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नन्दकिशोर दुबे
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  • Rohit Dubey "योद्धा "
 

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Mohammed Arif commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post भरोसा क्या ?
"आदरणीय नंदकिशोर जी आदाब,भरोसे को परिभाषित करती बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
50 minutes ago
नन्दकिशोर दुबे posted a blog post

भरोसा क्या ?

कौन किस वक्त क़ौल से अपने हट के फिर जायेगा भरोसा क्या ? कब ये आकाश टूटकर मेरे सर पे गिर जायेगा भरोसा क्या ?दोस्ती को निबाहने वाले हो तो इतिहास में ही जिन्दा हो आज के दौर का कोई बन्दा कब मुकर जायेगा भरोसा क्या ?प्यार की बात, साथ जन्मों का बोलना तो सरल मगर प्यारे प्यार का फूल किस घटी,किस पल झर बिखर जायेगा भरोसा क्या ? एक जुमला उछाल कर तुम तो अपने मित्रों के सर ही चढ़ बैठे याद रखियेगा, जो इधर आया कल किधर जायेगा भरोसा क्या ? बुद्दिजीवी अगर कोई होगा व्यक्त होना है उसकी मजबूरी सोच विपरीत…See More
11 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post शरद्पूर्णिमा (कविता)
"वाह्ह्ह्ह बहुत सुन्दर रचना सुन्दर प्रतीकों के माध्यम से अपने भाव रचना में पिरोये बहुत बहुत बधाई आद०  नंदकिशोर जी "
Oct 5
नन्दकिशोर दुबे commented on Neelima Sharma Nivia's blog post घातक हैं नाजायज रिश्ते
"यथार्थ का बेबाकी से ऐसा वर्णन की पाठक को बांधे रखता है और सम्पूर्ण कहानी पढ़े बिना वहः मुक्त नही हो सकता । कथ्य ओर शिल्प उत्कृष्ट ।"
Oct 4
नन्दकिशोर दुबे commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post शरद्पूर्णिमा (कविता)
"आदरणीय आरिफ साहब । आपको रचना पसन्द आई / आभार । ऐसा सहयोग सतत बनाये रखे / आभारी रहूँगा ।रचनाकर्म सार्थक हुआ ।"
Oct 4
Mohammed Arif commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post शरद्पूर्णिमा (कविता)
"आदरणीय नंदकिशोर जी आदाब, बहुत ही सुंदर कविता शरद पूर्णिमा लेकर । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 3
नन्दकिशोर दुबे posted blog posts
Oct 3
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Oct 1
नन्दकिशोर दुबे and Rohit Dubey "योद्धा " are now friends
Oct 1
Samar kabeer commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post सम्भावना के द्वार पर
"जनाब नन्दकिशोर जी आदाब,अगर ये ग़ज़ल है तो आपको इसके साथ अरकान लिखना चाहिए जो मंच का नियम भी है, ताकि रचना पर कुछ कहने में पाठकों को आसानी हो । प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें ,जनाब बसंत जी से सहमत हूँ ।"
Sep 25
Samar kabeer commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post आंसू की गाथा
"जनाब नन्दकिशोर दुबे जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । इस मंच पर ग़ज़ल के साथ अरकान लिखने का नियम है,जो आपने नहीं लिखे ।"
Sep 25
नन्दकिशोर दुबे commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"सुन्दर रचना ।"
Sep 24
नन्दकिशोर दुबे commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post वादों की बरसात न कर
"भाई bsntkumarjee बहु सुन्दर रचना । आनन्द आ गया ।"
Sep 24
नन्दकिशोर दुबे commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"सुन्दर रचना ।"
Sep 24
नन्दकिशोर दुबे commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल -- कीचड़ के आस पास में देखा कवँल गया
"बहुत ही कमाल की गजल है । आनन्द आ गया । एक एक शेर लाजवाब । चमत्कार दर चमत्कार भाई वाह वाह !"
Sep 24
नन्दकिशोर दुबे commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"वास्तव में बहुत सुन्दर व् यथार्थपरके रचना ।"
Sep 24

Profile Information

Gender
Male
City State
इंदौर
Native Place
इंदौर
Profession
एडवोकेट
About me
एक प्रसिद्ध कवि व लेखक

नन्दकिशोर दुबे's Blog

भरोसा क्या ?



