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युद्ध के विरुद्ध हूँ मैं

युद्ध के विरुद्ध हूँ मैं कि

कि युद्ध में  हारा देश हारता है

युद्ध में  जीता देश जीतता है

वो तो शहीदों के घरबार होते हैं

युद्ध जहाँ पलपल बीतता है

इसीलिये युद्ध के विरुद्ध हूँ मैं

  

युद्ध के विरुद्ध हूँ मैं कि

युद्ध सीमा पर कहाँ  लड़े जाते हैं

 युद्ध सीमा पर कहाँ लड़ाए जाते हैं

जो रचते   हैं युद्ध

या रचाते  हैं युद्ध

वो सब तो सिंहासनों पर सजाये जाते हैं

इसीलिये  युद्ध के विरुद्ध  हूँ मैं 

 युद्ध के विरुद्ध हूँ मैं कि

गवाही देता  है  इतिहास

कि जब -जब ताज होता है कायर

या बदहवास  तख़्त की टांग होती है

तो फैला दी जाती हैं झूठी खबर

कि खतरे में बेचारी आवाम होती है

इसीलिये युद्ध के विरुद्ध हूँ मैं

  

ये बहादुरी के गीत

ये जोश भरे गान

सब के सब षड्यंत्र के किस्से होते हैं

शहादतों की मिसालें

शतरंज के चले हुए हिस्से होते हैं

जो भड़काते, फ़ुसलाते है जांबाजों को

गरीब माँओं के गरीब शहजादों को

इसीलिये युद्ध के विरुद्ध हूँ मैं

*****************************

 मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 11, 2022 at 6:21pm

बहुत ही खूब कविता है...बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 7, 2022 at 6:22am

आ. अमिता जी, सुंन्दर प्रस्तुति हुई है। हार्दिक बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 4, 2022 at 1:20am

जय-जय 

Comment by amita tiwari on April 1, 2022 at 7:52pm

आ० समीर  साहिब 

बहुत बहुत आभार .आपकी सराहना से बहुत हौसला मिलता है 

Comment by Samar kabeer on April 1, 2022 at 6:40am

मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब , सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें I 

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