For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Manju Saxena
Share on Facebook MySpace
 

Manju Saxena's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on Manju Saxena's blog post मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है
"मुहतरमा मंजू सक्सेना जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'दिल मे लिक्खे ये सफ़ाहात का आईना है' ये मिसरा बह्र में नहीं है,'सफ़ाहात' ग़लत   शब्द है,सहीह शब्द है "सफ़हात"221 देखियेगा…"
Dec 9, 2019
Manju Saxena posted a blog post

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है दिल पे गुज़री हुई हर बात का आईना है।देखते हो जो ये गुलनार तबस्सुम रुख़ पर उनसे दो पल की मुलाकात का आईना है।आड़ी तिरछी सी इबारत दिखे रुख़सारों पर दिल मे लिक्खे ये सफ़ाहात का आईना है।बाद मुद्दत के उन्हें देख के दिल भर आया ये मुहब्बत के निशानात का आईना है।अश्क् और आहें फ़ुगाँ और तराने ग़म के आपके प्यार की सौगात का आईना है।दामे दौलत के इशारात में फंस कर देखो हर बशर अपनी ही औकात का आईना है।दौर ए दुनिया जो बढ़ी हिद्दत ए नफ़रत दिल में लबो लहजा भी मकाफ़ात का आईना है।अनकहे कुछ…See More
Dec 6, 2019
Manju Saxena commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल... कबीर सर"
Dec 5, 2019
Mahendra Kumar commented on Manju Saxena's blog post लघुकथा....अर्धांगिनी
"आदरणीया मंजू जी, लघुकथा का अच्छा प्रयास है। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। अनावश्यक विस्तार की तरफ़ आदरणीय समर कबीर सर ने इशारा कर ही दिया है। उनकी बात का संज्ञान लें। मंच से जुड़ी रहेंगी तो निश्चित ही आपको मंच से और हम सबको आपसे बहुत कुछ सीखने को…"
Dec 4, 2019
Samar kabeer commented on Manju Saxena's blog post लघुकथा....अर्धांगिनी
"मुहतरमा मंजू सक्सेना जी आदाब,ओबीओ पर आपका हार्दिक ज़्घुवागत है ।लघुकथा का प्रयास अच्छा है,लेकिन बहुत ज़ियादा विस्तार इसे कमज़ोर कर रहा है,ओबीओ पर लघुकथा के सम्बंध में आलेख मौजूद हैं,कृपया उस का लाभ लें,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 28, 2019
Manju Saxena posted a blog post

लघुकथा....अर्धांगिनी

डोरबैल पे उंगली रखते ही दरवाज़ा खुल गया।जैसे बंद दरवाज़े के पीछे खड़ी वसुधा बेसब्री से इसी पल का इंतज़ार कर रही थी । लपक कर पति के हाथ से उसने ब्रीफकेस ले लिया।जब तक उमेश ने कपड़े बदले वसुधा ने चाय के साथ गरम नाश्ता लगा दिया।" पकौड़े…",चाय की टेबल पर बैठते ही उमेश की त्योरी चढ़ गई...उसने आँखें तरेरीं और वसुधा सूखे पत्ते सी काँप गई,"तुम्हें कुछ और बनाना नहीं आता जो रोज़ रोज़ पकौड़े बना देती हो",क्रोध मे उसने पकौड़ों से भरी प्लेट ज़ोर से वसुधा की तरफ फेंकी पर उसका निशाना चूक गया।प्लेट सीधा दीवार से टकरा कर…See More
Nov 27, 2019
Manju Saxena replied to Admin's discussion एक घोषणा : OBO करेगा आपके द्वारा लिखी पुस्तकों का नि:शुल्क विज्ञापन
"बहुत सराहनीय कदम...धन्यवाद"
Sep 18, 2019
Manju Saxena commented on Admin's page Tool Box
"एक ग़ज़ल रात को आफ़ताब देखा हैख्वाब हमने जनाब देखा है। जिनके रुख पर नका़ब थे कितनेउनको भी बेनकाब देखा है। बात करते थे कल हवाओं सेआज खाना ख़राब देखा है। जिसको समझे थे अर्श की माटीशख्स वो लाजवाब देखा है। फूस के घर मे चैन से सोताएक ऐसा नवाब देखा…"
Sep 4, 2019
Manju Saxena joined Admin's group
Thumbnail

ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |धन्यवाद |See More
Sep 4, 2019
Manju Saxena is now a member of Open Books Online
Jul 18, 2019

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow...U.P.
Native Place
Lucknow
Profession
Writer
About me
M.A.(English)LLB ,writing stories, Humour,poetries, gazal,and, laghu katha from last 35 years.My stories ,poems and articles were published in Sarita,Mukta, Kadambini,Hans,Meri Saheli and news papers.

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 5:11pm on May 17, 2025, Erica said…

I need to have a word privately,Could you please get back to me on ( mrs.ericaw1@gmail.com)Thanks.

Manju Saxena's Blog

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है

दिल पे गुज़री हुई हर बात का आईना है।

देखते हो जो ये गुलनार तबस्सुम रुख़ पर

उनसे दो पल की मुलाकात का आईना है।

आड़ी तिरछी सी इबारत दिखे रुख़सारों पर

दिल मे लिक्खे ये सफ़ाहात का आईना है।

बाद मुद्दत के उन्हें देख के दिल भर आया

ये मुहब्बत के निशानात का आईना है।

अश्क् और आहें फ़ुगाँ और तराने ग़म के

आपके प्यार की सौगात का आईना है।

दामे दौलत के इशारात में फंस कर देखो

हर…

Continue

Posted on December 5, 2019 at 12:30pm — 1 Comment

लघुकथा....अर्धांगिनी

डोरबैल पे उंगली रखते ही दरवाज़ा खुल गया।जैसे बंद दरवाज़े के पीछे खड़ी वसुधा बेसब्री से इसी पल का इंतज़ार कर रही थी । लपक कर पति के हाथ से उसने ब्रीफकेस ले लिया।जब तक उमेश ने कपड़े बदले वसुधा ने चाय के साथ गरम नाश्ता लगा दिया।

" पकौड़े…",चाय की टेबल पर बैठते…
Continue

Posted on November 26, 2019 at 8:30pm — 2 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service