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जयति जैन "नूतन"
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जयति जैन "नूतन"'s Page

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Mohit mishra (mukt) commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता- जी एस टी
"उत्तम रचना बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीया "
Oct 31
Mohammed Arif commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता- जी एस टी
"आदरणीया जयति जैन जी आदाब, जीएसटी के दंश को पूरा देश झेल रहा है । जीएसटी ने पूरे देश के उद्योग जगत् को तहस-नहस करके रख दिया है । छोटे कारोबारी सब मारे गए हैं । सरकार का विकास का झूठा झुनझुना बिका हुआ मीडिया रात-दिन बजा रहा है । यह केवल आपकी या मेरी…"
Oct 29
Afroz 'sahr' commented on जयति जैन "नूतन"'s photo
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जयति जैन "नूतन",

"मोहतरमा जयति नूतन साहिबा आपकी कलम की धार सदैव ही आपके हौसलों की तरह चमकती रहे । सुंदर रचना के लिए आपको मेंरी और से बहुत बधाई । ,,"
Oct 29
जयति जैन "नूतन" posted a blog post

कविता- जी एस टी

कविता- जी एस टी मैं सो रही थी मुझे उठाया गया,नींद में ही गाडी में बैठाया गया !होश में आती उससे पहले ही बताया गया, व्यापारियों का खून चूसने जीएसटी लगाया गया ! अधिकारी के दफ़्तर संग लाया गया,टेक्स का सारा दुख जताया गया !टेक्स का सारा दुख जताया गया,मुझे अधिकारी के दफ़्तर लाया गया ! बोले पहल तुम करोगी हमारी,दलदल में मुझ बेचारी को फसाया गया !मुझ बेचारी को दलदल में फसाया गया,व्यापारियों का एक एक दुख सुनाया गया ! कौन हो तुम, आयी हो कहां से ?आंखें दिखाकर मुझपर चिल्लाया गया !आंखें दिखाकर मुझपर चिल्लाया…See More
Oct 29
जयति जैन "नूतन" posted photos
Oct 29
जयति जैन "नूतन" commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता ---- एक दूजे का साथ ------
"bahut bahut shukriya sabhi gunijano ka"
Oct 29
जयति जैन "नूतन" posted a blog post

कविता: जो खुद को सेकुलर नहीं मानते उनके लिए

बाहर हैं तो अभी सीधा घर जाइयेघर जाकर टी.वी. में आग लगाइयेसभी जाति -धर्म के लोग दिखाई देगेंफिल्म - सीरियल पर नजर दौड़ाइयेबच्चों को उस स्कूल में डालियेजहां आपकी जाति के शिक्षक होने चाहियेसामान हर दुकान से मत खरीदियेदुकान भी आपकी जाति धर्म की होनी चाहिएकिस धर्म के आदमी ने बनाया है ये सामान ?अपनी जाति के दुकानदार से पुछवाईयेआप सेकुलर नहीं जो किसी के भी हाथ का खालेंइसलिए कुछ दिन हो सके तो भूंखे ही सो जाइयेकपडा - लत्ता और मकान बनवाना हो यदिअपनी जाति के सभी कारीगर ढूंढ लाइयेमाँ बाप बीमार हो तो किसी के…See More
Oct 28
जयति जैन "नूतन" updated their profile
Oct 27
जयति जैन "नूतन" commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता: जो खुद को सेक्युलर नहीं मानते उनके लिए
"सभी का बहुत बहुत आभार"
Oct 27
Dr Ashutosh Mishra commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता: जो खुद को सेक्युलर नहीं मानते उनके लिए
"आदरणीय जयति जी व्यंग्य करती हुयी सार्थक रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर "
Oct 26
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता: जो खुद को सेक्युलर नहीं मानते उनके लिए
"आद0 जयति जी सादर अभिवादन।बढ़िया व्यंग केसा है आपने। कुछ टंकण त्रुटियों और शिल्प को देख लीजिए। इस प्रस्तुति पर मेरी हार्दिक बधाई।"
Oct 25
Mahendra Kumar commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता: जो खुद को सेक्युलर नहीं मानते उनके लिए
"आ. जयति जी, अच्छी लगी आपकी कविता. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  1. कविता में सेकुलर शब्द है और शीर्षक में "सेक्युलर". 2. //मैं सेकुलर हूँ इस बात पर गुरूर (या "गर्व"?) होना चाहिये !// देख…"
Oct 25
Samar kabeer commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता: जो खुद को सेक्युलर नहीं मानते उनके लिए
"मोहतरमा जयति जी आदाब,बहुत सुंदर कविता है, आपने भरपूर तंज़ किये हैं उन लोगों पर जो ऐसी सोच रखते हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें,और शिल्प पर अपनी पकड़ थोड़ी मज़बूत कीजिये,टंकण त्रुटियों पर भी ध्यान दीजिए ।"
Oct 24
डॉ छोटेलाल सिंह commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता: जो खुद को सेक्युलर नहीं मानते उनके लिए
"आदरणीया नूतन जी सरल भाव भंगिमा पर इतनी अच्छी रचना कम देखने को मिलती है ,आपकी लेखनी में जबरदस्त धार है,आपकी लेखनी को शत शत बार नमस्कार है"
Oct 24
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता: जो खुद को सेक्युलर नहीं मानते उनके लिए
"आदरणीया जयति जी , पहले तो आपका ओपन बुक्स ऑनलाइन पर हार्दिक स्वागत हैं | आपकी रचना पहली बार पढ़ रहीं हूँ , बहुत ही गंभीर विषय और अलग ही विषय पर आपने लिखा है , जिसके लिए हार्दिक बधाई | शुभकामनाये आपको |"
Oct 24
Nilesh Shevgaonkar commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता: जो खुद को सेक्युलर नहीं मानते उनके लिए
"आ. जयती जी,रचना के शिल्प आदि पर मैं टिप्पणी करने में असमर्थ हूँ लेकिन इस  विषय को चुनने और अपने भाव खुल कर रखने के लिए बधाई ..जो हिन्दू हैं या मुसलमान हैं या किसी और  मज़हब को अपनी पहचान मानते हैं उनका शर्मिंदा होना लाज़िम है ... जो स्वयमं…"
Oct 24

