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जयति जैन "नूतन"
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जयति जैन "नूतन"'s Page

Latest Activity

atul kushwah commented on जयति जैन "नूतन"'s photo
Apr 1
जयति जैन "नूतन" commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post निशब्द संसार
"सभी का तहे दिल से शुक्रिया"
Dec 8, 2017
Manoj kumar shrivastava commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post निशब्द संसार
"अप्रतिम रचना,आदरणीया जयति जैन जी कोटिशः बधाइयाँ स्वीकार करें।"
Dec 2, 2017
Samar kabeer commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post निशब्द संसार
"मोहतरमा जयति जैन "नूतन"जी आदाब, अच्छी रचना हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 2, 2017
जयति जैन "नूतन" posted a blog post

निशब्द संसार

तुम शब्द होऔर मैं अर्थतुम हो तो मैं हुंशब्द बिन अर्थ बेकारनिशब्द संसार तुम प्रीत होऔर मैं जोगनतुम हो तो जीवन रोशनप्रीत बिन जोगन निराधारनिशब्द संसार तुम सुर होऔर मैं तालतुम संग सुरमय दिनरातसुर बिन ताल एक विलापनिशब्द संसार तुम दिल होऔर मैं जानसांसे धडकन की पहचानदिल बिन जान, मौत का समाननिशब्द संसार तुम किताब होऔर मैं पन्नाबूंदो का एक झरनाकिताब बिन पन्ना बेजुबाननिशब्द संसार ! = जयति जैन "नूतन" ...( मौलिक , स्वरचित और अप्रकाशित  )See More
Dec 2, 2017
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कमाल की बात है
"सुंदर कटाक्ष"
Nov 29, 2017
Sheikh Shahzad Usmani commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कमाल की बात है
"वाह। सब के मन की बात कहती बेहतरीन विचारोत्तेजक कटाक्षपूर्ण रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और शुभकामनाएं आदरणीया जयति जैन 'नूतन'जी। कुछ टंकण त्रुटियों को सुधारने की तुरंत ज़रूरत है। //..जमकर मौज उडाया है// =//.. मौज उड़ाकर मज़ाक…"
Nov 27, 2017
जयति जैन "नूतन" posted a blog post

कमाल की बात है

बुजुर्गों को सत्ता और युवाओ को बेरोजगार बनाया है,कमाल है इतने सालों में क्या देश हमने बनाया है ! टेक्स हमने भरे सारे, नेताओं ने जमकर मौज उडाया है,कमाल की बात है कि हमने अब तक इन्साफ नहीं पाया है !घोटालों पर घोटाले होते रहे और हम खुली आंखों सोते रहे,कमाल की बात है कानून के नाम पर क्या बेवकूफ़ बनाया है !शिक्षित लोग, विकसित देश का सपना लिये फ़िर रहे हैं हम,कमाल की बात है ऊचे पद पर अनपढो को बैठाया है !युवा देश का भविश्य हैं ये फेंकने की बाते हैं सारी,कमाल की बात है धुंये में क्या तीर चलाया है !------…See More
Nov 27, 2017
Mohit mishra (mukt) commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता- जी एस टी
"उत्तम रचना बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीया "
Oct 31, 2017
Mohammed Arif commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता- जी एस टी
"आदरणीया जयति जैन जी आदाब, जीएसटी के दंश को पूरा देश झेल रहा है । जीएसटी ने पूरे देश के उद्योग जगत् को तहस-नहस करके रख दिया है । छोटे कारोबारी सब मारे गए हैं । सरकार का विकास का झूठा झुनझुना बिका हुआ मीडिया रात-दिन बजा रहा है । यह केवल आपकी या मेरी…"
Oct 29, 2017
Afroz 'sahr' commented on जयति जैन "नूतन"'s photo
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जयति जैन "नूतन",

"मोहतरमा जयति नूतन साहिबा आपकी कलम की धार सदैव ही आपके हौसलों की तरह चमकती रहे । सुंदर रचना के लिए आपको मेंरी और से बहुत बधाई । ,,"
Oct 29, 2017
जयति जैन "नूतन" posted a blog post

कविता- जी एस टी

कविता- जी एस टी मैं सो रही थी मुझे उठाया गया,नींद में ही गाडी में बैठाया गया !होश में आती उससे पहले ही बताया गया, व्यापारियों का खून चूसने जीएसटी लगाया गया ! अधिकारी के दफ़्तर संग लाया गया,टेक्स का सारा दुख जताया गया !टेक्स का सारा दुख जताया गया,मुझे अधिकारी के दफ़्तर लाया गया ! बोले पहल तुम करोगी हमारी,दलदल में मुझ बेचारी को फसाया गया !मुझ बेचारी को दलदल में फसाया गया,व्यापारियों का एक एक दुख सुनाया गया ! कौन हो तुम, आयी हो कहां से ?आंखें दिखाकर मुझपर चिल्लाया गया !आंखें दिखाकर मुझपर चिल्लाया…See More
Oct 29, 2017
जयति जैन "नूतन" posted photos
Oct 29, 2017
जयति जैन "नूतन" commented on जयति जैन "नूतन"'s blog post कविता ---- एक दूजे का साथ ------
"bahut bahut shukriya sabhi gunijano ka"
Oct 29, 2017
जयति जैन "नूतन" posted a blog post