कौन किस वक्त क़ौल से अपने

हट के फिर जायेगा भरोसा क्या ?

कब ये आकाश टूटकर मेरे

सर पे गिर जायेगा भरोसा क्या ?

दोस्ती को निबाहने वाले

हो तो इतिहास में ही जिन्दा हो

आज के दौर का कोई बन्दा

कब मुकर जायेगा भरोसा क्या ?

प्यार की बात, साथ जन्मों का

बोलना तो सरल मगर प्यारे

प्यार का फूल किस घटी,किस पल

झर बिखर जायेगा भरोसा क्या ?



एक जुमला उछाल कर तुम तो

अपने मित्रों के सर ही चढ़ बैठे

याद…

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Posted on October 20, 2017 at 9:10pm — 1 Comment

शरद्पूर्णिमा (कविता)

ज्यों खटक जाता है

किसी चित्रकार को

स्वरचित सफल चित्र पर

अचानक रंगो का बिखर 

जाना !

.

ज्यों खटक जाता है

ज्येष्ठी धूप में तपे प्यासे मानव को

सम्मुख आ सजल पात्र का

अकस्मात ही लुढ़क जाना !.

ज्यों खटक जाता है

प्रणयी युगल को

मधुर प्रणय मिलन 

के मध्य

किसी अन्य का

अप्रत्याशित आ जाना !

.

त्यों ही खटक रहा है मुझको

शरद्पूर्णिमा के चंद्र पर

निगोड़े मेघो का छा जाना !! …



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Posted on October 1, 2017 at 9:00pm — 3 Comments

सम्भावना के द्वार पर

सम्भावना के द्वार पर दस्तक हुई है

देखकर मुझको हुई वह छुईमुई है

देखता ही रह गया विस्मित चकित सा

रंग, रस, मद से भरी वह सुरमई है

रम्य मौसम, रम्य ही वातावरण ये 

सुनहली इस साँझ की सज धज नई है

प्रेम की पलपल उमड़ती भावना पर

वर्जनाओं की सतत् चुभती सुई है

तरलता बांधी गयी, कुचली गयी हैं कोपलें

क्रूरता द्वारा सदा सारी हदें लांघी गयी हैं

क्रूरता सहनें को तत्पर, वर्जना मानें ना मन

प्यार का अदभुत् असर हम पर हुआ कुछ जादुई है…

Continue

Posted on September 22, 2017 at 11:30pm — 4 Comments

आंसू की गाथा

कुछ जाना कुछ अनजाना-सा लगता है
कुछ भूला कुछ पहचाना-सा लगता है

दर्पण में प्रतिबिम्बित अपना ही मुखड़ा
कुछ अपना कुछ बेगाना -सा लगता है

मुझ-सम लाखो लोग यहां पर बसते है
हर कोई बस दीवाना-सा लगता है

जीवन तो बस वाल्मीकि की वाणी मे
आंसू की गाथा गाना-सा लगता है !

.
मौलिक व अप्रकाशित  ---नन्दकिशोर दुबे

Posted on September 22, 2017 at 11:00pm — 2 Comments

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"आ0 तस्दीक अहमद जी आपकी उत्साह वर्धन करती टिप्पणी का हृदय से आभार।"
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"आदरणीय अशोक रक्ताले जी आदाब, बहुत ही सजीव और सार्थक चित्रण किया आपने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
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"आ0 समर कबीर जी आपकी उत्साह वर्धन करती टिप्पणी का हृदय से आभार दीपावली की अशेष शुभकामनाओं के साथ।"
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"आ0 अखिलेश कृष्ण जी आपकी उत्साह वर्धन करती टिप्पणी का हृदय से आभार। मेरा लिखना सार्थक हुआ।"
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