For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय काव्य-रसिको !

सादर अभिवादन !!

  

’चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का यह एक सौ सतहत्तरवाँ योजन है।

   

 

छंद का नाम  -  चौपाई छंद  

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ - 

25 मार्च’ 26 दिन बुधवार से

31 मार्च 26 दिन मंगलवार तक

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं.  

चौपाई छंद के मूलभूत नियमों के लिए यहाँ क्लिक करें

जैसा कि विदित है, कई-एक छंद के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती हैं.

***************************

आयोजन सम्बन्धी नोट 


फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ : 25 मार्च’ 26 दिन बुधवार से 31 मार्च 26 दिन मंगलवार तक रचनाएँ तथा टिप्पणियाँ प्रस्तुत की जा सकती हैं

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करें.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें. 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. 
  8. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  9. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...


"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

विशेष यदि आप अभी तक  www.openbooksonline.com  परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.

 

मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम 

Views: 756

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

स्वागतम

चौपाई छंद

++++++++

 

ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥

आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में गाने॥

 

गुलमोहर टेशू भी फूले। अमराई में पड़ते झूले॥

नव कोंपल पेड़ों पर छाये। मौर सुगंधित मन हर्षाये॥

 

फागुन की रंगत है छाई। लिए सुगंध बहे पुरवाई॥

खायेंगे सब आम रसीले। हरा लालिमा औ कुछ पीले॥  

 

सरसों भरे खेत हैं सारे। पीत वसन वसुधा के न्यारे॥

कूकत है कोयल बगिया में। खुशबू हर गाँव नगरिया में॥  

 

बच्चे युवा मिल करें धमाल। नगर डगर उड़े रंग गुलाल॥

ध्वनि मृदंग की मन को भाए। ऋतु बसंत की छटा सुहाए॥

 

++++++++++++

मौलिक अप्रकाशित

प्रणाम भाई अखिलेश जी,

क्या ही सुंदर चौपाईयां हुईं हैं। वाह, वाह। फागुन का पूरा वृतांत कह दिया आपने। 

//बच्चे युवा मिल करें धमाल। नगर डगर उड़े रंग गुलाल// इस में चरणांत जगण ( 121 ) से हो रहा है जो मेरी जानकारी से अशुद्ध है। चौपाई का चरणांत 1111, 112 या 211 या 22 से होना चाहिए। कृपया देखिएगा। 

शेष शुभ और मुग्ध 

धन्यवाद 

आदरणीय अजय भाईजी 

चौपाई की मुक्त कंठ से प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार ।

चौपाई विधान में 121 की मुझे जानकारी है । लेकिन प्रयास के बाद भी रंग गुलाल के साथ नवीं  पंक्ति बन  ही नहीं पा  रही थी । दसवीं पंक्ति  का भी त्याग न करना  पड़े इसलिए जान बूझ कर यह गलती करनी पड़ी।

पुनः धन्यवाद । नव वर्ष 2083 की शुभकामनाएँ 

आदरणीय भाई अखिलेश जी, आपको भी नववर्ष 2083 की अनेक शुभकामनाएं। 

उपरोक्त चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहना चाहता हूँ कि आपके छंद ज्ञान पर मुझे ज़रा भी संशय नहीं है। लेकिन हम सब से भूलवश कभी मात्राएं, कभी बह्र, कभी वर्णक्रम, कभी लय अनजाने में भंग हो जाते हैं और ध्यान दिलाए जाने पर उसे हम ठीक भी कर लेते हैं। मुझे लगा आपसे भी त्वरा में ऐसा हो गया हो तो उसे इंगित किया।

लेकिन क्षमा चाहूँगा कि जानबूझ कर ऐसा करना तो अनुचित है। क्योंकि "सोलह मात्रिक-अंत 121" से होते ही यह चौपाई न हो कर पद्धरि छंद के निकट पहुँच गया।   

और आप की सक्षमता पर हमें विश्वास है कि आप इस को भी संशोधित कर लेंगें। आयोजन में देरी के चलते समय की कमी समझी जा सकती है। 

एक सुझाव:

बाल-युवा मिल उधम मचाएं, रंग-गुलाल-अबीर उड़ाएं 

या ऐसा ही कुछ सोच सकते हैं। 

सादर 

बाल-युवा मिल उधम मचाएं, रंग-गुलाल-अबीर उड़ाएं 

वाह !!! अजय भाई इससे बढ़िया और क्या चाहिए।  हार्दिक धन्यवाद 

रंग गुलाल उड़ाते बच्चे ।   कोमल तन औ' मन के सच्चे ॥  ..... लेकिन मैं स्वयं संतुष्ट नहीं था। 

छंदोत्सव के नियम के अनुसार दस पंक्तियों की संशोधित चौपाई  पुनः पोस्ट किया जा सकता है।

हालाकि अभी आदरणीय सौरभ भाईजी की प्रतिक्रिया नहीं आई है पर दो बड़ी गलती को सुधारना आवश्यक समझता हूँ। 

आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार,  प्रदत्त  चित्र पर आपने सुन्दर चौपाइयाँ रची हैं. हार्दिक बधाई स्वीकारें. 

 सच है फागुन आते तक आम पर बौर तो आ ही जाते हैं कई आम्र वृक्षों पर छोटी-छोटी अमिया भी नज़र आने लगती हैं. कई पक्षी पौ फटने से ही अपनी मधुर ध्वनि से शांत वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं.  ग्रीष्म की दस्तक से मोटे आम्र वृक्षों पर झूले ठंडक आ भास् कराते हैं. "लिए सुगंथ बहे पुरवाई"/ ले सुगंध बहती पुरवाई...इस तरह कर लेने से गेयता में जो थोड़ा अटकाव है वह समाप्त हो जाएगा. धमाल/गुलाल पर आदरणीय अजय गुप्ता जी ने कहा ही है. चरणान्त में जगण अमान्य है. सादर  

आदरणीय अशोक भाईजी ,

सुझाव और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका। 

चौपाई विधान में 121 की मुझे जानकारी है । लेकिन प्रयास के बाद भी रंग गुलाल के साथ नवीं  पंक्ति बन  ही नहीं पा  रही थी । दसवीं पंक्ति  का भी त्याग न करना  पड़े इसलिए जान बूझ कर यह गलती करनी पड़ी।

पुनः धन्यवाद । नव वर्ष 2083 की शुभकामनाएँ 

अनुरोध --- रंग गुलाल अबीर आदि का प्रयोग करते हुए नवीं पंक्ति पूर्ण करने की कंपा करें।

विषय मुक्त होने के कारण लघु कथा लिखने का प्रयास किया है , अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे। 

नव वर्ष 2083 की शुभकामनाएँ 

  जी ! आपके द्वारा इंगित पंक्ति को /मिल धमाल जन खूब मचाते। पग-पग रंग गुलाल उड़ाते।।/ इस तरह किया जा सकता है.  आपको भी नव संवत् की हार्दिक शुभकानाएं. सादर नमन.

सार्थक है आपका सुझाव 

आदरणीय अखिलेश जी

 चित्र को बहुत सुन्दर शब्द और भाव दिए हैं आपने हार्दिक बधाई।  अंतिम छंद  पर आदरणीय अजय जी का सुझाव भी अच्छा है।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
23 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
23 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
23 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
yesterday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service