For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Aakarshan Kumar Giri
  • Male
  • Patna
  • India
Share on Facebook MySpace

Aakarshan Kumar Giri's Friends

  • Tapan Dubey
  • Abhinav Arun
  • sanjiv verma 'salil'
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
  • Rash Bihari Ravi
  • PREETAM TIWARY(PREET)
 

Aakarshan Kumar Giri's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Bihar
Native Place
Patna
Profession
Journalist

Aakarshan Kumar Giri's Photos

  • Add Photos
  • View All

Aakarshan Kumar Giri's Blog

अपने जज्बात तजुर्बात संभाले रखना

बेरुखी का कोई चिराग जलाये रखना

कम से कम एक सितारे को सताये रखना

शमा जल जायेगी बुझ जायेगी रुसवा होगी

दिल में जज्बात की इक लौ को जलाये रखना

तू वहीं है जहां से मेरी सदा लौटी है

अगर सुना न हो तो कान लगाये रखना

न जाने कौन सी महफिल है जहां मैं भी नहीं

मेरी जज्बात की रंगत को बनाये रखना

साथ वो आये न आये है ये उसकी मर्जी

अपने जज्बात तजुर्बात संभाले रखना

जिन्दगी दूर से कु्छ ऐसी सदा देती है

कोई मुश्किल नहीं अपनों को अपनाये रखना

ख्वाब आंखों में न… Continue

Posted on July 14, 2011 at 2:42pm

घर की खुशबू कुरान जैसी है

ख्वाब उनमें नहीं अब पलते हैं
उसकी आंखें चिराग़ जैसी हैं

उसकी आंखों में है जहां का ग़म
उसकी किस्मत खुदा के जैसी है

कहने को तो दुनिया भी एक महफिल है
इसकी सूरत बाजार जैसी है

हरेक घर को इबादत की नजर से देखो
घर की खुशबू कुरान जैसी है

जबसे आया हूं होम करता रहा हूं
जिन्दगी हवन कुंड के जैसी है



- आकर्षण कुमार गिरि

Posted on April 30, 2011 at 1:00pm — 2 Comments

दिलों का वास्ता कैसा सवालों के जहां साए ?

तेरे दीदार की हसरत, हमारे दिल में पलती है



हुई मुद्दत मेरी नज़रें, तुम्हारी राह तकती हैं



यही ख्वाहिश थी बस दिल में, मैं तेरे दर पे आ बैठा



और उसपे पूछना तेरा, बताओ क्यों यहां आए ?





अनूठे यार हो तुम भी, गज़ब के प्यार हैं हम भी



भले मझधार हो तुम भी, सुनो पतवार हैं हम भी



सवालों से तेरे घबरा गया तो ख़ाक याराना



दिलों का वास्ता कैसा सवालों के जहां साए ?





यही इल्ज़ाम है तुम पर, कि दिल बर्वाद करते… Continue

Posted on March 25, 2011 at 12:07pm — 4 Comments

चुभती साँसें मत देखा कर

ख्वाब पुराने मत देखा कर,
धुंधली यादें मत देखा कर,

और भी दर्द उभर आयेंगे,
दिल के छाले मत देखा कर,

जीवन में पैबंद बहुत हैं,
मूँद ले आँखें मत देखा कर,

अपने घर कि बात अलग है,
घर औरों के मत देखा कर,

कहने वाले बस कहते हैं,
दिन में सपने मत देखा कर,

जीवन का जब जोग लिया है,
चुभती साँसें मत देखा कर,

- आकर्षण

Posted on February 13, 2011 at 10:00am — 3 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 3:12pm on December 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 10:02am on December 13, 2010, Admin said…

At 3:43pm on December 8, 2010, Rash Bihari Ravi said…
namaskar bhai
At 7:38pm on December 4, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 4:11pm on December 4, 2010, Abhinav Arun said…
स्वागत गिरि जी !! ओ.बी. ओ. परिवार में आप से और साहित्यिक आकर्षण आएगा !!ये मंच और समृद्ध होगा |
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
Friday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service