For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Vinay Prakash Tiwari (VP)
  • Male
  • Indore
  • India
Share on Facebook MySpace

Vinay Prakash Tiwari (VP)'s Friends

  • रवि भसीन 'शाहिद'

Vinay Prakash Tiwari (VP)'s Groups

 

Vinay Prakash Tiwari (VP)'s Page

Latest Activity

Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"मैं तो बदनाम हुआ नाम से पहले पहले  क्या नशा खूब हुआ ज़ाम से पहले पहलेअर्क या इश्क़ अगर हद से गुज़र  जाए तो  (अर्क = शराब )ज़िन्दगी मौत    बने  साम से पहले पहले    (साम = मौत ) बे-बहा  इश्क़ जुनूँ  हद से…"
Dec 26, 2020

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Vinay Prakash Tiwari (VP)'s blog post कामोदसामन्त : विनय प्रकाश
"आ० विनय जी सुन्दर द्विपदियाँ कही हैं आपने भाव बहुत प्यारे है लेकन शब्दों में थोड़ी कृत्रिमता है ...शिल्प में शब्दचयन में सहजता की कमी महसूस हुई गहन भाव भूमि पर कहन को संजोने के लिए बधाई स्वीकार करें "
Jul 9, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) posted a blog post

कामोदसामन्त : विनय प्रकाश

शायद अब इच्छाओं का अंत हो रहा है यह सीमित शरीर अब अनंत हो रहा हैरे मन अचानक तुझे ये क्या हो गया है खिलखिलाता था तू अब कुमंत हो रहा हैखुशियां बहुत सी बटोरी थी हमने भी हर यादगार लम्हा अब अश्मंत हो रहा हैकरीबी रिश्तों का मेरे मन के साथ सजाया हर विचार शायद अब उमंत हो रहा हैकरंड की भांति हर शरीर धरा पर मेरा भी शहद या धार चली गई अब अस्वंत हो रहा हैमेरा चंचल मन जो नरेश था मेरे निर्णयों का तृप्त है या विचलित पर हीनसामंत हो रहा हैभोगविलास और रिश्तों के बंधनों में था मूर्ख अब मुक्त हो रहा है अब…See More
Jul 7, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' and Vinay Prakash Tiwari (VP) are now friends
Jun 28, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब dandpani nahak साहब बेहद अच्छी ग़ज़ल है बधाई स्वीकार करें"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय मोहतरमा rajesh kumari  जी मैडम आपका तहे दिल से शुक्रिया ग़ज़ल पर वक़्त देने के लिए आप सभी गुणीजनों के सानिध्य में सीख कर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ "
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब मोहन बेगोवाल साहब आपका तहे दिल से शुक्रिया शुक्रगुज़ार हूँ कि आपने ग़ज़ल पर वक़्त दिया"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय मोहतरमा Dimple Sharma जी आपका तहे दिल से शुक्रिया ग़ज़ल पर वक़्त देने के लिए"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब 'अमीर' साहब आपका तहे दिल से शुक्रिया गौरवान्वित हूँ की आपने ग़ज़ल पर वक़्त दिया"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब Md. Anis arman  साहब आपका तहे दिल से शुक्रिया समर सर और बाकि सभी माननीय सदस्यों, आप लोगो की उपस्थिति से बहुत अच्छा सीखने को मिल रह है आगे और सुधार करने की कोशिश करेंगे शुक्रिया "
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब dandpani nahak साहब ग़ज़ल पर वक़्त देने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब समर कबीर साहब कृपया सलाह दें कि अगर "सौ दफा प्यार को बयाँ करते"के बजाए "हर कदम प्यार को बयाँ करते"इस्तेमाल करें तो कैसा रहेगा इसी तरह "ख्वाब में हर दफे तुझे देखा"के बजाए"ख्वाब में हर सहर तुझे…"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब समर कबीर साहब तहे दिल से शुक्रिया ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया देने के लिए शुक्रगुज़ार हूँ आप अपने कीमती वक़्त में से वक़्त निकाल कर हमें ज़रूरी सलाह और शिक्षा देते है आप जाए गुणीजनों से सीखकर आपका आभारी हूँ अगली बार और बेहतर प्रयास करूँगा शुक्रिया"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"खो गया प्यार ज़ुस्तज़ू है वही उन बुझी प्यास आबजू है वही (१) दे दिए घाव सैकड़ो बारी चूमते पाँव घूँघरू है वही (२) सौ दफे प्यार को बयाँ करते थक गया इश्क़ गू-मगू है वही (३) ख्वाब में हर दफे तुझे देखा अब हकीकत कि आरज़ू है वही (४) तू मुझे भूल जा…"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब रवि भसीन 'शाहिद' साहब आपकी ग़ज़ल ने मंत्रमुग्ध कर दिया आपको तहे दिल से बधाई और शुक्रगुज़ार हूँ कि बहुत कुछ सीखने को मिला आपकी ग़ज़ल से"
Jun 27, 2020
Vinay Prakash Tiwari (VP) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय ज़नाब Amit Kumar "Amit" साहब बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल है बधाई स्वीकार करें"
Jun 27, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore
Native Place
Varanasi
Profession
Investment Adviser
About me
It has been more than 12 years, I am expressing myself in words but only for me, now time has come to express to the world

