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नन्दकिशोर दुबे
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  • Ramkunwar Choudhary
  • Rohit Dubey "योद्धा "
 

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19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"आ. भाई नन्द किशोर जी, सुंदर गीतिका हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"क्या कहने आदरणीय दुबे जी ..बहुत ही सुन्दर गीतिका कही.."
Feb 18
Mohammed Arif commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"आदरणीय नंदकीशोर दुबे जी आदाब,                            बहुत ही सुंदर भावोंं की वाटिका । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 18
Sheikh Shahzad Usmani commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"बहुत सुंदर। हार्दिक बधाई आदरणीय नंदकिशोर दुबे जी।"
Feb 17
नन्दकिशोर दुबे posted blog posts
Feb 17
नन्दकिशोर दुबे posted blog posts
Feb 5
Mohammed Arif commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post वासन्ती-गीत
"आदरणीय नंदकुमार दुबे जी आदाब,                          सरल-सरस शब्दों में वासंती सुहास के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 29
नन्दकिशोर दुबे shared their blog post on Facebook
Nov 4, 2017
नन्दकिशोर दुबे posted a blog post

भरोसा क्या ?

कौन किस वक्त क़ौल से अपने हट के फिर जायेगा भरोसा क्या ?कब ये आकाश टूटकर मेरे सर पे गिर जायेगा भरोसा क्या ?दोस्ती को निबाहने वाले हों तो इतिहास में ही जिन्दा हों आज के दौर का कोई बन्दाकब मुकर जायेगा भरोसा क्या ?प्यार की बात, साथ जन्मों का बोलना तो सरल मगर प्यारे प्यार का फूल किस घटी,किस पलझर बिखर जायेगा भरोसा क्या ?चंद जुमले उछाल कर तुम तो अपने मित्रों के सर ही चढ़ बैठे याद रखियेगा, जो इधर आयाकल किधर जायेगा भरोसा क्या ?बुद्धिजीवी अगर कोई होगा व्यक्त होना है उसकी मजबूरी सोच विपरीत मानकर ज़ालिमकत्ल…See More
Nov 4, 2017
SALIM RAZA REWA commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post भरोसा क्या ?
"आ. ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई"
Oct 24, 2017
Samar kabeer commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post भरोसा क्या ?
"जनाब नन्द किशोर दुबे जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । कुछ टंकण त्रुटियाँ देख लें ।"
Oct 23, 2017
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post भरोसा क्या ?
"आदरणीय , भरोसा पर बेहतरीन रचना हुई है  | बधाई स्वीकारें आदरणीय |"
Oct 22, 2017
Ram Awadh VIshwakarma commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post भरोसा क्या ?
"आदरणीय नन्दकिशोर जी एक खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई"
Oct 21, 2017
Mohammed Arif commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post भरोसा क्या ?
"आदरणीय नंदकिशोर जी आदाब,भरोसे को परिभाषित करती बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 21, 2017
नन्दकिशोर दुबे posted a blog post

भरोसा क्या ?

कौन किस वक्त क़ौल से अपने हट के फिर जायेगा भरोसा क्या ?कब ये आकाश टूटकर मेरे सर पे गिर जायेगा भरोसा क्या ?दोस्ती को निबाहने वाले हों तो इतिहास में ही जिन्दा हों आज के दौर का कोई बन्दाकब मुकर जायेगा भरोसा क्या ?प्यार की बात, साथ जन्मों का बोलना तो सरल मगर प्यारे प्यार का फूल किस घटी,किस पलझर बिखर जायेगा भरोसा क्या ?चंद जुमले उछाल कर तुम तो अपने मित्रों के सर ही चढ़ बैठे याद रखियेगा, जो इधर आयाकल किधर जायेगा भरोसा क्या ?बुद्धिजीवी अगर कोई होगा व्यक्त होना है उसकी मजबूरी सोच विपरीत मानकर ज़ालिमकत्ल…See More
Oct 20, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
इंदौर
Native Place
इंदौर
Profession
एडवोकेट
About me
एक प्रसिद्ध कवि व लेखक

नन्दकिशोर दुबे's Blog

गीतिका

रात गहरी, घोर तम छाया हुआ !

हार कर बैठा हूँ --- पथराया हुआ !

यूँ पड़ा हूँ, लोकपथ के तीर पर 

जैसे प्रस्तर-खण्ड ठुकराया हुआ !

दूर जुगनूँ एक दिपता आस का 

शेष सब  सुनसान,   थर्राया हुआ !…

Continue

Posted on February 17, 2018 at 5:08pm — 4 Comments

वासन्ती-गीत

वासन्ती-गीत

        

सुरीले दिन वसन्त के

मनहर,सरसाते दिन आये रसवन्त के

सुरीले दिन वसन्त के.....!

  

बहुरंगी बोछारे धरती पर बरसाते

ऋतुओ का राजा फिर आया हँसते गाते

 

 पोर पोर पुलकित दिक् के दिगन्त के 

सुरीले दिन वसन्त के......!

 

मस्ताना मौसम जनजीवन में थिरकन हैं

कान्हा की भक्ति  मे खोया हर तन मन हैं

 

चित्त चपल, ध्यान मग्न, योगी और संत के

सूरीले दिन वसन्त…

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Posted on January 28, 2018 at 7:30pm — 2 Comments

भरोसा क्या ?

कौन किस वक्त क़ौल से अपने

हट के फिर जायेगा भरोसा क्या ?

कब ये आकाश टूटकर मेरे

सर पे गिर जायेगा भरोसा क्या ?

दोस्ती को निबाहने वाले

हों तो इतिहास में ही जिन्दा हों

आज के दौर का कोई बन्दा

कब मुकर जायेगा भरोसा क्या ?

प्यार की बात, साथ जन्मों का

बोलना तो सरल मगर प्यारे

प्यार का फूल किस घटी,किस पल

झर बिखर जायेगा भरोसा क्या ?

चंद जुमले उछाल कर तुम तो

अपने मित्रों के सर ही चढ़ बैठे

याद रखियेगा,…

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Posted on October 20, 2017 at 9:00pm — 6 Comments

शरद्पूर्णिमा (कविता)

ज्यों खटक जाता है

किसी चित्रकार को

स्वरचित सफल चित्र पर

अचानक रंगो का बिखर 

जाना !

.

ज्यों खटक जाता है

ज्येष्ठी धूप में तपे प्यासे मानव को

सम्मुख आ सजल पात्र का

अकस्मात ही लुढ़क जाना !.

ज्यों खटक जाता है

प्रणयी युगल को

मधुर प्रणय मिलन 

के मध्य

किसी अन्य का

अप्रत्याशित आ जाना !

.

त्यों ही खटक रहा है मुझको

शरद्पूर्णिमा के चंद्र पर

निगोड़े मेघो का छा जाना !! …



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Posted on October 1, 2017 at 9:00pm — 3 Comments

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