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Taj mohammad
  • Male
  • Lucknow, Utter pradesh
  • India
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Nilesh Shevgaonkar commented on Taj mohammad's blog post सब ही शरीफ हो गए।
"आदरणीय ताज मोहम्मद जी वैसे तो आपने लिखा नहीं है कि आपकी रचना ग़ज़ल है लेकिन फ़ॉर्मेट से लगता है कि प्रयास ग़ज़ल कहने का हुआ है.रचना ग़ज़ल के मानकों पर बहर. कहन और क़ाफ़िया में नाकाम हो रही है.इन विषयों पर बहुत सामग्री मंच पर लिनक्स में उपलब्ध है.अध्ययन…"
Jul 1, 2023
Taj mohammad posted a blog post

सब ही शरीफ हो गए।

अपने ही घर में देखो आज हम ज़लील हो गए।तोहमतें लगाकर हम पर सब ही शरीफ़ हो गए।।1।।पता ही ना चला वक्त मेरी बर्बादी का मुझको।मेरे अपने ही दुश्मनों के कितने करीब हो गए।।2।।जो हमारी ज़िन्दगी के थे सब राजदार कभी।वह सब धीरे-धीरे मेरे ही देखो रक़ीब हो गए।।3।।जो ना गए थे छोड़कर हमको यूँ वफ़ादारी में।वो सब के सब ही मेरी तरह बदनसीब हो गए।।4।।बचने की कोई गुंजाइश ना थी बेबस थे बड़े।मेरे अल्फ़ाज़ ही मेरे खिलाफ जब दलील हो गए।।5।।बड़ी मेहनत थी उनकी कैद में पढ़ने लिखनें में।फंसे थे जो कानून के चंगुल में वो वकील हो…See More
Jul 1, 2023
Taj mohammad updated their profile
Jun 30, 2023
Taj mohammad is now a member of Open Books Online
Jun 30, 2023

Profile Information

Gender
Male
City State
Lucknow
Native Place
Lucknow
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About me
मैं बस ऐसे ही अपने लिए लिखा करता हूं मुझे हिंदी अंग्रेजी के अलावा कोई भाषा नही आती। बस आप सबको पढ़ पढ़कर सीखने की कोशिश कर रहा हूं।

Taj mohammad's Blog

सब ही शरीफ हो गए।

अपने ही घर में देखो आज हम ज़लील हो गए।

तोहमतें लगाकर हम पर सब ही शरीफ़ हो गए।।1।।



पता ही ना चला वक्त मेरी बर्बादी का मुझको।

मेरे अपने ही दुश्मनों के कितने करीब हो गए।।2।।



जो हमारी ज़िन्दगी के थे सब राजदार कभी।

वह सब धीरे-धीरे मेरे ही देखो रक़ीब हो गए।।3।।



जो ना गए थे छोड़कर हमको यूँ वफ़ादारी में।

वो सब के सब ही मेरी तरह बदनसीब हो गए।।4।।



बचने की कोई गुंजाइश ना थी बेबस थे बड़े।

मेरे अल्फ़ाज़ ही मेरे खिलाफ जब दलील हो… Continue

Posted on June 30, 2023 at 9:01pm — 1 Comment

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At 10:14am on April 9, 2024, Erica said…

I need to have a word privately,Could you please get back to me on ( mrs.ericaw1@gmail.com) Thanks.

 
 
 

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