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मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो ,

मो कहूँ आवत नाही कबहू -२

ना मुख चंद्र दिखायो ,

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।

बहुत सुनिन्ह है तोरे बतिया ,

तुम बिन गुजरे ना दिन रतिया ,

राधा के ओ मोहन प्यारे -२

मोको बहुत सतायो ,

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।

साँवले मुख पै दधि लपटाए,

ग्वालिन तुमहुँ माँ पहिं लाये ,

ओ घड़ी जैसी तुम्हरी सूरत -२

मोके वैसी ही दिखायो ,

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।

मौलिक और अप्रकाशित

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वाह बहुत सुंदर निर्मल भाव | हार्दिक बधाई आदरणीय |

आदरणीया कल्पना जी,उत्साह बढ़ाने के लिए कोटि कोटि शुक्रिया 

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