Vinay Prakash Tiwari (VP)'s Blog

कामोदसामन्त : विनय प्रकाश

शायद अब इच्छाओं का अंत हो रहा है

यह सीमित शरीर अब अनंत हो रहा है

रे मन अचानक तुझे ये क्या हो गया है

खिलखिलाता था तू अब कुमंत हो रहा है

खुशियां बहुत सी बटोरी थी हमने भी

हर यादगार लम्हा अब अश्मंत हो रहा है

करीबी रिश्तों का मेरे मन के साथ सजाया

हर विचार शायद अब उमंत हो रहा है

करंड की भांति हर शरीर धरा पर मेरा भी

शहद या धार चली गई अब अस्वंत हो रहा है

मेरा चंचल मन जो नरेश था मेरे निर्णयों…

Continue

Posted on July 7, 2020 at 10:00am — 1 Comment

प्रेमियों केे प्रेम केे निशान बन गए (पूरी ग़ज़ल)

वो फख्र से जुदा हुए अनजान बन गए

प्यार का क़तल किया दीवान बन गए (1)

देते कभी थे इश्क़ में जन्मो के वास्ते

वो चार रोज़ में ही बेगान बन गए (2)

वादों की और इरादों की लम्बी कतार थी

फहरिस्त उन इरादों के अरमान बन गए (3)

अक्सर वफ़ा की कसमें जो खाते थे बार बार

कल तोड़ के कसम वो बेईमान बन गए (4)

महफ़िल कभी जिनके लिए हमने सजाई थी

आज उनकी महफ़िलों के महमान बन गए (5)

एहसास जिनकी कश्ती में महफूज़ था हमें

साहिल…

Continue

Posted on June 12, 2020 at 10:18am — 12 Comments

ऐरावत

आज ऐरावत की मौत हुई तो कोप जताने आया हूँ

जन्म से पहले प्राण गए हैं रोष दिखाने आया हूँ

आया हूँ मैं ये प्रण लेकर संताप नहीं ये कम होगा

धोखे से मनु ने प्राण हरे जो लड़ने का न दम होगा

मानव कितना नीच जीव है कहता खुद को सबसे ऊपर

अ हिंसा का भाषण देकर हाथ उठाता मूक जीव पर

दम्भ तुझे किस बात का मानव तू क्यों इतना है इतराता

तेरे खेल की आग में जलकर झुलस गई गज की माता

कैद रहा है तीन माह से क्या…

Continue

Posted on June 11, 2020 at 8:33pm — 2 Comments

प्रेमियों केे प्रेम केे निशान बन गए

मिलते वहीँ थे घाट पे करते थे गुफ़्तगू
तेरे बगैर घाट भी वीरान बन गए

उस पार रेत से जो हमने घर बनाए थे
वो प्रेमियों केे प्रेम केे निशान बन गए

अक्सर बिताईं शामें हमने विश्वनाथ में
अब पूजते हैं उनको वो भगवान् बन गए

चर्चे हमारे इश्क़ के गलियों में खूब थे
ख़बरों में थे कभी अभी गुमनाम बन गए

किस मोड़ पर ये इश्क़ हमको लेके आ गया
जलकर तुम्हारे प्यार में शमशान बन

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 10, 2020 at 11:23am — 7 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service