For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

V.M.''vrishty''
Share

V.M.''vrishty'''s Friends

  • Mohit mishra (mukt)
  • Samar kabeer
 

V.M.''vrishty'''s Page

Latest Activity

V.M.''vrishty'' posted a blog post

बरसात

ये नाज़ुक से नगीने-जिनसे करके श्रृंगार,इठलाता है,सदाबहार!यूँ तोबहुत शीतल हैं..मखमली हैं !पर इन्हें छूते ही,अधरों से,जिस्म मेंआग सी जली है!ये एहसास कुछजाना पहचाना-सा है !तेरे अधरों की तरहइनमें भी,,मयखाना-सा है!मौलिक व अप्रकाशितSee More
Oct 20
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय शिज़्ज़ु शकूर जी, प्रणाम! शुभ संध्या! हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय डॉ छोटेलाल जी,प्रणाम! हार्दिक धन्यवाद! आपकी प्रशंसा पा कर मेरे सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि हुई। सादर"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब मिर्ज़ा जावेद जी,सादर अभिनंदन। बहुत बहुत शुक्रिया सुख़न नवाज़ी के लिए"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय अजय गुप्ता जी,शुभ संध्या! बहुत बहुत धन्यवाद आपका"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय प्रभाकर सर, प्रणाम! बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल!  तीसरा छठा और सातवाँ शेर विशेष आकर्षक है। बहुत बहुत बधाई"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय समर कबीर सर,,सादर नमन! सच कहूँ तो आपके इस्लाह के बगैर ये सम्भव नही था मेरे लिए। इस मुबारकबाद के असली हकदार आप ही हैं। बहुत बहुत शुक्र गुज़ार हूँ मैं आपकी! सादर!"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब राज नवादवी जी,आदाब! आपकी दाद के लिए शुक्रगुज़ार हूँ। सादर"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय राजेश जी,प्रणाम! बहुत बहुत दिली शुक्रिया"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब अफ़रोज़ जी,आदाब! बहुत बहुत शुक्रिया"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय समर सर,प्रणाम! आपकी ग़ज़ल भी आप ही कि तरह हरदिल अज़ीज़ है,बेहद खूबसूरत रचना एक निराले अंदाज में। बहुत बहुत दिली मुबारकबाद!"
Oct 19
narendrasinh chauhan commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"खुब सुन्दर रचना"
Oct 19
narendrasinh chauhan commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"लाजवाब"
Oct 19
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"कोई ऐसे सता गया है मुझे देख जिंदा जला गया है मुझे 1 दफ़्न हर शौक करते-करते अब ""सब्र करना तो आ गया है मुझे ""2 सिलसिला बंदिशों का घर में मेरे इक परिंदा बना गया है मुझे 3 जिंदगी भर जिसे तराशा था देके धोखा चला गया है मुझे 4 इतना…"
Oct 19
vijay nikore commented on V.M.''vrishty'''s blog post काली स्याही
"कविता अच्छी बनी है। आपको हार्दिक बधाई V.M. Vrishty ji"
Oct 19
narendrasinh chauhan commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"लाजवाब"
Oct 18

Profile Information

Gender
Female
City State
U.p
Native Place
Gorakhpur
Profession
Student
About me
Love simplicity

V.M.''vrishty'''s Blog

बरसात

ये नाज़ुक से नगीने-
जिनसे करके श्रृंगार,
इठलाता है,
सदाबहार!
यूँ तो
बहुत शीतल हैं..
मखमली हैं !
पर इन्हें छूते ही,अधरों से,
जिस्म में
आग सी जली है!
ये एहसास कुछ
जाना पहचाना-सा है !
तेरे अधरों की तरह
इनमें भी,,
मयखाना-सा है!

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 20, 2018 at 1:06pm

जलती मुस्कुराहटें

कुछ
छिल रहा है!
भीतर-भीतर!
दुख रहा..
नासूर जैसा!!
क्या है ये!
तुम्हारी चुप्पी?
या मेरी उदासी ??
नस-नस में
बेचैनियाँ!
घड़ी-घड़ी घबराहटें !!
क्यों पड़ी हैं आज ?
जलते तवे पर...
रोटियों की जगह-
मेरी मुस्कुराहटें!!

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 16, 2018 at 9:16pm — 8 Comments

काली स्याही

सजल आँखें,,बोझल मन !
अनुत्तरित प्रश्न ! टूटता बदन !
कुछ फिक्र ! कुछ लाचारी !
कुछ चाही...........,
कुछ अनचाही जिम्मेदारी !
ये कहानी थी कभी शामों की!
पर अब,,न जाने क्यों...
सूरज सर पे चमकता है,
फिर भी रातों का अंधेरा,,
आँखों से नहीं छंटता है ।
मैं लिख रही दास्तान---
बदलते हुए हालात की !
कि अब सफेद सुबहों में,
घुली है............
काली स्याही...रात की....!


मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 15, 2018 at 12:24pm — 9 Comments

मौत की उम्मीद पर (ग़ज़ल)

मौत की उम्मीद पर जीने की आदत हो गयी
जिंदगी सूखे हुए पत्ते की सूरत हो गयी
ठंड ओलों की सही सूरज के अंगारे सहे
पीढ़ियों को पाल कर जर्जर इमारत हो गयी
चेहरा पैमाना बना है खूबियों का आज-कल
रंग गोरा है मगर गुमनाम सीरत हो गयी
धो दिया है तेज़ बारिश ने मकानों को मगर
टूटी फूटी झोंपड़ी वालों की शामत हो गयी
मैं! मेरा उत्कृष्ट सबसे! बाकी सब बेकार है
बस यही समझाने में अब हर जुबाँ रत हो गयी
©vrishty
मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 13, 2018 at 12:34pm — 12 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:47am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"अब तो हर क़ातिल मसीहा बन गया है दोस्तोंख़त्म कर दे जो भरोसा उसका मत सम्मान कर l.........बहुत सही…"
6 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"पाकर झूठा सम्मानकद बढ़ता ही गयामगर अपनी हीनज़रों में गिरता गया ।  ........आदरणीय मोहम्मद…"
12 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी,  प्रोत्साहन हेतु बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
14 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
16 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"हौसला अफजाई का शुक्रिया आदरणीय अशोक कुमार साहब ....."
29 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"सार्थक रचना हेतु बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब ......"
33 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी आदाब,                    …"
34 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय नादिर खान साहब सादर, प्रदत्त विषय पर दोनों ही क्षणिकाएँ सुंदर रची हैं आपने. हार्दिक बधाई…"
36 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"द्वितीय पेशकश भी बहुत ही उम्दा । हार्दिक बधाई आदरणीय नादिर ख़ान साहब ।"
38 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"समय का सम्मान कीजै वरना पछतायेंगे आप, बीते पल को कभी वापस नहीं ला पायेंगे आप, .......वाह…"
38 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"बहुत ही लाजवाब मुक्तक । हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय दयाराम मेथानी जी ।"
40 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय नादिर खान साहब आपको प्रस्तुत रचना सुन्दर लगी मेरा सृजन कार्य सफल हुआ. आपका अतिशय आभार. सादर."
42 minutes ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service