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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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तू इ कईसन फसवलsss

बाबा हो बाबा , तू इ कईसन फसवलs, चोर से कहत बाड़, चोरी ना करे खातिर, अगर चोरी कर लिहलस, चाही कानून सजा देबे खातिर, दुबिधा में डाल के, माथा घ…

Started by Rash Bihari Ravi

5 Jun 5, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

सुरु बा अनशन आज से ,

सरकार से वार्ता बेनतीजा , सुरु बा अनशन आज से , सोचे के इ बात बाटे , का मिली ये आगाज से , फिर सरकार के कोई मंत्री , झूठा  वादा  कर जईहन , मि…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Jun 4, 2011

हमरा देशवा के बड़ाई हमके निक लागेला,

निक लागेला हमके निक लगेला , हमरा देशवा के बड़ाई हमके निक लागेला, सुनले बानी लोग कहेला इ रहे सोना के चिड़िया, पहिले मुग़ल फिर अंग्रेज एके मिटव…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Jun 3, 2011

तू जवन मन करे उ कर ल ,

तू जवन मन करे उ कर ल , बाकिर हम अपना मन के करबे करब  , चाहे तू जेतना उड़ ल , तोहार पंख के हम रंगबे करब , तू अपना के होशियार बुझेल , तोहार ह…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Jun 2, 2011
Reply by Neelam Upadhyaya

बतकही ( गपसप ) अंक ४

बतकही ( गपसप ) अंक ४  हम जइसे लछुमन भाई के चाय दुकान पर पहुचनी लछुमन भाई फटाक से पेपर हमारा के देदेले , लागत रहे जइसे उ हमार इंतजार करत रहू…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Jun 1, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

बतकही ( गपसप ) अंक ३

  बतकही ( गपसप ) अंक ३   हमके बस से उतरत देख लछुमन भाई जोर से आवाज लगवले प्रणाम गुरु जी, इ का रउआ बाइक से आइल गइल बंद क देनी का ? त हम कहनी…

Started by Rash Bihari Ravi

2 May 23, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

चंदवा डांसर बन गइल "(भोजपुरी कहानी)

" चंदवा डांसर बन गइल "(भोजपुरी कहानी)                            - बृज भूषण चौबे " जब तक पूरा मांग  के पइसा  ना मिली इ बियाह ना होई "  मडवा…

Started by Brij bhushan choubey

2 May 22, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

बतकही ( गपसप ) अंक २

बतकही (2) ( गपसप ) लछुमन भाई के चाय के दुकान पर बईठ के हम चाय के चुस्की ले ले के पेपर पढ़त रहनी ह, पेपर में सब जगे दीदी के चर्चा बा , पेपर…

Started by Rash Bihari Ravi

8 May 21, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

" जानत बानी हम "

जानत बानी कि हम मंजिल ना हई तोहारजानत बानी की हम रास्ता भी ना हई तोहारपर कुछ देर त साथ चलल रहनी जा हम-तुकुछ देर त एक दुसरा के सुख-दुख  बँटल…

Started by Raju

0 May 20, 2011

हम सोचिला कभी

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

1 May 20, 2011
Reply by Raju

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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
18 hours ago

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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

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