कविता: जो खुद को सेकुलर नहीं मानते उनके लिए

बाहर हैं तो अभी सीधा घर जाइयेघर जाकर टी.वी. में आग लगाइयेसभी जाति -धर्म के लोग दिखाई देगेंफिल्म - सीरियल पर नजर दौड़ाइयेबच्चों को उस स्कूल में डालियेजहां आपकी जाति के शिक्षक होने चाहियेसामान हर दुकान से मत खरीदियेदुकान भी आपकी जाति धर्म की होनी चाहिएकिस धर्म के आदमी ने बनाया है ये सामान ?अपनी जाति के दुकानदार से पुछवाईयेआप सेकुलर नहीं जो किसी के भी हाथ का खालेंइसलिए कुछ दिन हो सके तो भूंखे ही सो जाइयेकपडा - लत्ता और मकान बनवाना हो यदिअपनी जाति के सभी कारीगर ढूंढ लाइयेमाँ बाप बीमार हो तो किसी के…See More
Oct 28, 2017
जयति जैन "नूतन" updated their profile
Oct 27, 2017

Profile Information

Gender
Female
City State
ranipur
Native Place
Jhansi u.p.
Profession
writer , pharmacist
About me
लोगों की भीड़ से निकली साधारण लड़की जिसकी पहचान बेबाक और स्वतंत्र लेखन है... वर्तमान लेखन- सामाज़िक लेखन, दैनिक व साप्ताहिक अख्बार, चहकते पंछी ब्लोग, साहित्यपीडिया, शब्दनगरी व प्रतिलिपि वेबसाइट पर

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जयति जैन "नूतन"'s Blog

निशब्द संसार

तुम शब्द हो

और मैं अर्थ

तुम हो तो मैं हुं

शब्द बिन अर्थ बेकार

निशब्द संसार

 

तुम प्रीत हो

और मैं जोगन…

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Posted on December 1, 2017 at 7:30pm — 3 Comments

कमाल की बात है

बुजुर्गों को सत्ता और युवाओ को बेरोजगार बनाया है,
कमाल है इतने सालों में क्या देश हमने बनाया है ! 
टेक्स हमने भरे सारे, नेताओं ने जमकर मौज उडाया है,
कमाल की बात है कि हमने अब तक इन्साफ नहीं पाया है !
घोटालों पर घोटाले होते रहे और हम खुली आंखों सोते रहे,
कमाल की बात है कानून के नाम पर क्या बेवकूफ़ बनाया है !
शिक्षित लोग, विकसित देश का सपना लिये फ़िर रहे हैं हम,
कमाल की बात है ऊचे पद पर अनपढो को बैठाया है…
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Posted on November 26, 2017 at 2:30pm — 2 Comments

कविता- जी एस टी

कविता- जी एस टी
 
मैं सो रही थी मुझे उठाया गया,
नींद में ही गाडी में बैठाया गया !
होश में आती उससे पहले ही बताया गया, 
व्यापारियों का खून चूसने जीएसटी लगाया गया !
 
अधिकारी के दफ़्तर संग लाया गया,
टेक्स का सारा…
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Posted on October 27, 2017 at 11:39pm — 2 Comments

कविता: जो खुद को सेकुलर नहीं मानते उनके लिए

बाहर हैं तो अभी सीधा घर जाइये

घर जाकर टी.वी. में आग लगाइये

सभी जाति -धर्म के लोग दिखाई देगें

फिल्म - सीरियल पर नजर दौड़ाइये

बच्चों को उस स्कूल में डालिये

जहां आपकी जाति के शिक्षक होने चाहिये

सामान हर दुकान से मत खरीदिये

दुकान भी आपकी जाति धर्म की होनी चाहिए

किस धर्म के आदमी ने बनाया है ये सामान ?

अपनी जाति के दुकानदार से पुछवाईये

आप सेकुलर नहीं जो किसी के भी हाथ का खालें

इसलिए कुछ दिन…

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Posted on October 23, 2017 at 11:00pm — 9 Comments

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"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , नमस्कार , प्रस्तुत कविता को मान देने के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
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Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ , नमस्कार , प्रस्तुत कविता को मान देने के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
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