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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog – March 2017 Archive (3)

कोई फकीर तो कोई बादशा नजर आये

बहर:-1212-1122-1212-22



कोई फ़क़ीर तो कोई बादशा नजर आये।।

नजर का फर्क है ये किसको क्या नजर आये।।



है चाह दिल में की मुझको वफ़ा नजर आये।।

लिबास गुल में भी अदबी हया नजर आये।।



उन्हें जो देख लु तो जख्म दिल हरा हो ले ।

वो इश्क राह में इक हादसा नजर आये।।



भटक गया हूँ मै इस जिन्दगी की उलझन में।

है फ़िक्रे दिल की कोई रास्ता नजर आये।।



वो मश्खरे में भी भददी जुबाँ नही होता ।

जिन्हें वजूद में अपने खुदा नजर आये।।



सवाल… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 25, 2017 at 12:11pm — 2 Comments

इश्क की दास्ताँ यह छुपानी नही (गजल)

बहर:- 212-212-212-212



फर्ज के वास्ते बद-जुबानी नही ।

फर्ज वो राह है जिसके मानी नही ।।



हिज्र से बढ़के कोई कहानी नही।।

इश्क की दास्ताँ यह,छुपानी नही ।।



रूठ कर आप ने ही तो रुसवा किया।

आप ने ही मेरी बात मानी नही।।



शोर-ओ- गुल मे बसर हो गई जिंदगी ।

यूं लगे हम ने पाई जवानी नही।।



उम्र का हर तजुर्बा गरल दे रहा ।

इतना जहरीला अश्को का पानी नही ।।



जानलेवा रहा जिंदगी का सफ़र ।

हर कदम मौत है जिंदगानी… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 7, 2017 at 8:00am — 10 Comments

मैंने तन्हाई को भी पाला है। गजल

बह्र:- 2122-1212-22

जिसके तलवे में निकला छाला है।।
घर उसी हौसले ने पाला है।।।

पहले टूटा तिरा वही रिश्ता।
नौ महीने जिसे सभाला है।।

बाद मुद्दत के आज लौटी हो।
मौत कितना तुम्हे खंगाला है।।

मुश्क!.. ये ऐतबार देती है।
दिल नही जी जेहन भीआला है।।

साथ मेरे ही लौट आती है।
मैंने तन्हाई को भी पाला है।।

अप्रकाशित/ मौलिक
आमोद बिन्दौरी

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 3, 2017 at 9:30am — 8 Comments

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