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जलती मुस्कुराहटें

कुछ
छिल रहा है!
भीतर-भीतर!
दुख रहा..
नासूर जैसा!!
क्या है ये!
तुम्हारी चुप्पी?
या मेरी उदासी ??
नस-नस में
बेचैनियाँ!
घड़ी-घड़ी घबराहटें !!
क्यों पड़ी हैं आज ?
जलते तवे पर...
रोटियों की जगह-
मेरी मुस्कुराहटें!!

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by narendrasinh chauhan on October 19, 2018 at 11:43am

खुब सुन्दर रचना

Comment by narendrasinh chauhan on October 18, 2018 at 7:52pm

लाजवाब

Comment by V.M.''vrishty'' on October 18, 2018 at 4:03pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी,सादर अभिनंदन! बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद!

Comment by V.M.''vrishty'' on October 18, 2018 at 4:02pm

आदरणीय समर कबीर सर, सादर नमन! आपके स्नेहिल शब्दो के लिए हृदय से आभार!

Comment by V.M.''vrishty'' on October 18, 2018 at 4:00pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,प्रणाम! बहुत बहुत धन्यवाद!

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 18, 2018 at 12:02pm

बढ़िया बहुत बढ़िया कविता आ.वृष्टि जी..

Comment by Samar kabeer on October 17, 2018 at 5:22pm

मुहतरमा "वृष्टि" जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 17, 2018 at 4:57pm

आ. वृष्टि जी, अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई ।

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