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Mayank Sharma
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Profile Information

Gender
Male
City State
Indore
Native Place
Ujjain
Profession
student
About me
in the early stages of writing ... trying to read , analyse and then adopt the newly gained learnings in my writing

Mayank Sharma's Blog

दुल्हन की दास्ताँ

 जो कल उन्मुक्त बेखौफ़ चलती थी

आज अकेले खामोश बैठी है

कल तक जिसका अलग अस्तित्व था

अब दुसरो से पहचान ही उसका अस्तित्व होगा

कल तक जो हर जिम्मेदारी से बचती थी

मदमस्त उल्लासित हो चहकती थी

अब दूसरो की जिम्मेदारी संभालेगी

अपनी हँसी लुप्त कर दूसरो को सँवारेगी

दुल्हन के सुर्ख लाल जोड़े में

एक बंदनी की भाँति लग रही

फ़ेरो की पवित्र अग्नि में

उसकी ख्वाहिशे सुलग रहीं          

सर पर जड़ित स्वर्ण टीका

उसके विषाद मे…

Continue

Posted on March 27, 2011 at 3:00pm — 1 Comment

कुछ अहसास

कुछ अहसास हर अहसास से परे

 कुछ अरमान उम्मीदो से भरे

 गम है लिखे मुक्कदर में सभी

केमहबूब का साथ हर गम हरे



किताब की लिखावट तो नीरस

हैशब्दों की बनावट भी नीरस है

गुलाबों सा महकता महबूब का प्रेम पत्र

लिये जिंदगी का हर रस है  



दुनिया में अस्तित्व हीन हूँ

सनम ही मेरी दुनिया है

 उसी में डुबा रहूँ ताउम्र 

सनम ही मेरा अस्तित्व हैं

 

मिलन यामिनी में साथ बैंठे

खुला आसमा ताकते है

चाँद को…

Continue

Posted on February 15, 2011 at 3:30pm

लफ़ंगे परिंदे

यौवन आते ही उन्मुक्त हो उठे

उन्माद में भयमुक्त हो उठे

जमीं से कहा उगे थे जो

आसमा से उँचे हो उठे

 

पहली आजादी के अहसास से

खुलेपन की सास से

चलना कहा सिखा था

गिर पड़े उड़ने के कयास से

 

हवाओं से बाते करते थे

रफ़्तारो से मुलाकातें करते थे

कब मौत ने जिंदगी को पछाड़ दिया

हम तो आपसी हौड़ लगाया करते थे

 

फ़िक्र को धुआ करने मे

सूखे कंठ में मिठास भरने मे

कश लगाया पहली बार

हर…

Continue

Posted on January 16, 2011 at 2:19pm

युवा मन की उलझन

मन मे हो रही एक…

Continue

Posted on December 31, 2010 at 1:59pm

Comment Wall (5 comments)

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At 9:13am on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें !

At 4:38pm on December 31, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 4:32pm on December 31, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 4:05pm on December 31, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 6:01pm on December 30, 2010, Admin said…
 
 
 

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"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
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