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Uma Vishwakarma
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Uma Vishwakarma's Page

Profile Information

Gender
Female
City State
KANPUR
Native Place
Kanpur
Profession
advocate/ writer

Uma Vishwakarma's Blog

काश!

दूर गगन को मैं छू पाऊँ,

काश! कभी ऐसा हो सकता

पाखी बन कर मैं उड़ जाऊँ,

काश! कभी ऐसा हो सकता ?



सारा अंबर घर हो मेरा ।

सदा धरा पर रहे बसेरा ।

इंद्र्धनुष भी मैं बन जाऊँ,

काश! कभी ऐसा हो सकता ?



फूलों की ख़ुशबू बन महकूँ ।

चिड़ियों की जैसी मैं चहकूँ ।

सारा गुलशन मैं महकाऊँ,

काश! कभी ऐसा हो सकता ?



चंदा की मैं ओढ़ चुनरिया।

तारों के संग छैयाँ छैयाँ ।

रोज़ चाँदनी सी झर जाऊँ,

काश! कभी ऐसा हो सकता ?



मौलिक… Continue

Posted on September 8, 2017 at 10:10pm — 3 Comments

लघु कथा

चिंता



"चलो जल्दी । सब बाहर निकलो । बाँध टूट चुका है। पानी बहुत तेज़ी से इधर की ओर आ रहा है ।" बाहर से कई आवाज़ें आ रही थी । आवाज़ सुनते ही शन्नो रसोई में घुस गई । पूरे घर में घुटने तक पानी भर चुका था । रसोई से दाल,चावल,आटा,नमक जितना कुछ उसके दुपट्टे में बँध सका, उसने बाँध लिया । ऊपर रखे डिब्बे में से गुड़मुड़ाए नोटों को निकलना कैसे भूल सकती थी ? निकालने को वो उचकी ही थी कि तभी "अरे! शन्नो जल्दी चल । सब छोड़ दे।" बाहर रफ़ीक चिल्ला रहे थे। "कहाँ मर गई ? जाने कौन सी कचौड़ी पका रही है… Continue

Posted on September 8, 2017 at 5:48pm — 6 Comments

अपाहिज़ कौन: लघुकथा

मुझसे गाड़ी का इंतज़ार नहीं हो रहा था, किसी भी तरह जल्दी गंतव्य स्थान पर पहुँचना था । अभी नया-नया मंत्री पद संभाला था, सो मंत्री पद का शऊर कहाँ से आता ? ऊपर से समाज सेवा का भूत सर चढ़ का नाच रहा था | “पब्लिक की समस्याओं का निवारण करने के लिये, दिन हो या रात ? हमेशा तत्पर रहूंगी |” आज ही तो, ये शपथ ली थी | तभी दिमाग़ में कुछ कौंधा और मैं निकल पड़ी । सामने से जो बस आती  दिखी, मैं बैठने को उतावली हो उठी । बिना कुछ देखे सुने ही, बस पर चढ़ गई । इंसानों से ठसाठस भरी बस थी। भीषण गरमी थी । लोग एक…

Continue

Posted on August 18, 2017 at 12:30pm — 3 Comments

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At 4:06pm on July 29, 2017, Seema Singh said…
हार्दिक स्वागत उमा जी
 
 
 

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