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धार्मिक साहित्य Discussions (168)

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मकर-संक्रान्ति पर विशेष

  भारत वस्तुतः गाँवों का देश है. यहाँ के गाँव प्रकृति और प्राकृतिक परिवर्त्तनों से अधिक प्रभावित होते हैं, बनिस्पत अन्य भौतिक कारणों से. च…

Started by Saurabh PandeyLatest Reply

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चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम  अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम  कि चल मन अब………………………. कटि करधनी शीश पर चोटी  मोर पंख सँग शोभित होती  धूलि…

Started by आशीष यादव

0 Apr 3

जय श्री राम

जय श्री रामदोहे____________________ पौष शुक्ल की द्वादशी,सजा अवधपुर धाम।प्राण प्रतिष्ठा हो गए,बाल रूप श्री राम।१। रामलला के साथ में, सजे…

Started by सुरेश कुमार 'कल्याण'

0 Jun 15, 2024

महर्षि वाल्मीकि

महर्षि वाल्मीकि महर्षि वाल्मीकि का जन्म महर्षि वाल्मीकि के जन्म के बारे में बहुत भ्रांतियाँ मिलती है कोई कहता है कि उनका जन्म महर्षि कश्यप…

Started by PHOOL SINGH

0 Apr 1, 2024

#सरसी_छन्द, उपहार

स्वार्थहीन अनुराग सदा ही,देते हो भगवान।निज सुख-सुविधा के सब साधन,दिया सदा ही मान। अपनी सूझ-बूझ से समझी,प्रतिपल मेरी चाह,इस कठोर जीवन की तु…

Started by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

3 Jan 25, 2024
Reply by Shyam Narain Verma

रास छंद "कृष्णावतार"

(रास छंद) हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ। घोर घटा में, कड़क रहीं थी, दामिनियाँ। हाथ हाथ को, भी नहिं सूझे, तम गहरा। दरवाजों पर, लटके त…

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

3 Jan 25, 2024
Reply by Shyam Narain Verma

#लावणी_छन्द, निधिवन

लता,फूल,रज के हर कण में,नभ से झाँक रहे घन में,राधे-कृष्णा की छवि दिखती,वृन्दावन के निधिवन में। प्रेम अलौकिक व्याप्त पवन में,प्रणय गीत से ब…

Started by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

3 Jan 25, 2024
Reply by Shyam Narain Verma

सदियों का वनवास अंत कर

गीत पुलकित तन से पुलकित मन से, नाच रहे है जन जन सारे।सदियों  का  वनवास  अंत  कर, सकल  राष्ट्र में राम पधारे।**राजनीति ने करवट  ली  तो, हर …

Started by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

1 Jan 25, 2024
Reply by Shyam Narain Verma

पुरुषोत्तम श्री राम

श्री राम के जैसा चरित्र न मिलता चाहे ढूँढ लो इस जहान में मर्यादा की जो साक्षात मूर्ति, न उनसे बड़ा कोई ज्ञान में।।   शिव का क्रोध और दुर्ग…

Started by PHOOL SINGH

0 Jan 24, 2024

राम मंदिर

  राम मंदिर   राम व्यापक राम विश्वात्मा हर जीव में है राम बसा जन्मभूमि श्री राम कहलाती, भव्य मंदिर एक वहाँ बना।।   देश की आत्मा देश की आस्थ…

Started by PHOOL SINGH

0 Jan 23, 2024

वैंकुंठधाम आगमन

काल का नियम कठोर है होता सभी को इसको वरना हो श्री राम अछूते रह सके न, क्या मानव जीवन का वर्णन हो||   आते साधू रूप में काल देवता श्री राम स…

Started by PHOOL SINGH

0 Jan 18, 2024

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Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
20 hours ago
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
20 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
23 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
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रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
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Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
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आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
yesterday

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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
May 24

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