर्ति पर चढ़ जाय जिससे उन्हें बाहर निकलने का मौका मिले। औरतों का रास्ता दूसरी तरफ से था। औरते उसी तरफ से आ कर मूर्ति का दर्शन पूजन कर रही थीं। मरछही भी उन्हीं महिलाओं में शामिल थी। आगे बढ़ रही थी पीछे से धक्का लग रहा था। वह जब मूर्ति के सामने आई और उसने अपना जल गिराया। उसके बाद सिर नवाकर आशीष मांगा। मरछही ने जब सिर उठाकर मूर्ति के अलावा पहली बार देखा तो… Continue

Posted on March 26, 2018 at 6:14am — 2 Comments

आशा का पौधा

एक पौधा हमने रोपा था

सात वर्ष पहले

सोचा था वह

बढेंगा , फूलेगा, फलेगा।

धीरे-धीरे

उसमें आया विकास का

बवंडर

जो हिला गया

चूल-चूल उस वृक्ष के

जिसके लिए हम सोच रहे थे

कि कैसे उसे जड़ से

उखाड़ फेंके

एक ही झटके से उखड़ कर

धराशायी हो गया

हमने चैन की सांस ली

उस तरफ देखा तो

हमारा पौधा जो

अभी नाबालिग बच्चा था

अपनी हरियाली लिए

धीरे-धीरे झूम रहा था

हमें यह देख कर प्रसन्नता हुयी

उससे आशा की…

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Posted on April 25, 2017 at 7:30am — 2 Comments

धोखा न देना

सीमा पार से आके तुमने हमको जो ललकारा है

भागो तुम उस पार चलो यह भारतवर्ष हमारा है।

आये दिन जो तुम करते रहते हो उत्पात यहां

अब हम नहीं सहेंगे यह सब यह संकल्प हमारा है।

ऐसा क्या व्यवहार तुम्हारा जो कहके जाते हो पलट

अपनी सीमा पर है नहीं नियंत्रण यह दुर्भाग्य तुम्हारा है।

सरहद पर जो आते हैं करते स्वागत है हम उन का

मित्र तुम्हारे चरणों में यह झुका शीश हमारा है।

आये हो तो रहो यहां होकरके निर्भीक मगर

धोखा देने वालों पर गिरता फिर खड्ग…

Continue

Posted on October 15, 2016 at 6:19am — 3 Comments

ये क्या हुआ?



वह अपने महल के अंदर बैठा हुआ था और अपने साथियों के साथ जश्न मनाने की तैयारी हो रही थी। उसके सैनिकों द्वारा छद्म वेश में जाकर दुश्मन देश के सैनिक अड्डे पर भीषण आक्रमण के परिणाम स्वरूप वहां पर भयंकर तबाही मची हुई थी और उस देश का अगुवा बौखला उठा थां । आज तक उससे कहा जा रहा था िकवह हमारा दोस्त है लेकिन इस तरह से पीठ के उपर छुरा मार कर घायल कर दिया गया था और उसी से वह छटपटा रहा था । उस देश के लगभग 50 सैनिक मौके पर ही मर गये थे। साजो सामान के नुकसान भी करोड़ों के उपर था। उसने अपने अनुचरों को…

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Posted on October 7, 2016 at 1:29pm

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At 2:26am on September 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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