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Vishal Bagh
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Gender
Male
City State
Gurgaon, Haryana
Native Place
Kashmir
Profession
IT
About me
I am an urdu poetry enthusiast

Vishal Bagh's Blog

अच्छा है

तेरी यादों में खुदको इस तरह से झोंक रखा है
के मैंने कुछ पलों को तेरी खातिर रोक रखा है

तडपता देखकर मुझको अगर तू खुश हुआ तो क्या
मेरी उम्मीद बंधती है तेरा ये शौक़ अच्छा है

सिर्फ तू हो ख्यालों में, मेरी हर सोच में तू हो
न कोई पास आये मैंने सबको टोक रखा है

ये बेटे कल तुम्हारी सब ज़मीनें बाँट ही लेंगे
तो इनकी छह में तुम न उजाडो कोख अच्छा है

Posted on May 27, 2011 at 1:35pm

जुर्रत हो गयी है

Ye Jurrat ho gayi hai

Mohabbat ho gayi hai



Use bahi ne maaraa



siyasat ho gayi hai



Zalimon bach ke rehna



Baghawat ho gayi hai



Yahan matam na ho gar



Shahadat ho gayi hai



Buzargon ka karoon kya



Wasiyat ho gayi hai



Fata bam aur kya ho



Mazzamat ho gayi hai

ये जुर्रत हो गयी है

मोहब्बत हो गयी है



उसे भाई  ने…

Continue

Posted on May 26, 2011 at 4:00pm — 1 Comment

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