Profile Information

Gender
Female
City State
ranipur
Native Place
Jhansi u.p.
Profession
writer , pharmacist
About me
लोगों की भीड़ से निकली साधारण लड़की जिसकी पहचान बेबाक और स्वतंत्र लेखन है... वर्तमान लेखन- सामाज़िक लेखन, दैनिक व साप्ताहिक अख्बार, चहकते पंछी ब्लोग, साहित्यपीडिया, शब्दनगरी व प्रतिलिपि वेबसाइट पर

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जयति जैन "नूतन"'s Blog

कविता- जी एस टी

कविता- जी एस टी
 
मैं सो रही थी मुझे उठाया गया,
नींद में ही गाडी में बैठाया गया !
होश में आती उससे पहले ही बताया गया, 
व्यापारियों का खून चूसने जीएसटी लगाया गया !
 
अधिकारी के दफ़्तर संग लाया गया,
टेक्स का सारा…
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Posted on October 27, 2017 at 11:39pm — 2 Comments

कविता: जो खुद को सेकुलर नहीं मानते उनके लिए

बाहर हैं तो अभी सीधा घर जाइये

घर जाकर टी.वी. में आग लगाइये

सभी जाति -धर्म के लोग दिखाई देगें

फिल्म - सीरियल पर नजर दौड़ाइये

बच्चों को उस स्कूल में डालिये

जहां आपकी जाति के शिक्षक होने चाहिये

सामान हर दुकान से मत खरीदिये

दुकान भी आपकी जाति धर्म की होनी चाहिए

किस धर्म के आदमी ने बनाया है ये सामान ?

अपनी जाति के दुकानदार से पुछवाईये

आप सेकुलर नहीं जो किसी के भी हाथ का खालें

इसलिए कुछ दिन…

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Posted on October 23, 2017 at 11:00pm — 9 Comments

कविता ---- एक दूजे का साथ ------

इतने साल बीत गये 

ना वो बदली जरा ना मैं !

आज भी उसे नहीं पसंद

मेरा किसी और से बात करना !

मुझे भी आजतक नहीं भाया

उसका किसी को देख मुस्काना !

उसे अच्छा नहीं लगता जब

मेरा ध्यान उससे हट जाना !

मुझे पसंद नहीं आता उसका

मुझे छोड़ टी.वी. तक देखना !

वो कहती है सुनो प्रिय 

मैं सामने हुं तो मुझे ही देखो !

मुझे भाता है उसे चिडाना

दूसरों को देख देख मुस्काना !

उसे पसंद तक नहीं मेरा चश्मा

मेरी आंखों पर हमेशा रहता…

Continue

Posted on October 5, 2017 at 4:00pm — 5 Comments

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