प्यादे— बेकसूर, बेख़बर, नियति और नीति से अनजान—
अक्सर मान लिये जाते हैं
मात्र एक संख्या भर।
तैनात कर दिये जाते हैं महाराज-महारानी के गिर्द रक्षा-कवच बनकर,
और उसी क्षण
उनकी पहचान सिमट जाती है—
एक संख्या भर।
वे मात खाते हैं, कभी मात दिलाते भी हैं, गिरते हैं, उठते हैं,
और फिर गिरा दिये जाते हैं—
इतनी सहजता से
कि किसी को
कोई फ़र्क नहीं…
Added by amita tiwari on March 30, 2026 at 10:31pm — No Comments
Added by amita tiwari on March 17, 2026 at 4:05am — No Comments
Added by amita tiwari on March 17, 2026 at 4:02am — No Comments
Added by amita tiwari on March 17, 2026 at 4:00am — No Comments
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