For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स पे ढेर सारे धार्मिक और मजहबी पोस्ट आते रहते हैं और हैरत की बात है कि हर इंसान अपने ही धर्म को अच्छा कहता है. .......वो हिन्दू था मुसलिम हो गया, वो मुसलिम था, ईसाई हो गया, वो पारसी था, बुद्धिस्ट हो गया- वगैरह वगैरह! हम क्या साबित करना चाहते हैं? कि सिर्फ हमारा घर अच्छा है, और पड़ोसी का गन्दा?

 

किसी संत ने कहा है कि जो जिस मजहब में पैदा हुआ है वह मजहब उसके लिए काफी है इंसानी ज़िंदगी के मकसद को पाने के लिए, अगर वो उस मकसद के लिए सच्चाई के साथ जीता हो. किसी मजहब में पैदा होना एक बात है, मगर उसी मजहब में मर जाना दीगर. इसका अर्थ यह नहीं कि हम अपने अपने मजहब बदलें- इसका सीधा सा अर्थ है कि हम मजहब से आगे रूहानियत (अध्यात्म) में प्रवेश करें और फिर उससे भी आगे गैबियत और उससे आगे हकीकत और उससे भी आगे.......मंजिल बहुत दूर है और तय करने को फासला बहुत लम्बा. एक सीढ़ी छोड़ोगे तभी अगली सीढ़ी पे जाओगे, यह शाश्वत और सीधा सा नियम है. यह हम सभी रोज़ अनुभव करते हैं.

 

हमें मजहब से ऊपर उठ के सोचने की ज़रुरत है- रूहानियत की बात की जाए तो बेह्तर है. हमें मजहब नहीं, अपने आप को बदलने की ज़रुरत है. ईश्वर/अल्लाह/खुदा/भगवन/गॉड अलग-अलग नहीं है. सारे मजहबों का एक इतिहास और एक मुस्तकबिल है. बुद्धा खुद बुद्धिस्ट नहीं थे, जीसस खुद ईसाई नहीं- इसके बावजूद उन्होंने ईश्वर या गॉड को पाया. उनके धर्मों की स्थापना तो उनके ईश्वरत्व पाने के बाद ही हुई न! यानि अल्लाह/खुदा/भगवान/गॉड और आदम का वजूद तब भी था जब कोई मजहब नहीं था. हम सभी ईश्वर या अल्लाह की परछाई हैं, चाहे किसी भी मजहब के हों, हमें यही सोचने की ज़रुरत है.

 

आमीन!

 

 

© राज़ नवादवी

भोपाल रविवार २८/०७/२०१३

रात्रिकाल २२ बजके २२ मिनट  

मौलिक व अप्रकाशित!

Views: 228

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
5 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
58 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
1 hour ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
7 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
7 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service