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Vishal Bagh's Blog – May 2011 Archive (2)

अच्छा है

तेरी यादों में खुदको इस तरह से झोंक रखा है
के मैंने कुछ पलों को तेरी खातिर रोक रखा है

तडपता देखकर मुझको अगर तू खुश हुआ तो क्या
मेरी उम्मीद बंधती है तेरा ये शौक़ अच्छा है

सिर्फ तू हो ख्यालों में, मेरी हर सोच में तू हो
न कोई पास आये मैंने सबको टोक रखा है

ये बेटे कल तुम्हारी सब ज़मीनें बाँट ही लेंगे
तो इनकी छह में तुम न उजाडो कोख अच्छा है

Added by Vishal Bagh on May 27, 2011 at 1:35pm — No Comments

जुर्रत हो गयी है

Ye Jurrat ho gayi hai

Mohabbat ho gayi hai



Use bahi ne maaraa



siyasat ho gayi hai



Zalimon bach ke rehna



Baghawat ho gayi hai



Yahan matam na ho gar



Shahadat ho gayi hai



Buzargon ka karoon kya



Wasiyat ho gayi hai



Fata bam aur kya ho



Mazzamat ho gayi hai

ये जुर्रत हो गयी है

मोहब्बत हो गयी है



उसे भाई  ने…

Continue

Added by Vishal Bagh on May 26, 2011 at 4:00pm — 1 Comment

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